बिना शिकायत महिला इंजीनियर को कर दिया अटैच, आदेश के बाद घिरा प्रशासन
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से एक प्रशासनिक विवाद सामने आया है। एक महिला सब इंजीनियर ने अपने ही विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनका गलत तरीके से अटैचमेंट किया गया। महिला इंजीनियर से इस संबंध में पंचायत मंत्री विजय शर्मा से गुहार लगाई है। मुंगेली जिले का यह मामला अब प्रदेश स्तर चर्चा का विषय बन गया है।
क्या हैं महिला इंजीनियर के आरोप
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा(RES) की महिला सब इंजीनियर सोनल जैन ने स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया है। सोनल जैन के अनुसार उन्हें नियमों के विरुद्ध जबरन जनपद पंचायत मुंगेली से हटाकर आरईएस डिवीजन ऑफिस में अटैच कर दिया गया। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में न तो सही प्रक्रिया का पालन किया गया और न ही उन्हें स्पष्ट कारण बताया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस फैसले का विरोध किया, तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
आरटीआई के जवाब भी पक्ष में
अटैचमेंट के बाद सब इंजीनियर ने आदेश के पीछे का कारण जानने की कोशिश की। आरटीआई के जरिए अपने खिलाफ जांच और शिकायत की जांनकारी मांगी। जिसमें दोनों के जवाब उनके पक्ष में है। विभाग की तरफ जवाब में बताया गया है कि न तो उनके खिलाफ कोई शिकायत मिली है और न ही जांच हुई है।
अटैचमेंट को लेकर हाल ही में हंगामा
शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के बिना कारण अटैचमेंट को लेकर हाल में खुब हंगामा हुआ। स्वास्थ्य मंत्री को सदन में ही विभाग के कर्मचारी और डॉक्टरों का अटैचमेंट समाप्ति की घोषणा करना पड़ा। इसके अलावा स्कूल शिक्षा विभाग में भी अटैचमेंट का विरोध होता आया है। इस मामले ने नया विवाद पैदा कर दिया है।
संलग्नीकरण पर क्यों उठ रहे सवाल
सोनल जैन का कहना है कि उनका संलग्नीकरण बिना सक्षम स्वीकृति और नियमों के खिलाफ किया गया। उन्होंने आरटीआई के माध्यम से इस आदेश की जानकारी मांगी, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इससे संदेह और गहरा गया है कि कहीं इस पूरे मामले में नियमों की अनदेखी तो नहीं की गई। विभागीय प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी इस विवाद को और बढ़ा रही है।
सोशल मीडिया बना बड़ा हथियार
जब विभागीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, तो महिला इंजीनियर ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्होंने फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर अपनी बात सार्वजनिक की, जिसके बाद यह मामला तेजी से वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने खुलकर प्रतिक्रिया दी और महिला अधिकारी के समर्थन में आवाज उठाई। इससे प्रशासन पर दबाव भी बढ़ गया है।
राजनीतिक दबाव का भी आरोप
मामले में एक और बड़ा आरोप यह है कि महिला सब इंजीनियर पर राजनीतिक दबाव बनाया गया। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनके खिलाफ कार्रवाई के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस एंगल ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा सवाल प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे हैं। महिला इंजीनियर द्वारा बार-बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई या स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। प्रमुख सचिव और मंत्री स्तर तक मामला पहुंचने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मामला कहीं न कहीं दबाया जा रहा है।
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