सूर्यकांत ने भाई-भतीजों के नाम पर खपाई कोयला घोटाले की रकम, अलग-अलग नामों से खरीदी प्रॉपर्टी
उसने भाई-भतीजों, नाते-रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर जमीन और दूसरी प्रॉपर्टी की खरीदारी की।
सूर्यकांत ने अलग-अलग जिलों में अलग-अलग नामों से अवैध कमाई का इन्वेस्टमेंट किया। इतना नहीं जो पैसे बैंक में जमा किए वो भी दूसरी फर्म के नाम पर किए। ईओडब्ल्यू के इन्वेस्टीगेशन में यह सामने आया है कि जिन लोगों के नाम पर संपत्ति खरीदी गई है उन्होंने उसके पैसे दिए ही नहीं बल्कि यह पैसे सूर्यकांत ने दिए।
दिव्या तिवारी
दिव्या तिवारी के नाम पर ग्राम खट्टी, हिमालय पार्क महासमुंद,शापिंग काम्प्लेक्स महासमुंद, ग्राम जामली और रायपुर में प्रॉपर्टी खरीदी। जेडी इंटरप्रायजेज और एएम फ्यूल्स से संबंधित संपत्तियां भी इसमें शामिल हैं। इन प्रॉपर्टी की खरीदी का भुगतान सूर्यकांत तिवारी ने किया। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य 5 करोड़ 7 लाख 24 हजार 760 रुपए था।
दिव्येश चंद्राकर
रायपुर में दिव्येश चंद्राकर तीन संपत्तियां खरीदी गईं। इनका भुगतान सूर्यकांत तिवारी ने किया। इनका बाजार मूल्य 85 लाख रुपए था। बाद में यह संपत्तियां सुनील अग्रवाल के नाम पर की गईं।
सोनाली दुबे
ग्राम खरोरा और बेलसोंडा में सोनाली दुबे के नाम पर चार संपत्तियां खरीदी गईं। इनकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपए है। बाद में यह सामने आया कि यह संपत्ति भी सुनील अग्रवाल के नाम की गई।
शरद तिवारी
ग्राम खरोरा और बेलसोंडा में शरद तिवारी के नाम पर दो संपत्तियां खरीदी गईं। जमीन का सौदा,मूल्य तय और भुगतान सूर्यकांत तिवारी के लोगों ने किया। बाद में यह संपत्तियां सुनील अग्रवाल के नाम कर दी गईं।। और बैंक खातों से रकम निकाल ली गई।
मुकुट दुबे
ग्राम बेलसोंडा में दो जमीनें मुकुट दुबे के नाम पर खरीदी गईं। इन जमीनों की कीमत 85 लाख रुपए थी। मुकुट दुबे ने सिर्फ रजिस्ट्री पर हस्ताक्षर किए। पैसे का भुगतान सूर्यकांत तिवारी ने किया। आयकर तलाशी के दौरान जमीनें परिवारजनों के नाम से हटाकर सुनील अग्रवाल के नाम पर कर दी गईं।
अभिषेक चौबे
ग्राम सिनोथा और बेलसोंडा में दो जमीनें खरीदी गईं। डायरी में अभिषेक, अभी नाम से इंट्री हैं। सूर्यकांत तिवारी इनके पास रकम सुरक्षित रखने के लिए देता था। बाद में यह जमीन भी सुनील अग्रवाल के नाम कर दी गई।
राधाकांत तिवारी
आरंग क्षेत्र में राधाकांत तिवारी के नाम पर दो संपत्ति खरीदीं। इनका मूल्य 2 करोड़ रुपए था। बाद में इन जमीनों को भी सुनील अग्रवाल के नाम पर हस्तांतरित कर दी गई। उनके बैंक से पैसे निकाल लिए गए।
महाराज मोरध्वज मेगा प्रोजेक्ट
ग्राम रसनी में प्रवीण अग्रवाल से 14 एकड़ 25 डिसमिल जमीन खरीदी गई। तीन रजिस्ट्री महाराज मेगा प्रोजेक्ट के नाम पर की गईं। इसके लिए 10 करोड़ रुपए चुकाए गए।
इस तरह इन फार्मों से लिए गए रुपए :
अन्नपूर्णा लॉजिस्टिक 2,25,00,000 रूपए
एएसआर ट्रक लिंक्स प्रा.लि. 87,00,000 रूपए
अजय जैन से संबंधित खाते 90,59,000 रूपए
अन्य व्यक्तियों एवं फर्मों से संबंधित खाते 6,75,00,000 रूपए
कुल 10,77,59,000 रूपए
असुरक्षित ऋण के रूप में दिखाई गई बैंक एंट्री
जांच में यह सामने आया कि वर्ष 2020 से 2022 के दौरान कोयला लेवी से वसूली गई नकद राशि का उपयोग संपत्तियों की खरीदी एवं अन्य व्यावसायिक कार्यों में करने के लिए सूर्यकांत तिवारी द्वारा जोगेन्दर सिंह के माध्यम से बैंक एंट्री की व्यवस्था कराई जाती थी। इसके लिए सूर्यकांत तिवारी नकद राशि जोगेन्दर सिंह को देता था।
जोगेन्दर सिंह अपने से संबंधित अलग-अलग फर्मों एवं खातों के माध्यम से रकम सूर्यकांत तिवारी, रजनीकांत तिवारी और सूर्यकांत तिवारी द्वारा बताए गए व्यक्तियों एवं फर्मों के बैंक खातों में स्थानांतरित करवाता था। इन रकमों को संबंधित खातों में असुरक्षित ऋण (Unsecured Loan) के रूप में दर्शाया जाता था। इस प्रकार कुल 10 करोड़ 77 लाख 59 हजार रूपए की बैंक एंट्री लिए जाने के प्रमाण मिले हैं।