छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी के हवा-हवाई दावे किए खारिज

Umeshwari Baghel | Jun 13, 2026, 15:26 IST
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बीमा कंपनियों को हाईकोर्ट का कड़ा संदेश
बीमा कंपनियों को हाईकोर्ट का कड़ा संदेश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जशपुर सड़क हादसे में बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा बिना ठोस सबूत तकनीकी दावे मान्य नहीं होंगे। मुआवजा 10.50 लाख से बढ़ाकर 14.72 लाख किया गया और 45 दिन में भुगतान का आदेश दिया गया।

NEWS IN SHORT

  • हाईकोर्ट का बड़ा फैसला बीमा कंपनियों को सख्त संदेश
  • जशपुर सड़क हादसा मामला परिवार को न्यायिक राहत
  • बीमा कंपनी की अपील खारिज, तकनीकी दावे नहीं चले
  • मुआवजा बढ़ाकर 14.72 लाख रुपए तय किया गया
  • 45 दिन में भुगतान का आदेश, 7.5% ब्याज लागू

NEWS IN DETAIL

Bilaspur। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना मुआवजा मामले में बीमा कंपनियों के रवैये पर सख्त रुख अपनाया है। जशपुर जिले के ग्राम फुलडीह में हुए सड़क हादसे से जुड़े इस मामले में कोर्ट ने साफ कहा कि बिना ठोस सबूत के कोई भी बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।

जशपुर सड़क हादसा

यह मामला बगीचा थाना क्षेत्र के ग्राम फुलडीह का है, जहां सड़क दुर्घटना में देवेंद्र कुमार की मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद पत्नी अनीता और दो छोटे बच्चों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। परिवार ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में मुआवजे की मांग की थी।

ट्रिब्यूनल का फैसला और शुरुआती मुआवजा राशि

मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 17 अक्टूबर 2017 को फैसला सुनाते हुए पीड़ित परिवार को 10.50 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया था। परिवार ने इसे कम बताते हुए हाईकोर्ट में अपील की, जबकि बीमा कंपनी ने भी अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए अपील दायर की।

बीमा कंपनी का तर्क और कोर्ट में दलीलें

ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने दलील दी कि वाहन का उपयोग पॉलिसी की शर्तों के खिलाफ किया गया था। कंपनी ने कहा कि मृतक ने वाहन मालिक से गाड़ी उधार ली थी, इसलिए वे भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। वहीं परिवार ने कहा कि मुआवजा राशि बेहद कम है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी हवा-हवाई दावे स्वीकार नहीं

जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ ने साफ कहा कि बीमा कंपनी के पास अपने दावों को साबित करने के लिए कोई दस्तावेज या ठोस सबूत नहीं है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि केवल तकनीकी या अनुमान के आधार पर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता और ऐसे हवा-हवाई दावे स्वीकार नहीं किए जा सकते।

बीमा कंपनी की अपील खारिज

हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील पूरी तरह खारिज कर दी और ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने माना कि कंपनी अपनी आपत्ति साबित करने में असफल रही, इसलिए उसे मुआवजा देने से इनकार करने का कोई आधार नहीं है।

मुआवजा बढ़ाकर 14.72 लाख रुपए किया गया

कोर्ट ने पीड़ित परिवार को राहत देते हुए मुआवजा राशि बढ़ाकर 14.72 लाख रुपए कर दी। इसके अलावा 4.22 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि भी स्वीकृत की गई, जिससे परिवार को बड़ी आर्थिक सहायता मिली।

45 दिन में भुगतान का आदेश और ब्याज का निर्देश

हाईकोर्ट ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया कि वह बढ़ी हुई मुआवजा राशि 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 45 दिनों के भीतर दावा न्यायाधिकरण में जमा करे। आदेश का पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।

फैसले का असर

यह फैसला स्पष्ट करता है कि बीमा कंपनियां केवल तकनीकी तर्क देकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं। कोर्ट ने संकेत दिया है कि मुआवजा मामलों में सबूत और पारदर्शिता जरूरी है, वरना पीड़ित परिवारों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

FAQ

  1. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
    हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी और मुआवजा बढ़ाकर 14.72 लाख रुपए करने का आदेश दिया।
  2. बीमा कंपनी का क्या तर्क था?
    कंपनी ने कहा कि पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन हुआ है, इसलिए वह मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार नहीं है।
  3. कोर्ट ने भुगतान के लिए क्या निर्देश दिए?
    कोर्ट ने 7.5% ब्याज के साथ 45 दिनों के भीतर बढ़ी हुई मुआवजा राशि जमा करने का आदेश दिया।

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