करंट से झुलसा था छात्र, हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेशभर के स्कूलों का होगा निरीक्षण
बिलासपुर के प्राथमिक स्कूल सेंदरी में हाल ही में एक छात्र को बिजली के करंट का झटका लग गया। हादसे की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सीएसपीडीसीएल की टीम ने मौके पर पहुंचकर करंट प्रवाहित कर रहे तार को काटा और खामी को सुधार दिया है।
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स्कूल में लगा था छात्र को करंट
सेंदरी के प्राइमरी स्कूल का एक छात्र करंट लगने की वजह से झुलस गया था । खबर पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने संज्ञान लिया था। इसके बाद विभाग के जूनियर इंजीनियर ने निरीक्षण किया।
छत और दीवारें थी गीली
निरीक्षण में पाया गया कि स्कूल की छत पर बारिश का पानी जमा था, जिससे दीवारें गीली हो गई थीं। बिजली का एलटी लाइन का तार दीवार से सटकर गुजर रहा था और इससे ही छात्र झुलसा था। स्कूल शिक्षा विभाग ने हाई कोर्ट में हलफनामा दिया है, बताया कि प्रदेश में 45 हजार से अधिक स्कूल हैं।
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लापरवाही बर्दाश्त नहीं:हाईकोर्ट
हाईकोर्ट हाईटेंशन लाइन, रिसाव और जर्जर वायरिंग जैसी समस्याओं को लेकर निरीक्षण करने को कहा गया है। सभी स्कूलों का प्रारंभिक निरीक्षण कर कार्य योजना तैयार करने के लिए दो महीने का समय मांगा गया है। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है और इसमें कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
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दूर की गई खामियां:विभाग
बिजली विभाग के अधिकारियों ने शपथ पत्र देकर बताया है कि इंशुलेटर और वायरिंग की खामी की वजह से दीवारों में करंट आ रहा था। सीएसपीडीसीएल के अधिकारी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी तकनीकी खामियों को ठीक कर दिया है।
FAQ
- सवाल 1: प्राथमिक स्कूल सेंदरी में छात्र को करंट कैसे लगा?
जवाब: छात्र को करंट इसलिए लगा क्योंकि स्कूल की छत पर बारिश का पानी जमा था, जिससे दीवारें गीली हो गई थीं। उसी दीवार से सटकर एक बिजली की एलटी लाइन का तार गुजर रहा था, जिससे करंट दीवारों में फैल गया और छात्र झुलस गया। - सवाल 2 : हादसे के बाद क्या कार्रवाई की गई?
जवाब: घटना के बाद बिजली विभाग (सीएसपीडीसीएल) की टीम ने मौके पर जाकर जांच की और करंट प्रवाहित कर रहे तार को काटकर खामी को ठीक किया। विभाग ने कोर्ट में हलफनामा देकर बताया कि वायरिंग और इंशुलेटर की तकनीकी खामियां दूर कर दी गई हैं। - सवाल: हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या निर्देश दिए हैं?
जवाब: हाईकोर्ट ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सभी स्कूलों की बिजली व्यवस्था की जांच के निर्देश दिए हैं। हाईटेंशन लाइन, रिसाव और जर्जर वायरिंग जैसी समस्याओं के निरीक्षण के लिए दो महीने का समय मांगा गया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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