CG Crime Data: गृहमंत्री विजय शर्मा का गृह जिला दंगों में सबसे आगे, भूपेश बघेल का दुर्ग हत्या के प्रयास में अव्वल

Arun Tiwari | Mar 02, 2026, 15:56 IST
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छत्तीसगढ़ में अपराधों पर लगाम लगाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अपराधों पर प्रभावी नकेल नहीं लग पा रही है। गृहमंत्री विजय शर्मा का गृह जिला कवर्धा यानी कबीरधाम दंगों में सबसे आगे रहा है।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ का एक साल का क्राइम फैक्ट फिगर
  • राजधानी रायपुर चोरी में आगे
  • बिलासपुर में मारपीट की वारदातें सबसे ज्यादा
  • दुर्ग में हत्या के प्रयास की घटनाओं में आगे
  • कवर्धा में हर महीने 4 से ज्यादा दंगे

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ की क्राइम कुंडली:

छत्तीसगढ़ में अपराधों पर नियंत्रण के लिए सरकार और पुलिस प्रशासन लगातार दावे कर रहे हैं। गृहमंत्री विजय शर्मा कहते हैं कि पिछली सरकार के मुकाबले बीजेपी सरकार में अपराधों में 30 फीसदी से ज्यादा कमी हुई है।



सरकारी आंकड़ों के आधार पर द सूत्र द्वारा तैयार की गई एक साल की क्राइम कुंडली यह बताती है कि प्रदेश के प्रमुख शहरों में अलग अलग किस्म के अपराध हुए हैं।



कहीं दंगे सुर्खियों में रहे, तो कहीं मारपीट, हत्या के प्रयास और चोरी की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यह आंकड़े जनवरी 2025 से लेकर जनवरी 2026 तक हैं।



गृहमंत्री का जिला दंगों में आगे :

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा का गृह जिला कवर्धा यानी कबीरधाम दंगों के मामलों में सबसे आगे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक साल में यहां कुल 55 दंगे दर्ज किए गए।



यानी औसतन हर महीने चार से पांच दंगे। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब यह जिला स्वयं गृह विभाग के मुखिया का गृह क्षेत्र है।



विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक तनाव, छोटी-छोटी घटनाओं पर प्रशासनिक कार्रवाई में देरी और स्थानीय स्तर पर संवाद की कमी इसकी बड़ी वजह हो सकती है।



पूर्व सीएम के क्षेत्र की स्थिति :

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गृह जिला दुर्ग हत्या के प्रयास के मामलों में अव्वल रहा है। दुर्ग में एक साल में 159 हत्या के प्रयास दर्ज किए गए। हालांकि यह अलग बात है कि अपराध रोकने का काम प्रशासन का होता है।



प्रशासन मौजूदा सरकार के हिसाब से काम करता है। एक साल में यहां 1634 चोरी की घटनाएं दर्ज की गईं। बिलासपुर संभाग में मारपीट की घटनाएं सबसे अधिक दर्ज की गईं।



एक साल में यहां 5199 मारपीट के मामले सामने आए। राज्य की राजधानी और राजनीतिक-प्रशासनिक केंद्र रायपुर में चोरों का बोलबाला रहा। बढ़ती आबादी, तेज़ी से हो रहा शहरीकरण और पुलिस बल पर बढ़ता दबाव राजधानी में चोरी की घटनाओं को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण माने जा सकते हैं। आपराधिक वारदातों को रोकने के लिए ही रायपुर में कमिश्नर प्रणाली लागू की गई है।



यह जिले इन अपराधों में आगे :

. रायपुर में चोरी - 1634


. बिलासपुर में मारपीट - 5199


. दुर्ग में हत्या के प्रयास - 159


. कवर्धा में दंगे - 55



इन इलाकों में अपराधों के बड़े मामले :

रायपुर :



चोरी - 1634


डकैती - 7


हत्या - 99


हत्या के प्रयास - 103


छेड़छाड़ - 154


बलात्कार - 314


मारपीट - 3945


दंगे - 0



बिलासपुर :



चोरी - 805


डकैती - 0


हत्या - 61


हत्या के प्रयास - 38


छेड़छाड़ - 96


बलात्कार - 212


मारपीट - 5199


दंगे - 0



दुर्ग :



चोरी - 996


डकैती - 2


हत्या - 55


हत्या के प्रयास - 159


छेड़छाड़ - 110


बलात्कार - 203


मारपीट - 3668


दंगे - 0



कवर्धा :



चोरी - 64


डकैती - 0


हत्या - 30


हत्या के प्रयास - 14


छेड़छाड़ - 36


बलात्कार - 53


मारपीट - 1011


दंगे - 55



Sootr knowledge :

दंगे में अव्वल जिला: कवर्धा (कबीरधाम)


मारपीट में सबसे आगे: बिलासपुर संभाग


हत्या के प्रयास में अव्वल: दुर्ग


चोरी का गढ़: रायपुर



important points :

. हर जिले में अपराध की प्रकृति अलग


. शहरी इलाकों में चोरी और मारपीट ज्यादा


. दंगे, हत्या के प्रयास चिंता का कारण


. प्रयासों के बाद भी अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं



अब आगे क्या :

सरकार कहती है कि पहले की तुलना में अपराधों में कमी आई है लेकिन मेरी कमीज,तेरी कमीज से सफेद है कहकर जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता।



जानकारों का मानना है कि केवल पुलिसिया कार्रवाई से अपराध पर पूरी तरह लगाम लगाना संभव नहीं है। इसके लिए सामाजिक जागरूकता, जल्दी न्याय, प्रशासन की सक्रियता और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी उतनी ही ज़रूरी है।



रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली की तरह दुर्ग और बिलासपुर जैसे शहरों में कमिश्नरेट लागू करने पर विचार किया जा रहा है।



निष्कर्ष :

आंकड़ों पर नज़र डालें तो साफ़ होता है कि छत्तीसगढ़ में अपराध का स्वरूप जिलेवार बदला है। कहीं सामूहिक हिंसा यानी दंगे प्रमुख समस्या हैं, तो कहीं व्यक्तिगत अपराध जैसे मारपीट, हत्या के प्रयास और चोरी।



पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराध नियंत्रण के लिए गश्त बढ़ाई जा रही है। संवेदनशील इलाकों की पहचान कर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं ।और तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। पहले के मुकाबले क्राइम पर कंट्रोल हुआ है।





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