बिजली बिल में डूबे छत्तीसगढ़ सरकारी विभाग, निकायों पर सबसे ज्यादा बकाया
समझें क्या है पूरा मामला
- छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों पर बिजली बिल का बकाया लगातार बढ़ रहा है।
- मौजूदा समय में यह आंकड़ा 3200 करोड़ रुपए को पार कर गया है।
- सबसे ज्यादा 1586 करोड़ का बकाया नगरीय निकाय विभाग पर है।
- सरकार अब अगस्त से सभी सरकारी कनेक्शनों को प्रीपेड करने जा रही है।
- तीन महीने का एडवांस बिल जमा करने के आदेश पर विभाग सुस्त हैं।
सालों पुरानी है यह समस्या
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से ही सरकारी विभागों में बिजली बिल जमा करने को लेकर यह लापरवाही लगातार बनी हुई है। सरकारी विभाग कभी भी समय पर अपना बिजली बिल जमा नहीं करते हैं। इस वजह से पावर कंपनी (Power Company) को हर साल राज्य सरकार के बजट से ही उम्मीद रखनी पड़ती है। सरकार से बार-बार आग्रह करके बजट में बिल भुगतान के लिए व्यवस्था कराई जाती है।
हैरानी की बात यह है कि हर सरकारी विभाग के पास अपने बिजली बिल के भुगतान के लिए अलग से फंड की व्यवस्था होती है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी समय पर बिल जमा करने में कोई रुचि नहीं दिखाते हैं। बकाया राशि अरबों रुपये तक पहुंचने के बाद भी कभी इन विभागों की बिजली नहीं काटी जाती। इसी छूट का फायदा उठाकर विभाग लगातार ढिलाई बरत रहे हैं।
चार महीने में बढ़ा करोड़ों बकाया
मार्च 2026 की स्थिति तक सरकारी विभागों पर लगभग 2883 करोड़ रुपए का बकाया दर्ज था। नए वित्तीय सत्र के महज चार महीनों में ही यह बकाया बढ़कर 3200 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है। अकेले वित्त वर्ष 2025-26 में ही सरकारी दफ्तरों ने 1252 करोड़ रुपए की बिजली का उपयोग किया था। इसके बदले पावर कंपनी को सिर्फ 814 करोड़ रुपये ही मिले और 438 करोड़ रुपये का नया बकाया जुड़ गया।
पुराना बकाया और नया बिल मिलकर अब पावर कंपनी के लिए बड़ा वित्तीय संकट बन चुका है। अगर पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च 2025 में कुल बकाया 2444 करोड़ रुपये था। यह आंकड़ा मार्च 2026 में बढ़कर 2883 करोड़ रुपये हो गया। अब चालू सत्र में इसमें और ज्यादा तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
किस विभाग पर कितना कर्ज
अगर बकायेदार विभागों की सूची देखें तो सबसे खराब स्थिति नगरीय निकाय विभाग की बनी हुई है। नगरीय निकाय विभाग पर अकेले 1586 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बिजली बिल बकाया है। इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का नंबर आता है, जिस पर 876 करोड़ रुपए बाकी हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानी पीएचई (PHE – Public Health Engineering) पर भी 109 करोड़ रुपए का बकाया चढ़ा हुआ है।
अन्य प्रमुख विभागों में स्कूल शिक्षा विभाग पर 80 करोड़ रुपए और चिकित्सा विभाग पर 31 करोड़ रुपए का बिल बाकी है। इसके अलावा आदिम जाति कल्याण विभाग पर 28 करोड़, जल संसाधन पर 27 करोड़, गृह विभाग पर 26 करोड़, महिला एवं बाल विकास पर 26 करोड़ और आवास पर्यावरण विभाग पर 23 करोड़ रुपए बकाया हैं। लोक निर्माण, राजस्व, वन, कृषि और उच्च शिक्षा जैसे दर्जनों अन्य विभाग भी लाखों-करोड़ों के बकायेदार बने हुए हैं।
अगस्त से लागू होगी प्रीपेड व्यवस्था
लगातार बढ़ते इस अरबों रुपये के बकाये को रोकने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। सरकार ने फैसला किया है कि सभी सरकारी बिजली कनेक्शनों को अब प्रीपेड सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत हर विभाग को तीन महीने का एडवांस बिजली बिल पावर कंपनी के पास जमा करना अनिवार्य होगा। इस एडवांस भुगतान की प्रक्रिया पिछले तीन महीनों से ही चलाई जा रही है।
हालांकि शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद सरकारी विभाग इस व्यवस्था को लेकर अब तक गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। शुरुआती तीन महीनों की समय सीमा बीत जाने के बाद भी किसी भी विभाग ने एडवांस पैसा जमा नहीं कराया है। अब योजना के मुताबिक अगस्त से सभी सरकारी कनेक्शनों को पूरी तरह प्रीपेड कर दिया जाएगा, जिससे फंड खत्म होते ही दफ्तरों की बत्ती अपने आप गुल हो जाएगी।
FAQ
- छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों पर कुल कितना बिजली बिल बकाया है?
उत्तर: मार्च 2026 तक सरकारी विभागों पर लगभग 2883 करोड़ रुपये का बकाया था। अगले चार महीनों में यह आंकड़ा बढ़कर 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। - सबसे ज्यादा बिजली बिल किस विभाग पर बकाया है?
उत्तर: सबसे अधिक बकाया नगरीय निकाय विभाग पर है। इस विभाग को पावर कंपनी को 1586 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। - बिजली बिल वसूलने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
उत्तर: सरकार ने सभी सरकारी बिजली कनेक्शनों को प्रीपेड करने का फैसला लिया है। इसके तहत विभागों को तीन महीने का एडवांस बिजली बिल जमा करना होगा।
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