सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के शव हटाने पर लगाई रोक

Rajesh Lahoti | Feb 19, 2026, 24:05 IST
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Supreme Court bans removal of dead bodies of tribal Christians in Chhattisgarh
Photograph: (the sootr)

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में ईसाई आदिवासियों के शवों को कब्र से बाहर निकालने पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने प्रशासन को सख्त हिदायत भी दी है।

News in Short

  • सुप्रीम कोर्ट की रोक: अदालत ने ईसाई आदिवासियों के शवों को कब्र से निकालने पर पाबंदी लगा दी।
  • प्रशासन पर सवाल: याचिका में आरोप है कि प्रशासन शवों को जबरन हटवाने में साथ दे रहा है।
  • समान अधिकार की मांग: हर नागरिक को अपने ही गाँव में गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार का हक मिलना चाहिए।
  • संविधान का सहारा: अनुच्छेद 32 के तहत यह केस बुनियादी मानवाधिकारों की रक्षा के लिए लड़ा जा रहा।
  • सरकार को नोटिस: कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा और फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने को कहा।

News in Detail

New Delhi/Raipur. छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के शवों को कब्र से निकालकर गांव की सीमा से बाहर दोबारा दफनाने की कथित कार्रवाई पर आज सुप्रीम कोर्ट ने सख़्त रुख दिखाया। अदालत ने साफ शब्दों में अंतरिम रोक लगाते हुए निर्देश दिया कि “इस बीच दफनाए गए शवों को आगे नहीं निकाला जाएगा।”

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली पीठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

आरोप: कब्र से शव हटाने में प्रशासन की भूमिका

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्विस ने अदालत में आरोप लगाया कि राज्य शासन कथित रूप से शवों को हटाने की कार्रवाई का समर्थन कर रहा है। उनका कहना था कि आदिवासी ईसाई परिवारों को अपने ही गांव में अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी जा रही, जबकि अन्य समुदायों को यह अधिकार प्राप्त है।

याचिका में यह भी दावा किया गया कि कुछ मामलों में परिजनों की जानकारी के बिना कब्र से शव निकालने की कोशिश की गई, जिससे सामाजिक तनाव और भय का माहौल बना।

अनुच्छेद 32 के तहत सीधी दस्तक

याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि धर्म, जाति या समुदाय की परवाह किए बिना सभी नागरिकों को अपने निवास वाले गांव में अंतिम संस्कार का समान अधिकार घोषित किया जाए। साथ ही, राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि हर गांव में सभी समुदायों के लिए कब्रिस्तान हेतु भूमि चिन्हित की जाए और पारंपरिक दफन प्रथाओं में हस्तक्षेप न हो।

पुराने फैसले की व्याख्या पर विवाद

मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस एक पुराने निर्णय-रमेश बघेल बनाम छत्तीसगढ़ राज्य की अलग-अलग व्याख्याओं का हवाला देकर ईसाइयों को गांव में दफनाने से रोक रही है। उस मामले में एक जज ने निजी भूमि पर दफन की अनुमति दी थी, जबकि दूसरे जज ने केवल निर्धारित कब्रिस्तान में दफन की बात कही थी।

पृष्ठभूमि और बढ़ता विवाद

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज की थी, जिसमें ग्राम सभा द्वारा गांव के प्रवेश द्वार पर कुछ समुदायों के प्रवेश पर रोक संबंधी बोर्ड लगाने की कार्रवाई को सही ठहराया गया था। उसी पृष्ठभूमि में यह नया विवाद और गहरा गया है।

फिलहाल यथास्थिति बरकरार

अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। अगली सुनवाई तक स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी दफनाए गए शव को न तो निकाला जाएगा और न ही स्थानांतरित किया जाएगा।

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