बृजमोहन अग्रवाल के चिट्ठी का जवाब नहीं देते थे अमित कटारिया, सांसद का खुलासा
स्वास्थ्य सचिव और सांसद बृजमोहन अग्रवाल के बीच का विवाद तात्कालीक नहीं था, बल्कि लंबे समय से चली आ रही खीचतान का नतीजा था। बृजमोहन अग्रवाल के अनुसार स्वास्थ्य सचिव आईएएस अमित कटारिया उन पत्रो ंका जवाब तक देना उचित नही समझते थे। जिसमें उनके संसदीय क्षेत्र में स्वास्थ्य समस्याओं का जिक्र होता था। कई समस्याएं पेडिंग थीं जिसके बाद बृजमोहन अग्रवाल ने सीएम सचिव सुबोध सिंह से इस बारे में शिकायत की। सुबोध सिंह के कहने पर अमित कटारिया ने बृजमोहन अग्रवाल को फोन किया था, जिसके बाद सारा विवाद सामने आ गया है।
पत्रों की अनदेखी पर बढ़ा विवाद
लोकसभा में की शिकायत के अनुसार सांसद बृजमोहन अग्रवाल पिछले कई महीनों से रायपुर संसदीय क्षेत्र और जनहित से जुड़े मुद्दों पर स्वास्थ्य विभाग को लगातार पत्र लिख रहे थे। कई बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। सांसद ने इसे जनप्रतिनिधि की उपेक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से बचने की कोशिश बताया है।
सीएमओ तक पहुंची शिकायत
मामला तब और गंभीर हो गया जब 20 मई 2026 की शाम करीब 5रू43 बजे सांसद ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह से फोन पर शिकायत की। आरोप है कि प्रमुख सचिव ने तत्काल स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया को निर्देश दिया कि वे सांसद से शिष्टाचारपूर्वक बात करें और लंबित मामलों का निराकरण करें। इसके बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया।
फोन कॉल बना विवाद की वजह
शिकायत में कहा गया है कि उसी दिन रात करीब 7रू44 बजे अमित कटारिया ने सांसद के निजी मोबाइल पर फोन किया। उस समय सांसद एक बैठक में थे, इसलिए कॉल रिसीव नहीं कर सके। बैठक समाप्त होने के बाद उन्होंने वापस कॉल किया। इसी बातचीत के दौरान कथित तौर पर स्वास्थ्य सचिव का व्यवहार अमर्यादित रहा। सांसद का आरोप है कि अधिकारी ने अहंकारपूर्ण लहजे में कहाकृ ष्आपको जो करना है कर लीजिए।ष् इसी कथित टिप्पणी को पूरे विवाद की सबसे गंभीर कड़ी माना गया है।
दिल्ली पहुंचा है मामला
छत्तीसगढ़ की नौकरशाही और राजनीति के बीच टकराव अब दिल्ली तक पहुंच गया है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्वास्थ्य सचिव आईएएस अमित कटारिया के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन की शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्वास्थ्य सचिव ने न केवल सांसद के पत्रों की लगातार अनदेखी की, बल्कि फोन पर भी कथित रूप से अभद्र और अपमानजनक व्यवहार किया। मामला अब लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष पहुंच चुका है और केंद्र सरकार से इस पर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है।
संविधान और प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का यह व्यवहार न केवल सरकारी प्रोटोकॉल के खिलाफ है, बल्कि यह सांसद के संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। सांसद ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 का हवाला देते हुए इसे विशेषाधिकार हनन का मामला बताया है। साथ ही कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (क्वच्ज्) के प्रोटोकॉल दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।
लोकसभा से कार्रवाई की मांग
शिकायत में लोकसभा के प्रक्रिया एवं कार्य-संचालन नियम 227 के तहत मामले को विशेषाधिकार समिति को भेजने की मांग की गई है। साथ ही कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय से लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए हिंदी और अंग्रेजी में तथ्यात्मक टिप्पणी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। शिकायत में अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 18 अथवा केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम 20 के तहत अमित कटारिया के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी की गई है।
राजनीति बनाम नौकरशाही की नई लड़ाई
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यदि लोकसभा विशेषाधिकार समिति इस शिकायत को स्वीकार करती है, तो यह केवल एक अधिकारी के आचरण की जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के संबंधों पर भी बड़ा संदेश देने वाला मामला बन सकता है। फिलहाल स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की ओर से इस शिकायत पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
FAQ
- सांसद बृजमोहन अग्रवाल और IAS अमित कटारिया के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या है?
उत्तर: मुख्य वजह सांसद द्वारा रायपुर की स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर भेजे गए पत्रों की अनदेखी करना और रिमाइंडर के बावजूद IAS अमित कटारिया द्वारा कोई जवाब न देना था। - फोन कॉल के दौरान IAS अधिकारी पर क्या आरोप लगे हैं?
उत्तर: आरोप है कि मुख्यमंत्री सचिव के कहने पर जब कटारिया ने बात की, तो उनका लहजा बेहद अहंकारपूर्ण और अभद्र था तथा उन्होंने कथित तौर पर कहा— "आपको जो करना है कर लीजिए।" - सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
उत्तर: उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 और नियम 227 के तहत विशेषाधिकार हनन (Privilege Breach) की शिकायत दर्ज कराई है।
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