शिक्षा विभाग में करोड़ों का घोटाला; एक कर्मचारी गया जेल, पर क्या फाइलों में दफन हो जाएंगे बड़े नाम?

Umeshwari Baghel | Apr 16, 2026, 19:52 IST
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शिक्षा विभाग में 29.62 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है, जहां कोटा पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया। देवेंद्र कुमार पालके नामक आरोपी ने शासकीय कर्मचारी रहते हुए वेतन और भत्तों में धोखाधड़ी की,दूसरा आरोपी नवल सिंह पैकरा अभी भी फरार है।

NEWS IN SHORT

  • शिक्षा विभाग में 29.62 लाख रुपये के गबन में एक आरोपी गिरफ्तार हुआ हैं
  • कोटा पुलिस ने शासकीय कर्मचारी को गिरफ्तार किया दूसरा आरोपी फरार हैं
  • विजय टांडे की भूमिका पर सवाल, कार्रवाई की मांग
  • फर्जी नियुक्तियों पर भी गंभीर आरोप, कोई कार्रवाई नहीं हुई
  • कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने चेतावनी दी है कार्रवाई जारी रहेगी

NEWS IN DETAIL

Bilaspur। शिक्षा विभाग में 29.62 लाख रुपये के गबन के मामले में कोटा पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। देवेंद्र कुमार पालके पर आरोप है कि उसने शासकीय कर्मचारी रहते हुए वेतन और भत्तों में घोटाला करते हुए



सितंबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच, कुल 29 लाख 62 हजार 222 रुपये की राशि का गबन किया। इस मामले के एक अन्य आरोपी नवल सिंह पैकरा, लेखपाल/सहायक ग्रेड-02, अभी भी फरार है।



शिकायत पर कार्रवाई

कांग्रेस नेता अंकित गौरहा द्वारा की गई शिकायत के बाद इस मामले में कार्रवाई की गई। उन्होंने मुख्य सचिव, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से इस मामले को लेकर शिकायत की थी।



इसके बाद पुलिस ने नरेंद्र प्रसाद मिश्रा की रिपोर्ट पर अपराध दर्ज किया और जांच शुरू की। इस पूरे मामले में शासकीय राशि के गबन और वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।



एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार

कोटा गबन मामला :कोटा पुलिस ने देवेंद्र कुमार पालके को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। और दूसरे आरोपी नवल सिंह पैकरा की तलाश जारी है।



इस मामले में थाना कोटा में अपराध क्रमांक 171/2026 दर्ज किया गया है और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 3(5) के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है।



विजय टांडे की भूमिका पर सवाल

हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी कई सवाल उठ रहे हैं। शिकायत में तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी कोटा और वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर विजय टांडे की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।



आरोप है कि वित्तीय अनियमितताओं का पूरा खेल उनके कार्यकाल खेला गया था, लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा, उन्हें पदोन्नति दी गई।



फर्जी नियुक्तियों की भी उठी आवाज

शिक्षा विभाग में की गई तीन फर्जी अनुकंपा नियुक्तियों का मामला भी इस शिकायत का हिस्सा रहा है। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और क्लर्क सुनील यादव पर गंभीर आरोप हैं



लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं मुख्य आरोपी और जिम्मेदारों को बचाने के लिए जांच को सीमित दायरे में तो नहीं रखा जा रहा।



कांग्रेस नेता की चेतावनी

कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने कहा, छत्तीसगढ़बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे पर दर्जनों आरोप हैं और कई मामलों में उनकी अनियमितताओं की पुष्टि भी हो चुकी है। इसके बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।



अब तक की कार्रवाई महज़ एक शुरुआत है। जब तक इस पूरे मामले में शामिल सभी जिम्मेदारों के खिलाफ निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।



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