मेरे घर में 80 साल से नहीं आया भैंस का दूध, सांसद बृजमोहन ने कहा, 90 गायों से करते हैं खेती
RAIPUR : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपना गाय प्रेम बताया। उन्होंनेअपने व्यक्तिगत जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि मेरे घर में पिछले 80 सालों से भैंस का दूध नहीं आया है। मेरे खेतों में 90 गाएं हैं, जिन्हें दूध के लिए नहीं बल्कि खेती के लिए रखा गया है। आज मेरे घर में जो चावल, गेहूं, सब्जियां और ड्रैगन फ्रूट पैदा होते हैं, वे पूरी तरह गोबर और गौमूत्र पर आधारित ऑर्गेनिक खेती की देन हैं। मेरी 40 वर्षों की सक्रिय राजनीति और ऊर्जा का राज़ यही पशु और प्राकृतिक जीवनशैली है।"
आज किसान के पास 10 फीसदी पशु:
विश्व पशु चिकित्सा दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में अग्रवाल ने कहा, "हमारे देश में एक समय था जब समृद्धि की गणना घर में मौजूद पशुओं की संख्या से होती थी। जिसके पास जितने अधिक पशु, वह उतना ही धनी माना जाता था। दुर्भाग्यवश, कालांतर में मनुष्य स्वार्थी होता गया और पशुओं की चिंता छोड़ दी। आज केवल 10 फीसदी किसानों के पास पशु बचे हैं, जिसका मुख्य कारण चारे की चिंता और संवेदनशीलता की कमी है।"
सड़क दुर्घटनाएं और संवेदनशीलता की आवश्यकता:
सांसद ने सड़कों पर पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पशुओं के प्रति हमारा लगाव खत्म हो गया है, जिससे वे बेज़ुबान सड़कों पर मरने के लिए छोड़ दिए जाते हैं। उन्होंने कहा, "जब उन्हें चारा नहीं मिलता, तो वे कचरे के ढेर से प्लास्टिक खाने को मजबूर होते हैं। हमें और हमारे वेटनरी डॉक्टरों को अधिक संवेदनशील होने की ज़रूरत है। हर जिले और ब्लॉक में पशु एम्बुलेंस की संख्या बढ़ानी होगी ताकि समय पर घायल पशुओं का इलाज हो सके।"
प्रकृति का संतुलन और पशु चिकित्सा का महत्व:
उन्होंने कहा कि यदि पशु कम होंगे, तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ेगा और प्राकृतिक आपदाएं बढ़ेंगी। अग्रवाल ने पशु चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे न केवल पशुओं के इलाज पर ध्यान दें, बल्कि समाज में अवेयरनेस भी लाएं। उन्होंने सरकार की 'बरसीम घास' उगाने जैसी योजनाओं का लाभ जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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