दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण का रास्ता साफ! हाईकोर्ट ने सरकार को दिया आदेश

Harrison Masih | Apr 08, 2026, 19:49 IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण पर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को 4 महीने में निर्णय लेने का निर्देश देते हुए कहा, कि स्थायी काम कराने के बावजूद कर्मचारियों को अस्थायी रखना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।

NEWS IN SHORT

  • हाईकोर्ट ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण का बड़ा फैसला दिया।
  • राज्य सरकार को 4 महीने में निर्णय लेने का निर्देश।
  • अस्थायी रखना कर्मचारियों के अधिकार और सम्मान का हनन है।
  • वन विभाग के कई कर्मचारी 10+ साल सेवा दे रहे हैं।
  • सरकार की एडहॉक और आउटसोर्सिंग नीति पर नाराजगी जताई।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जिन कर्मचारियों से सालभर स्थायी प्रकृति का काम लिया जा रहा है, उन्हें लंबे समय तक अस्थायी (दैनिक वेतनभोगी) बनाए रखना उनके अधिकारों और सम्मान के खिलाफ है।



क्या कहा हाई कोर्ट ने?

यह मामला जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच में सुना गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा सरकार एक संवैधानिक नियोक्ता है। वह गरीब कर्मचारियों का शोषण करके अपना बजट संतुलित नहीं कर सकती। जो कर्मचारी वर्षों से जरूरी सेवाएं दे रहे हैं, उनके साथ न्याय होना चाहिए।



कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 4 महीने के भीतर इन कर्मचारियों की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय ले।



क्या है पूरा मामला?

वन विभाग में काम करने वाले 18 से ज्यादा कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। ये कर्मचारी 2006 से 2016 के बीच नियुक्त हुए, कंप्यूटर ऑपरेटर, कार्यालय सहायक और सुरक्षा कर्मी जैसे पदों पर कार्यरत हैं। 10 साल से अधिक समय से लगातार सेवा दे रहे हैं।



कर्मचारियों का कहना था अब उनकी उम्र सरकारी नौकरी की सीमा से पार हो चुकी है,अगर उन्हें नियमित नहीं किया गया, तो नौकरी छूटने पर उनके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा। इससे उनके परिवार पर आर्थिक संकट आ जाएगा।



सरकार की पॉलिसी पर कोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट (CG High Court) ने सरकार की उस नीति पर नाराजगी जताई, जिसमें एडहॉक (अस्थायी) नियुक्ति, आउटसोर्सिंग का सहारा लेकर नियमित भर्ती से बचा जाता है। कोर्ट ने कहा आर्थिक तंगी का बहाना बनाना उचित नहीं है। जहां काम स्थायी है, वहां कर्मचारियों को अस्थायी रखना गलत है।



सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले का भी जिक्र किया। नरेंद्र कुमार तिवारी बनाम झारखंड सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था यदि कोई कर्मचारी 10 साल या उससे अधिक समय से लगातार सेवा दे रहा है, और वह स्वीकृत पद पर काम कर रहा है, तो उसे केवल तकनीकी कारणों से नियमितीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता।



साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकार को एक आदर्श नियोक्ता की तरह व्यवहार करना चाहिए, कर्मचारियों को वर्षों तक अस्थायी रखना प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ है।



आगे क्या

हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को नया आवेदन (अभ्यावेदन) देने की अनुमति दी है।अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट की भावना के अनुसार निर्णय लें। अब सभी की नजर राज्य सरकार पर है, जो अगले 4 महीनों में इस मामले पर फैसला लेगी।



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