छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग का फैसला विवादों में, बिना टेंडर HLL को मिली पैथोलॉजी जांच की जिम्मेदारी
NEWS IN SHORT
- राज्य सरकार ने हिंदुस्तान लाइफ केयर लिमिटेड (HLL) को पैथोलॉजी जांच का कार्य सौंपा
- कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने इसे नियम विरुद्ध बताया
- GFR 2017 और CVC के दिशा-निर्देशों के तहत बिना निविदा के काम सौंपना प्रतिबंधित है
- HLL द्वारा किए जाने वाले जांच के खर्च और पारदर्शिता की कोई जानकारी नहीं दी गई
- कांग्रेस ने राज्य सरकार पर पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया से बचने का आरोप लगाया है
NEWS IN DETAIL
RAIPUR : छत्तीसगढ़ के शासकीय अस्पतालों में पैथोलॉजी लैब जांच का कार्य हिंदुस्तान लाइफ केयर लिमिटेड (HLL) को सौंपे जाने के निर्णय पर सियासी विवाद गहरा गया है। कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग परआरोप लगाया है कि यह फैसला नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि 14 अप्रैल से जगदलपुर में HLL यह काम शुरू करने जा रहा है, जो पूरी प्रक्रिया को अवैध और नियम विरुद्ध मानते हैं।
क्या कहते हैं GFR 2017 और CVC के दिशा-निर्देश
डॉ. राकेश गुप्ता के अनुसार, सामान्य वित्तीय नियमावली (GFR) 2017 और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोई भी राज्य सरकार बिना निविदा प्रक्रिया के सीधे किसी PSU (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) को काम नहीं सौंप सकती। इसके लिए पारदर्शी प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता होती है, जो यहां नहीं की गई।
मुख्य प्रावधान
बिना निविदा काम देने का कारण क्या है?
डॉ. राकेश गुप्ता ने यह सवाल भी उठाया कि अगर HLL को सीधे यह काम दिया गया है, तो क्या इसका कोई लिखित कारण है? क्या राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि HLL को सौंपे गए काम के लिए कोई तुलनात्मक अध्ययन किया गया था, या फिर क्या यह काम अन्य निजी ठेकेदारों को सौंपा जाएगा?
क्या है पारदर्शिता की कमी?
उनके अनुसार, HLL के द्वारा किए जाने वाले पैथोलॉजी जांच की लागत का कोई विवरण नहीं दिया गया है। राज्य सरकार यह क्यों नहीं बता रही है कि HLL ने यह काम किस प्राइवेट वेंडर को सौंपा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने पारदर्शी और नियमों के तहत टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए यह कदम उठाया है, जबकि ना तो कोई आपातकालीन स्थिति थी और न ही निविदा प्रक्रिया में कोई असफलता।
क्या पूर्व में भी इसी प्रकार के कदम उठाए गए थे?
डॉ. राकेश गुप्ता ने यह भी याद दिलाया कि पहले DKS सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की बिल्डिंग का सर्वे भी HLL को नॉमिनेशन आधार पर सौंपा गया था। उन्होंने आशंका जताई कि यह भी 'डीकेएस कल्याण योजना 2.0' साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार ने पारदर्शी प्रक्रिया को नजरअंदाज किया है और HLL को बिना निविदा के यह कार्य सौंप दिया है। राज्य सरकार को जल्द से जल्द इस फैसले की पारदर्शिता और औचित्य स्पष्ट करना चाहिए, ताकि आम जनता में किसी प्रकार की भ्रांति न रहे।
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