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News in Short
- अमृत-2.0 परियोजनाओं पर निगरानी के लिए विशेष सेल गठित।
- ब्लैकलिस्ट की चेतावनी, ठेकेदारों और अधिकारियों पर होगी कार्रवाई।
- परियोजनाओं में धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताई गई।
- त्रुटिपूर्ण डीपीआर के कारण कई परियोजनाएं अटकी हुई हैं।
- ऑनलाइन मॉनिटरिंग से परियोजनाओं की निगरानी होगी और देरी पकड़ी जाएगी।
News in Detail
BHOPAL.मध्यप्रदेश में भारत सरकार की अमृत-2.0 योजना के तहत चल रही पेयजल और सीवरेज परियोजनाओं पर अब सरकार ने शिकंजा कस दिया है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सभी संभागों में कड़ी और नियमित निगरानी के निर्देश जारी कर दिए हैं। अब हर परियोजना की जवाबदेही तय होगी, और लापरवाही पर सीधी कार्रवाई होगी।
काम में खामी पाई गई तो ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी प्रोजेक्ट में गुणवत्ता से समझौता या तकनीकी गड़बड़ी पाई गई, तो संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। इसके अलावा, परियोजना की निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई तय मानी जाएगी।
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निगरानी के लिए बना सेल
अमृत-2.0 परियोजनाओं की समीक्षा के लिए राज्य स्तर पर एक अलग निगरानी सेल का गठन किया गया है। यह सेल सिविल और तकनीकी कार्यों की अलग-अलग जांच कर रही है, और हर समीक्षा रिपोर्ट सीधे मुख्यालय भेजी जा रही है। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त IAS संकेत भोंडवे ने कई शहरों में काम की धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि ड्राइंग-डिजाइन की मंजूरी में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारी और पीडीएमसी टीम अब जवाबदेही से नहीं बच पाएंगे।
विभागीय समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई परियोजनाएं खराब और त्रुटिपूर्ण डीपीआर की वजह से अटकी हुई हैं। ऐसी डीपीआर तैयार करने वाले सलाहकारों की जांच चल रही है, और दोष साबित होने पर उन्हें भी ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
काम में लापरवाही पर MPUDC की सख्त कार्रवाई, सात ठेकेदार ब्लैकलिस्ट
अब ऑनलाइन मॉनिटरिंग से तय होगी जवाबदेही
डिजिटल प्रगति रिपोर्ट पोर्टल आधारित समीक्षा के जरिए हर स्तर पर निगरानी की जाएगी, ताकि देरी और लापरवाही तुरंत पकड़ी जा सके। बिना अनुमति के किसी भी प्रोजेक्ट में EOT (समय-वृद्धि) जारी नहीं की जाएगी। आयुक्त भोंडवे ने सभी नगरीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति रोज पोर्टल पर अपडेट की जाए।
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पहले ही हो चुकी है सख्त कार्रवाई
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही अमृत-2.0 परियोजनाओं में सुस्ती को लेकर 13 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट, 6 ठेकेदारों को निलंबित किया जा चुका है।
इन शहरों में ज्यादा खराब हालत
प्रदेश के कई शहरों में अमृत-2.0 की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। सीहोर, रायसेन, आष्टा, देवरी, विदिशा, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, मालनपुर, मोहना, सतना, पन्ना, बरोदियाकला, सुरखी, राजगढ़, धार, पीथमपुर, जावरा, रतलाम, मंदसौर, नलखेड़ा, नीमच, नागदा, खरगोन, कटनी, सीहोरा और रीवा में न तो पेयजल आपूर्ति पूरी हो सकी है और न ही सीवरेज लाइन का काम।
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इंदौर-भोपाल भी सूची शामिल
प्रदेश के बड़े शहरों में इंदौर और भोपाल भी सूची में शामिल हैं। इंदौर में सीवरेज के तीन और पेयजल का एक प्रोजेक्ट चल रहा है, लेकिन यहां भी प्रगति संतोषजनक नहीं मानी जा रही। वहीं भोपाल नगर निगम क्षेत्र में भी सीवरेज का काम अधूरा पड़ा हुआ है।
अब सरकार ने अमृत 2.0 योजना को लेकर जीरो टॉलरेंस मोड में है। सवाल साफ है कि अब या तो काम समय पर और गुणवत्ता के साथ होगा, या फिर ठेकेदार और अफसर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
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