1 जुलाई से CBSE का नया नियम, 9वीं-10वीं में दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य
NEWS IN SHORT
- CBSE का नया नियम: 9वीं-10वीं में तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य।
- नई भाषा नीति के तहत दो भारतीय भाषाएं जरूरी होंगी।
- 10वीं बोर्ड में तीसरी भाषा की मुख्य परीक्षा नहीं होगी।
- शुरुआती दौर में 6वीं की किताबों से होगी पढ़ाई।
- शिक्षकों की कमी होने पर स्कूल साझा करेंगे संसाधन।
NEWS IN DETAIL
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक दूरगामी बदलाव करते हुए 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए नई भाषा नीति की घोषणा की है। यह नया नियम आगामी 1 जुलाई से पूरी तरह लागू हो जाएगा। इस नीति के तहत अब 9वीं और 10वीं के छात्रों को अनिवार्य रूप से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाओं का होना अनिवार्य कर दिया गया है।
विदेशी भाषाओं के लिए बदला कॉम्बिनेशन
नए नियमों के अनुसार, यदि कोई छात्र फ्रेंच, जर्मन या अन्य कोई विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो वह उसे तीसरी भाषा (R3) के रूप में चुन सकता है। हालांकि, इसके लिए शर्त यह होगी कि उसकी पहली दो भाषाएं आवश्यक रूप से भारतीय होनी चाहिए। जो छात्र पहले से ही तीन भाषाएं पढ़ रहे हैं, वे विदेशी भाषा को चौथी अतिरिक्त भाषा के रूप में भी रख सकते हैं। इस बदलाव के कारण अंग्रेजी माध्यम के कई छात्रों को अपना पुराना भाषा संयोजन (कॉम्बिनेशन) बदलना पड़ेगा और उन्हें संस्कृत, तमिल, बंगाली या किसी अन्य भारतीय भाषा का चयन करना होगा।
6वीं की किताबों से होगी पढ़ाई
वर्तमान में 9वीं कक्षा के लिए तीसरी भाषा का नया पाठ्यक्रम और किताबें उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए बोर्ड ने निर्णय लिया है कि फिलहाल इन विषयों की पढ़ाई कक्षा 6वीं की किताबों से कराई जाएगी। इस संबंध में पढ़ाने के तौर-तरीकों को लेकर 15 जून तक विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर दी जाएंगी। जिन भाषाओं के लिए एनसीईआरटी (NCERT) की पुस्तकें उपलब्ध नहीं होंगी, वहां राज्य सरकार के शैक्षणिक संसाधनों की मदद ली जाएगी। सीबीएसई ने 19 अनुसूचित भारतीय भाषाओं की सूची जारी की है, जिनकी छठी कक्षा की किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी।
छात्रों को मानसिक तनाव से बचाने के लिए बोर्ड ने एक बड़ा राहत भरा फैसला लिया है। कक्षा 10वीं में तीसरी भाषा के लिए कोई आधिकारिक बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल स्तर पर आंतरिक (इंटरनल) रूप से होगा। हालांकि, इसमें छात्र के प्रदर्शन का उल्लेख सीबीएसई द्वारा जारी अंतिम सर्टिफिकेट में किया जाएगा। बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि तीसरी भाषा में खराब प्रदर्शन के आधार पर किसी भी छात्र को 10वीं की मुख्य बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।
शिक्षकों की कमी से निपटने के विकल्प
इस नीति को सुचारू रूप से लागू करने के लिए स्कूलों के सामने शिक्षकों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। इसे देखते हुए सीबीएसई ने स्कूलों को विशेष छूट दी है। यदि किसी विशिष्ट भाषा के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो स्कूल अन्य विषयों के उन शिक्षकों की मदद ले सकते हैं जो उस भाषा में दक्ष हों। इसके अलावा स्कूल रिटायर्ड शिक्षकों की नियुक्ति कर सकते हैं या 'सहोदय क्लस्टर्स' के माध्यम से आसपास के अन्य स्कूलों के साथ शिक्षक और संसाधन साझा कर सकते हैं।
निष्कर्ष
सीबीएसई का यह फैसला देश की भाषाई विविधता और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है। हालांकि शुरुआत में स्कूलों के लिए शिक्षकों और संसाधनों का प्रबंधन करना एक चुनौती होगी, लेकिन और बोर्ड परीक्षा से छूट देकर बोर्ड ने छात्रों पर से अतिरिक्त तनाव को बेहद समझदारी से कम कर दिया है।
FAQ
- नया भाषा नियम कब से लागू होगा?
यह नियम 1 जुलाई, 2026 से लागू होगा। - 9वीं-10वीं में कितनी भाषाएं पढ़नी होंगी?
कुल तीन भाषाएं, जिनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य हैं। - क्या छात्र विदेशी भाषा चुन सकते हैं?
हाँ, लेकिन पहली दो भाषाएं भारतीय होने पर ही तीसरी भाषा विदेशी होगी।
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