नक्सली कमांडरों के खात्मे के बाद अब रडार पर अंडरग्राउंड कैडर, बस्तर पुलिस का आर-पार का संदेश!
NEWS IN SHORT
- बस्तर में माओवादियों का नेटवर्क आखिरी दौर में पहुंच चूका हैं
- बस्तर IG का कड़ा संदेश, माओवादियों को अब मुख्यधारा में लौटने का आखरी मौका
- तेलंगाना DGP ने माओवादी से किया आत्मसमर्पण करने की अपील
- बस्तर में गिनती के माओवादी बचे हैं कार्रवाई और तेज हो सकती है
- माओवादी कमांडर पापाराव और सोढ़ी के आत्मसमर्पण के बाद बस्तर में गतिविधियां घटीं हैं
NEWS IN DETAIL
Bastar। बस्तर में माओवादी नेटवर्क अब कमजोर पड़ चुका है और अंतिम दौर में पहुंचता नजर आ रहा है। लेकिन कुछ कट्टर माओवादी अभी भी हथियार डालने के लिए तैयार नहीं हैं और सुरक्षा बलों को खुली चुनौती दे रहे हैं।
माओवादी कमांडर पापाराव और PLGA इंचार्ज सोढ़ी के आत्मसमर्पण के बाद बस्तर में सक्रिय माओवादी कम हो गए हैं। बावजूद इसके, कुछ माओवादी अंडरग्राउंड रहकर अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।
मुख्यधारा में लौटने का आखिरी मौका
(बस्तर पुलिस)बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने साफ संदेश दिया है कि बस्तर के बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर बॉर्डर में अब गिने-चुने माओवादी ही बचे हैं।
उन्होंने कहा कि ये माओवादी अब मुख्यधारा में लौटने का आखिरी मौका खोने से बचें। IG ने चेतावनी दी कि यदि माओवादी आत्मसमर्पण नहीं करते, तो सुरक्षा बलों की कार्रवाई और भी सख्त होगी।
तेलंगाना DGP की माओवादी अपील
तेलंगाना के DGP शिवधर रेड्डी ने तेलंगाना मूल के माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील की है। उन्होंने बताया कि 2024 में 125 तेलंगाना मूल के लोग माओवादी संगठन से जुड़े थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर सिर्फ 5 रह गई है।
इन बचे हुए माओवादियों में गणपति और रूपी जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जो अब भी अंडरग्राउंड हैं। इसका मतलब यह है कि बस्तर में माओवादी नेटवर्क लगभग ढह चुका है
लेकिन अंतिम बचे हुए माओवादी अब भी आत्मसमर्पण और मुठभेड़ के बीच फंसे हुए हैं, और उनका अगला कदम उनकी किस्मत तय करेगा।
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