मेरिट लिस्ट में नाम आने पर भी नौकरी का हक नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
समझें क्या है पूरा मामला
- मेरिट में नाम फिर भी नौकरी नहीं, HC का बड़ा फैसला
- चयन सूची में नाम से नहीं मिलता नियुक्ति का अधिकार
- पंचायत सचिव भर्ती रद्द, अभ्यर्थियों को HC से झटका
- सात साल इंतजार के बाद भी नहीं मिली नौकरी
- हाईकोर्ट बोला- मेरिट लिस्ट नौकरी की गारंटी नहीं
Bilaspur। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत सचिव भर्ती से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि सिर्फ मेरिट सूची में नाम शामिल होने से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति पाने का अधिकार नहीं मिल जाता। अगर भर्ती प्रक्रिया को सक्षम अधिकारी ने नियमों के तहत रद्द कर दिया है, तो चयन सूची में शामिल उम्मीदवार नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता।
यह मामला सूरजपुर जिले के रामानुजनगर क्षेत्र में ग्राम पंचायत सचिवों की भर्ती से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट ने इस मामले में याचिका खारिज करते हुए कहा कि नियुक्ति का अधिकार तभी बनता है, जब पूरी भर्ती प्रक्रिया वैध हो और नियुक्ति आदेश जारी किया गया हो।
2018 में निकली थी पंचायत सचिव भर्ती
सूरजपुर जिला पंचायत ने साल 2018 में ग्राम पंचायत सचिव के 11 पदों के लिए भर्ती निकाली थी। इसके लिए 17 सितंबर 2018 को विज्ञापन जारी किया गया था। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों के नाम मेरिट सूची में भी आए थे, लेकिन लंबे समय तक उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिला।
इसी मामले में रामानुजनगर निवासी देवेन्द्र कुमारी साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि चयन सूची में नाम आने के बाद भी उन्हें सात साल से अधिक समय बीतने के बावजूद नियुक्ति नहीं दी गई।
हाईकोर्ट ने मांगा था जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंचायत निदेशक से जवाब मांगा था। कोर्ट ने 11 सितंबर 2025 को निर्देश दिया था कि भर्ती प्रक्रिया इतने लंबे समय से लंबित क्यों है, इसकी जानकारी व्यक्तिगत शपथपत्र के जरिए दी जाए।
इसके बाद पंचायत निदेशक ने 3 नवंबर 2025 को कोर्ट में शपथपत्र पेश किया। इसमें बताया गया कि सक्षम प्राधिकारी पहले ही पंचायत सचिव भर्ती की पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर चुका है। इसलिए किसी भी अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया जा सकता।
मेरिट सूची नियुक्ति की गारंटी नहीं
हाईकोर्ट ने सरकार के जवाब और मामले के तथ्यों को देखते हुए कहा कि मेरिट सूची में नाम आना नियुक्ति की गारंटी नहीं है। चयन सूची केवल भर्ती प्रक्रिया का एक हिस्सा होती है। अगर किसी कारण से पूरी भर्ती प्रक्रिया ही रद्द कर दी जाती है, तो चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति के लिए कानूनी अधिकार नहीं जता सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी नौकरी में नियुक्ति तभी मिल सकती है, जब चयन प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी हो और नियुक्ति आदेश जारी किया जाए।
देशभर में ऐसे मामलों में यही नियम
सरकारी भर्तियों को लेकर कई बार अभ्यर्थियों में यह धारणा रहती है कि मेरिट सूची में नाम आने के बाद नौकरी पक्की हो जाती है। लेकिन अदालतों ने कई मामलों में स्पष्ट किया है कि केवल चयन सूची में शामिल होना नियुक्ति का अधिकार नहीं देता।
अगर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी, नियमों का उल्लंघन या अन्य कारणों से चयन प्रक्रिया रद्द कर दी जाती है, तो मेरिट सूची में शामिल उम्मीदवार भी नियुक्ति की मांग नहीं कर सकते। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी इसी कानूनी सिद्धांत को आधार बनाते हुए पंचायत सचिव भर्ती मामले में याचिका को खारिज कर दिया।
FAQ
- क्या मेरिट सूची में नाम आने के बाद नौकरी पक्की हो जाती है?
नहीं, सिर्फ मेरिट सूची में नाम आने से नियुक्ति का अधिकार नहीं बनता। नियुक्ति तभी मिलती है जब पूरी भर्ती प्रक्रिया वैध हो और नियुक्ति आदेश जारी किया जाए। - छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत सचिव भर्ती मामले में क्या फैसला दिया?
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर सक्षम अधिकारी ने भर्ती प्रक्रिया को नियमों के तहत रद्द कर दिया है, तो मेरिट सूची में शामिल अभ्यर्थी नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता। - यह मामला किस भर्ती से जुड़ा था?
यह मामला सूरजपुर जिले के रामानुजनगर क्षेत्र में वर्ष 2018 में निकली ग्राम पंचायत सचिव भर्ती से जुड़ा था, जिसमें 11 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था।
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