आखिरकार तेलंगाना पुलिस ने टॉप लीडर देवजी समेत तीन माओवादियों का सरेंडर किया घोषित

नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। नक्सली संगठन के टॉप लीडर थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ने अपने साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। डीजीपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी आधिकारिक पुष्टि की।

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Harrison Masih
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Raipur/Hyderabad. छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर बड़ी खबर सामने आई है। नक्सली संगठन के टॉप लीडर थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ने मंगलवार को अपने तीन साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। तेलंगाना के डीजीपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी आधिकारिक पुष्टि की।

देवजी के साथ CCM संग्राम, SCM दामोदर और SCM नरसिम्हा रेड्डी ने भी हथियार डाले हैं। बताया जा रहा है कि बसवा राजू के मारे जाने के बाद संगठन ने देवजी को महासचिव बनाया था। हिड़मा के बाद वह संगठन का सबसे बड़ा चेहरा माना जा रहा था।

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डेढ़ करोड़ का इनामी, 131 जवानों की हत्या का आरोप

छत्तीसगढ़ सरकार ने देवजी पर 1.5 करोड़ रुपए का इनाम घोषित कर रखा था, जबकि संग्राम पर 1 करोड़ रुपए का इनाम था। तेलंगाना पुलिस ने भी दोनों पर 25-25 लाख रुपए का इनाम रखा था।

पुलिस के मुताबिक, देवजी बस्तर में 131 से अधिक सुरक्षा जवानों की हत्या के मामलों में आरोपी रहा है। उसे ताड़मेटला और रानीबोदली जैसे बड़े हमलों का मास्टरमाइंड बताया जाता है।

अधिकारियों का कहना है कि देवजी का आत्मसमर्पण संगठन के लिए बड़ा झटका है और इससे बस्तर में नक्सल नेटवर्क कमजोर पड़ेगा।

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40 साल से जुड़ा था संगठन से

65 वर्षीय नक्सली देवजी तेलंगाना के जगतियाल जिले का रहने वाला है। इंटरमीडिएट के दौरान वह कट्टरपंथी छात्र संगठन से जुड़ा और 1983-84 में गढ़चिरोली दलम का सदस्य बना। इसके बाद से वह लगातार नक्सली गतिविधियों में सक्रिय रहा।

करीब चार दशक तक संगठन में सक्रिय रहने के बाद उसका सरेंडर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

कर्रेगुट्टा में बड़ा ऑपरेशन जारी

राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा पहले ही संकेत दे चुके थे कि कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में बड़ा अभियान चल रहा है। अब तक 89 आईईडी बरामद किए जा चुके हैं।

17 फरवरी को CRPF के नेतृत्व में कर्रेगुट्टा हिल्स पर विशेष ऑपरेशन लॉन्च किया गया है। इस अभियान के तहत शेष शीर्ष नक्सली नेताओं की तलाश जारी है।

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अब बचे सिर्फ 200 आर्म कैडर

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, बस्तर में अब लगभग 200 हथियारबंद नक्सली ही बचे हैं, जो छोटे-छोटे समूहों में छिपे हुए हैं। महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन लगभग खत्म हो चुका है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन में भी संगठन का प्रभाव काफी घट गया है।

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अगला निशाना: दो बड़े नेता

1. Muppalla Lakshmana Rao उर्फ गणपति (3.5 करोड़ इनाम)

भाकपा (माओवादी) का पूर्व महासचिव। 1992 से 2018 तक शीर्ष नेतृत्व में रहा। कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है। विभिन्न राज्यों और एजेंसियों ने मिलाकर उस पर करोड़ों का इनाम घोषित कर रखा है।

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2. Mishir Besra उर्फ भास्कर (1.30 करोड़ इनाम)

झारखंड का रहने वाला। पोलित ब्यूरो सदस्य और मिलिट्री रणनीतिकार माना जाता है। एंबुश लगाने और लेवी वसूली में माहिर बताया जाता है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसे पकड़ने के लिए कई विशेष टीमें तैनात हैं।

क्या खत्म होने जा रहा है नक्सलवाद?

पुलिस अधिकारियों का दावा है कि देवजी के आत्मसमर्पण के बाद यदि गणपति और मिशिर बेसरा या तो सरेंडर करते हैं या मारे जाते हैं, तो छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का अंत लगभग तय हो जाएगा।

देवजी का सरेंडर नक्सल संगठन के लिए मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सुरक्षा एजेंसियों की नजर शेष बचे शीर्ष नेताओं पर है।

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