500 करोड़ के बॉन्ड बेचकर विकास का दावा, वित्त विभाग का नोटिफिकेशन, फिर उठे सवाल

VINAY VERMA | Apr 17, 2026, 12:14 IST
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छत्तीसगढ़ सरकार ने विकास योजनाओं के लिए 500 करोड़ के बॉन्ड बेचने का फैसला किया है, जिसकी नीलामी आरबीआई के जरिए होगी। 5 साल की अवधि वाले इस कर्ज पर ब्याज दर बाजार के आधार पर तय होगी, जिससे राज्य पर वित्तीय बोझ बढ़ने की आशंका है।

Raipur. छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बार फिर बाजार से कर्ज लेने का फैसला किया है। वित्त विभाग द्वारा जारी राजपत्र के मुताबिक राज्य सरकार 500 करोड़ रुपए के सरकारी बॉन्ड बेचने जा रही है। यह बॉन्ड 5 साल की अवधि के होंगे। सरकार का कहना है कि यह पैसा विकास योजनाओं में लगाया जाएगा।



विकास या कर्ज का जाल?

नोटिफिकेशन में साफ लिखा है कि यह लोन डेवलपमेंट स्कीम्स के लिए लिया जा रहा है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि राज्य का कुल कर्ज लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विपक्ष और वित्त विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या सरकार अपने संसाधनों से विकास नहीं कर पा रही? क्या हर बार बाजार से पैसा उठाना ही एकमात्र रास्ता बचा है?



आरबीआई के जरिए होगी नीलामी

इस बॉन्ड की बिक्री भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से की जाएगी। खास बात यह है कि इसमें ब्याज दर भी बाजार आधारित नीलामी से तय होगी। यानी सरकार को जितनी ज्यादा दर पर पैसा मिलेगा, उतना ही महंगा कर्ज राज्य के सिर चढ़ेगा।



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आम लोगों के लिए भी मौका

सरकार ने इस बॉन्ड में आम निवेशकों के लिए भी दरवाजा खोला है, लेकिन सिर्फ 10% हिस्सेदारी ही नॉन-कॉम्पिटिटिव बिडर्स को मिलेगी। एक व्यक्ति अधिकतम 1% तक ही निवेश कर सकता है। यानी आम जनता को शामिल करने का दावा तो है, लेकिन असली खेल बड़े निवेशकों और संस्थानों के बीच ही होगा।



केंद्र की मंजूरी के बाद उठाया कदम

राज्य सरकार ने इस कर्ज के लिए केंद्र सरकार से अनुमति भी ले ली है। यानी पूरा प्रोसेस कानूनी रूप से सही है, लेकिन इससे यह भी साफ होता है कि राज्य की वित्तीय स्थिति इतनी मजबूत नहीं कि बिना उधार लिए काम चल सके।



सवालों के घेरे में वित्तीय प्रबंधन

लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर सरकार की वित्तीय नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या सरकार राजस्व बढ़ाने में विफल रही है? क्या योजनाओं का क्रियान्वयन इतना महंगा हो गया है कि बिना कर्ज लिए काम ही नहीं चल सकता?



आगे क्या होगा?

अगर बाजार से अच्छी प्रतिक्रिया मिलती है तो सरकार को राहत मिल सकती है, लेकिन अगर ब्याज दरें ज्यादा रहीं तो आने वाले सालों में यह कर्ज राज्य के लिए बड़ा बोझ बन सकता है।



विकास की कीमत या भविष्य का संकट?

सरकार इसे विकास के लिए जरूरी कदम बता रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि हर नया कर्ज भविष्य की जिम्मेदारी भी बढ़ाता है। सवाल यही है क्या यह फैसला छत्तीसगढ़ को मजबूत बनाएगा या आने वाले समय में वित्तीय संकट की नींव रखेगा?



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