LIC ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, क्लेम खारिज करने पर उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला
NEWS IN SHORT
- बिलासपुर आयोग ने LIC के क्लेम को खारिज करने से रोका
- ग्राहक का डेथ क्लेम गलत गणना से नहीं टाला जा सकता
- LIC को क्लेम राशि 9% ब्याज सहित देना होगा
- मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए हर्जाना भी लगेगा
- ग्रेस पीरियड में पालिसी 27 जनवरी तक पूरी तरह वैध
NEWS IN DETAIL
Bilaspur : बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एलआइसी के क्लेम खारिज करने के निर्णय को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी का बीमा कंपनी को जिम्मेदार ठहराते हुए ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया।'
क्लेम खारिज करने की वजह और आयोग की जांच
रतनपुर थाना क्षेत्र के मदनपुर रानीगांव निवासी प्रदीप कुमार वैष्णव ने अपने दिवंगत भाई सनत कुमार वैष्णव के एक्सीडेंटल डेथ क्लेम के लिए एलआइसी में आवेदन किया था। मृतक की जीवन पालिसी तीन लाख रुपये की थी, जिसमें एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट और टीए राइडर के तहत कुल नौ लाख रुपये का कवर था।
एलआइसी ने दावा निरस्त कर दिया क्योंकि पालिसी की त्रैमासिक प्रीमियम देय तिथि 28 दिसंबर 2024 थी। कंपनी ने तर्क दिया कि पालिसी 26 जनवरी 2025 को लैप्स हो गई थी, जबकि दुर्घटना 27 जनवरी को हुई।
विधिक गणना में कंपनी की गलती
आयोग ने प्रीमियम की देय तिथि को प्रथम दिन मानकर ग्रेस पीरियड की गलत गणना को खारिज किया। द जनरल क्लाज एक्ट 1897 की धारा 9 के अनुसार, प्रीमियम देय तिथि को छोड़कर अगले दिन से 30 दिन की गिनती शुरू होती है। इस अनुसार पालिसी 27 जनवरी की रात 12 बजे तक वैध थी।
मूल दावा और मानसिक क्षतिपूर्ति
आयोग ने आदेश दिया कि एलआइसी 45 दिनों के भीतर पूरी क्लेम राशि का नौ प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करे। इसके अलावा, प्रदीप कुमार को मानसिक और शारीरिक कष्ट की पूर्ति के लिए 25 हजार रुपए और वाद व्यय व अधिवक्ता शुल्क के रूप में पांच हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाएं।
उपभोक्ताओं के अधिकार और बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी
बीमा पालिसियों में ग्रेस पीरियड का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिना बाधा के रिस्क कवर देना है। इस अवधि के भीतर मृत्यु होने पर नामिनी को पूरे लाभ का अधिकार है। एलआइसी द्वारा क्लेम अस्वीकार करना सेवा में गंभीर कमी माना गया।
आयोग का संदेश
आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियों को तकनीकी दांव-पेचों के जरिए उपभोक्ताओं को परेशान नहीं करना चाहिए। सही विधिक गणना के बिना क्लेम को अस्वीकार करना कानून और सेवा दोनों में कमी है।
FAQ
- एलआईसी ने क्लेम क्यों खारिज किया था?
कंपनी ने प्रीमियम की गलत गणना कर दावा अस्वीकार किया। - ग्रेस पीरियड का सही मतलब क्या है?
प्रीमियम देय तिथि के अगले दिन से 30 दिन तक पालिसी वैध रहती है। - आयोग ने क्या फैसला सुनाया?
एलआईसी को क्लेम राशि 9% ब्याज सहित देने का आदेश दिया। - उपभोक्ता को और क्या मिलेगा?
मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए 25 हजार रुपए हर्जाना मिलेगा। - अधिवक्ता शुल्क क्या मिलेगा?
कानूनी खर्च के लिए 5 हजार रुपए अलग से दिए जाएंगे।
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