झीरम से महादेव ऐप तक, 12 बड़े मामलों की सीबीआई जांच पूरी होने का इंतजार

Arun Tiwari | Jul 04, 2026, 14:30 IST
सीबीआई जांच पर सवाल 2026
छत्तीसगढ़ में राज्य गठन के बाद कई हाई-प्रोफाइल हत्या, भ्रष्टाचार और राजनीतिक मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई, लेकिन अधिकांश मामलों का अंतिम नतीजा अब तक सामने नहीं आया है। अब नगई तिहरे हत्याकांड की जांच भी सीबीआई को सौंपे जाने के बाद सवाल उठने लगे हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद सामने आए कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक, भ्रष्टाचार और राजनीतिक मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई, लेकिन इनमें से अधिकांश मामलों में आज तक अंतिम नतीजे सामने नहीं आ सके हैं।



कुछ मामलों में आरोप पत्र दाखिल हुए, कई में गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन दोषसिद्धि की प्रक्रिया अब भी अधूरी है। इस बीच कोरिया जिले के बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद एक बार फिर एजेंसी की कार्यशैली और लंबित मामलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।



एक और कांड सीबीआई के हवाले:

राज्य सरकार ने हाल ही में कोरिया जिले के नगई (कटकोना) तिहरे हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने की मंजूरी दी है। इस मामले में भाजपा नेता सत्य सिंह गेहरवार उर्फ लल्ला और उनके दो साथियों की हत्या कर शवों को वाहन समेत जलाने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।



पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अब मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए सीबीआई से उम्मीदें जताई जा रही हैं।



12 मामलों की जांच कर रही सीबीआई:

छत्तीसगढ़ में इससे पहले भी करीब एक दर्जन संवेदनशील मामलों की जांच सीबीआई के पास पहुंच चुकी है। इनमें कुछ मामलों की जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में पेश किए गए, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया लंबी होने के कारण अंतिम फैसला अब तक नहीं आ सका। वहीं कुछ मामलों में एजेंसी की जांच भी वर्षों तक चलती रही।



सबसे चर्चित मामलों में पत्रकार सुशील पाठक हत्याकांड और पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड शामिल हैं। इनके अलावा 2011 का गरियाबंद क्लर्क डबल मर्डर, ताइडेला-मोरपल्ली आगजनी, झीरम घाटी हमला, रामावतार जग्गी हत्याकांड, नान घोटाला, अंतागढ़ टेप कांड, अश्लील सीडी प्रकरण, महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप, सीजीपीएससी भर्ती घोटाला और दिव्यांग कल्याण फंड गबन जैसे मामले भी अलग-अलग समय पर सीबीआई के पास पहुंचे।



इनमें से रामावतार जग्गी हत्याकांड सबसे लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में उलझे मामलों में शामिल है। ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन अंतिम निर्णय अब भी लंबित है। इसी तरह क्लर्क डबल मर्डर मामले में आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।



वहीं अश्लील सीडी कांड में विशेष अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बरी कर दिया था। हालांकि सीबीआई ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की है, जिसके बाद मामला फिर न्यायिक विचाराधीन है।



सीधे जांच का अधिकार:

राज्य में वर्ष 2019 के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सीबीआई की सामान्य सहमति (जनरल कंसेंट) वापस ले ली थी। इसके कारण एजेंसी राज्य में नए मामलों की सीधे जांच नहीं कर पा रही थी।



वर्ष 2024 में भाजपा सरकार बनने के बाद यह सहमति फिर से बहाल कर दी गई। इसके बाद सीजीपीएससी भर्ती घोटाला, महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप, बिरनपुर हिंसा और दिव्यांग कल्याण फंड गबन जैसे मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई।



इन नए मामलों में जांच अभी जारी है। सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में कई अधिकारियों, बिचौलियों और चयनित अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी हो चुकी है तथा आरोप पत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं।



वहीं महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप और दिव्यांग कल्याण फंड गबन प्रकरण में भी एजेंसी लगातार जांच आगे बढ़ा रही है। हालांकि, सभी मामलों में सीबीआई को समान सफलता नहीं मिली।



उदाहरण के तौर पर, 1998 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी.एल. अग्रवाल से जुड़े चर्चित रिश्वत प्रकरण में एजेंसी अदालत में आरोपों को प्रभावी ढंग से साबित नहीं कर सकी।



निष्कर्ष:

अब कोरिया के तिहरे हत्याकांड की जांच सीबीआई के हाथ में आने के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि प्रदेश के बहुचर्चित मामलों में एजेंसी कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से निष्कर्ष तक पहुंच पाएगी।



पीड़ित परिवारों और आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वर्षों से लंबित मामलों की तरह यह जांच भी लंबी न खिंचे, बल्कि समयबद्ध तरीके से पूरी हो और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सके।



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