छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : महिला अगर अपनी मर्जी से सेक्स वर्कर है तो वह अपराधी नहीं

Umeshwari Baghel | Aug 17, 2026, 20:14 IST
छत्तीसगढ़ HC का अहम फैसला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा कि केवल सेक्स वर्कर होने के आधार पर किसी वयस्क महिला के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। कोर्ट ने रायपुर में दर्ज FIR, चार्जशीट और लंबित आपराधिक केस को रद्द कर दिया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सेक्स वर्कर होने पर केस नहीं
  • हाई कोर्ट ने FIR रद्द की
  • महिला के खिलाफ कार्रवाई खत्म
  • सहमति से सेक्स वर्क अपराध नहीं
  • कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए

Bilaspur। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सेक्स वर्क से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी वयस्क महिला के खिलाफ सिर्फ इसलिए आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि वह सेक्स वर्कर है। यदि कोई वयस्क महिला अपनी सहमति से सेक्स वर्क करती है तो केवल इस आधार पर उसे अपराधी नहीं माना जा सकता।



चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने महिला के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी। कोर्ट ने मामले में दाखिल चार्जशीट और रायपुर की अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही भी खत्म करने का आदेश दिया।



रायपुर के तेलीबांधा थाने में दर्ज हुआ था मामला

मामला रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पुलिस ने अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। जांच के बाद महिला समेत अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट भी पेश की गई।



महिला ने इस कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी। उसने अपनी याचिका में कहा कि जिस समय होटल में पुलिस कार्रवाई हुई थी उस समय वह वहां मौजूद ही नहीं थी।



महिला का आरोप था कि पुलिस ने उसे बाद में थाने बुलाया। इसके बाद उसे मामले में आरोपी बना दिया गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी किया था। बाद में रायपुर की अदालत से उसे जमानत मिली।



महिला ने कहा- चार्जशीट नहीं देने का मिला था भरोसा

याचिका में महिला ने दावा किया कि पुलिस की ओर से उसे बताया गया था कि उसके खिलाफ चार्जशीट पेश नहीं होगी। इसके बावजूद जांच पूरी होने के बाद उसका नाम चालान में शामिल कर दिया गया। इसके बाद महिला ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने एफआईआर और पूरी आपराधिक प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की।



सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हाई कोर्ट ने किया जिक्र

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सेक्स वर्कर्स के अधिकारों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि सेक्स वर्कर को भी कानून के तहत समान सुरक्षा मिलती है। यदि कोई महिला वयस्क है और अपनी मर्जी से सेक्स वर्क कर रही है तो पुलिस केवल इसी वजह से उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं कर सकती।



अदालत ने यह भी माना कि पुलिस को ऐसी महिलाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। केवल उनके पेशे के आधार पर गिरफ्तारी या उत्पीड़न उचित नहीं है।



महिला के खिलाफ नहीं मिला अलग अपराध का ठोस आधार

हाई कोर्ट ने केस के रिकॉर्ड और आरोपों को भी देखा। अदालत ने पाया कि महिला ने होटल में मौजूद होने से ही इनकार किया था।



कोर्ट के मुताबिक जांच में ऐसी स्पष्ट सामग्री सामने नहीं आई जिससे यह साबित हो सके कि महिला ने अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 3, 4, 5 या 7 के तहत कोई स्वतंत्र अपराध किया था। अदालत ने माना कि सिर्फ सेक्स वर्कर होने की बात को आधार बनाकर आपराधिक मुकदमा जारी रखना सही नहीं होगा।



हाई कोर्ट ने पूरी आपराधिक कार्यवाही की समाप्त

डिवीजन बेंच ने कहा कि पर्याप्त आधार के बिना आपराधिक मामला जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसके बाद हाई कोर्ट ने महिला की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने तेलीबांधा थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। उसके आधार पर दाखिल चार्जशीट भी निरस्त कर दी गई। रायपुर की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में लंबित आपराधिक प्रकरण भी खत्म करने का आदेश दिया गया।



यह फैसला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि वयस्कों के बीच सहमति से किया गया सेक्स वर्क अपने आप में अपराध नहीं है। हालांकि मानव तस्करी, जबरन सेक्स वर्क, दलाली या कानून में अलग से प्रतिबंधित गतिविधियों पर कार्रवाई की जा सकती है।



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