7 लाख दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्स कर्मचारियों के सहारे चल रही सरकार, इनको नियमित कर दे तो आधे हो जाएंगे बेरोजगार

छत्तीसगढ़ सरकार का पूरा तंत्र ठेके और आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। सरकार को इन कर्मचारियों को नियमित करने का भारी दबाव है, लेकिन आर्थिक बोझ और बेरोजगारी दोनों बढ़ सकते हैं।

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Arun Tiwari
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News in Short 

  • दैनिक वेतनभोगी,संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों पर टिका सरकारी सिस्टम।
  • 7 लाख कर्मचारियों को नियमित होने का इंतजार।
  • कमेटी भी नहीं दे पाई कोई परिणाम।
  • इनको नियमित किया तो आधे हो जाएंगे बेरोजगार।

News in Detail

RAIPUR. छत्तीसगढ़ का सरकारी सिस्टम ठेके पर चल रहा है। या यूं कहें कि सरकार का पूरा कामकाज दैनिक वेतन भोगी,संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के सहारे चल रहा है। कर्मचारियों के आंदोलन के बाद सरकार ने इस समस्या के निपटारे के लिए  कमेटी बनाई थी। लेकिन यह कमेटी भी कोई ठोस उपाय नहीं बता पाई।

एक तरफ प्रदेश में 15 लाख बेरोजगार हैं तो दूसरी तरफ 7 लाख दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्स कर्मचारी हैं। सरकार यदि इनको नियमित कर देगी तो बेरोजगारों की संख्या आधी हो जाएगी। इनको नियमित करने में सरकार के खजाने पर बड़ा बोझ पड़ेगा यही कारण है कि सरकार यह कदम नहीं उठा पा रही है। 

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ठेके पर सरकारी सिस्टम  

छत्तीसगढ़ में सरकारी तंत्र की रीढ़ स्थायी कर्मचारी नहीं, बल्कि अनियमित और आउटसोर्स कर्मी बन चुके हैं। राज्य के लगभग हर विभाग में स्थायी नियुक्तियों की भारी कमी है, जिसे वर्षों से ठेका, संविदा और आउटसोर्स व्यवस्था के जरिए पूरा किया जा रहा है। मौजूदा स्थिति यह है कि करीब सात लाख अनियमित और आउटसोर्स कर्मचारी प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को संभाल रहे हैं। वहीं नियमित कर्मचारियों की संख्या चार लाख के आसपास ही सिमटी हुई है। इसका अर्थ है कि राज्य की  सरकारी व्यवस्था अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे चल रही है।

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1 लाख से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी 

स्थायी भर्तियों के न होने से सरकार को प्लेसमेंट एजेंसियों पर निर्भर बना दिया है। विभिन्न विभागों में आउटसोर्स के माध्यम से की जा रही भर्तियों से प्रशासनिक कामकाज तो चल रहा है। लेकिन इससे कर्मचारियों के शोषण और असुरक्षा की स्थिति भी लगातार गहराती जा रही है।

आंकड़ों के अनुसार राज्य में 1.11 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं, जो शासन के कई महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। विभागवार स्थिति देखें तो सबसे अधिक अनियमित कर्मचारी ऊर्जा विभाग और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में कार्यरत हैं।

इसके अलावा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, सहकारिता और वाणिज्य कर जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी बड़ी संख्या में अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे हैं। स्कूल शिक्षा, कौशल विकास, समाज कल्याण, आवास और श्रम विभागों में भी यही स्थिति बनी हुई है।

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आउटसोर्स के भरोस कुछ प्रमुख विभाग 

  • ऊर्जा विभाग - 27,000
  • नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग - 25,000
  • लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग -  9,000 
  • सहकारिता विभाग - 7,600 
  • वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग - 7,500 
  • अन्य - 14,000 

40 फीसदी वेतन बढ़ाने की जरुरत 

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय जैन कहते हैं कि राज्य सरकार यदि अनियमित कर्मियों का 40 प्रतिशत वेतन बढ़ा दे, तो भी उन्हें नियमित किया जा सकता है। अभी सरकार उन्हें नियमित कर्मचारियों से 60 प्रतिशत कम वेतन दे रही है।

कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र में दैनिक वेतनभोगी व अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था, लेकिन अब बीजेपी सरकार भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।

वहीं नियमितीकरण के लिए लगातार आंदोलन कर रहे अनियमित कर्मचारी फेडरेशन के अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू कहते हैं कि हम राज्य सरकार से मांग करते हैं कि अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण के मुद्दे पर ठोस निर्णय लिया जाए। 

अब आगे क्या 

ये मुद्दा अब सरकार के गले की फांस बन गया है। यदि इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया तो कर्मचारियों का आंदोलन थमेगा नहीं। सरकार को इस बारे में गंभीरता से विचार करना होगा। हालांकि सरकार से जुड़े लोग कहते हैं कि सरकार कर्मचारी हितैषी है इसलिए वो उनकी बेहतरी के लिए गंभीरता से विचार कर रही है। 

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निष्कर्ष 

अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग लंबे समय से उठती रही है। दिसंबर माह में इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन भी हुआ था। आंदोलन के बाद सरकार ने समाधान के लिए एक समिति का गठन किया, लेकिन समिति की रिपोर्ट और सिफारिशें अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। इससे कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है।

द सूत्र नॉलेज

छत्तीसगढ़ में दैनिक वेतन भोगी और संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का बड़ा मुद्दा है। राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा लगातार गरमाता रहा है। पूर्ववर्ती सरकार ने चुनाव के दौरान अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण का वादा किया था और इसके लिए समिति भी बनाई गई थी, लेकिन कार्यकाल के दौरान कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका। वहीं मौजूदा सरकार पर भी आरोप लग रहे हैं कि वह इस गंभीर समस्या को टालने का प्रयास कर रही है।  

मैन पॉइंट्स...

  • छत्तीसगढ़ की सरकारी व्यवस्था अनियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चल रही है, जबकि नियमित कर्मचारियों की भारी कमी बनी हुई है।
  • राज्य में लगभग 7 लाख अनियमित व आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 1.11 लाख से ज्यादा आउटसोर्स कर्मी विभिन्न विभागों में तैनात हैं।
  • ऊर्जा, नगरीय प्रशासन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में सबसे अधिक अस्थायी कर्मचारी काम कर रहे हैं।
  • अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर लगातार आंदोलन चल रहा है। 
  • कम वेतन, नौकरी की असुरक्षा से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।
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