नौकरी जाने के बाद आई पति की याद, 22 साल बाद भरण-पोषण की मांग लेकर पहुंची हाईकोर्ट

Pravesh Shukla | Jul 02, 2025, 17:48 IST
bilaspur-maintenance-petition-denied the sootr
पति से भरण पोषण की मांग को लेकर एक महिला ने 22 बाद याचिका लगाई थी। जिसे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इनते लंबे अंतराल के बाद वो भरत पोषण पाने की हकदार नहीं है।

बिलासपुर। पति से भरण पोषण की मांग को लेकर एक महिला ने 22 बाद याचिका लगाई थी। जिसे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इनते लंबे अंतराल के बाद वो भरत पोषण पाने की हकदार नहीं है। हाईकोर्ट ने इस मामले में फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया।



पढ़ें: मंत्री जी पेड़ों की धड़ल्ले से हो रही कटाई, आप कब करेंगे पिटाई



भरण-पोषण के लिए दिया आवेदन

बता दें कि दुर्ग की रहने वाली महिला ने अपने पति के खिलाफ भारतीय न्याय संहित की धारा 144 के तहत कोर्ट में आवेदन दिया था। जिसमें उसने अंतरिम तौर पर हर महीने 40 हजार रुपए भरण-पोषण और मुकदमे पर हुए खर्च के एवज में 25 हजार रुपए की मांग की थी। महिला की याचिका को फैमिली कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वो 22 साल तक चुप क्यों रही । 22 साल बाद अचानक भरण पोषण की मांग करना तर्कसंगत नहीं है। फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका लगाई थी।



पढ़ें: Mahatari Vandan Yojana: 17वीं किश्त हुई जारी, फौरन चेक करें अपना अकाउंट



बेरोजगारी का दिया हवाला

मामले की सुनवाई के दौरान महिला ने कोर्ट को बताया कि वह पहले सरकारी नौकरी में थी, लेकिन फिलहाल बेरोजगार है। साल 2002 में पति और सास ने उसे और बेटे को घर से निकाल दिया था। जिसके बाद 2007 में पटवारी के पर उसे नौकरी मिल गई। जिसके बाद वह एक आपराधिक मामले में फंस गई और 2019 में सेवा से बर्खास्त कर दी गई। इस वजह से अब उसे भरण-पोषण की जरूरत है।



पढ़ें: फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी करने वालों पर शिकंजा, कई अधिकारी जांच के घेरे में



कोर्ट में दी दलील

महिला ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि पत्नी होने के नाते वह भरण-पोषण की हकदार है। क्योंकि उसके पति ने ही 2002 में उसे घर से निकाल दिया। महिला ने कहा कि उसने अपनी सारी जमा पूंजी बेटे की पढ़ाई और बीमार पिता की दवाइयों में खर्च कर दी है। लेकिन हाईकोर्ट महिला के तर्कों से सहमत नहीं हुआ और यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि, महिला ने यह साफ नहीं कि इतने साल बाद आखिर किन कारणों से अचानक भरण-पोषण की जरूरत पड़ी।



पढ़ें: छत्तीसगढ़ पॉवर कंपनी ने तेलंगाना के 1800 करोड़ बकाया के लिए खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा



कोर्ट ने की ये टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि महिला पहले सरकारी सेवा में थी और उसने अपनी बेरोजगारी की स्थिति को भी स्पष्ट नहीं किया। ऐसे में माना जा सकता है कि उसके पास कुछ संसाधन हैं।



भरण‑पोषण, बेरोजगारी, हाईकोर्ट, बिलासपुर हाईकोर्ट, याचिका खारिज, फैमिली कोर्ट , maintenance, petition, unemployment, high court order, family court



thesootr links



दसूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट केसाथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें



अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩‍👦👨‍👩‍👧‍👧



छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला | फैमिली कोर्ट ने दिया फैसला | Bilaspur High Court | Bilaspur High Court big decision | bilaspur high court decision



Tags:
  • High Court
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
  • Bilaspur High Court big decision
  • याचिका खारिज
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला
  • Bilaspur High Court
  • बिलासपुर हाईकोर्ट
  • फैमिली कोर्ट ने दिया फैसला
  • maintenance
  • बेरोजगारी
  • unemployment
  • Petition
  • bilaspur high court decision