धर्मस्व एवं धार्मिक न्यास विभाग से हटाए गए तीर्थराज अग्रवाल, चंदन कुमार को SCRDA की जिम्मेदारी

VINAY VERMA | Mar 11, 2026, 17:23 IST
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छत्तीसगढ़ सरकार ने धर्मस्व एवं धार्मिक न्यास विभाग में पदस्थ आईएएस अधिकारी तीर्थराज अग्रवाल को उनके पद से हटा दिया है। यह फैसला विभाग से जुड़े विवाद और कथित 550 करोड़ के घोटाले के संदिग्ध कनेक्शन सामने आने के बाद लिया गया।

Raipur. राज्य सरकार ने आखिरकार धर्मस्व एवं धार्मिक न्यास विभाग में पदस्थ आईएएस अधिकारी तीर्थराज अग्रवाल को पद से हटा दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।



यह कार्रवाई उस समय हुई जब द सूत्र ने विभाग में चल रहे विवादित मामलों और 550 करोड़ रुपए से जुड़े घोटाले के संदिग्ध कनेक्शन को उजागर किया था। खबर सामने आने के बाद सरकार पर दबाव बढ़ा और आखिरकार तीर्थराज अग्रवाल को विभाग से हटाने का फैसला लेना पड़ा।



आईएएस बनने के बाद मिला था उप सचिव का पद

तीर्थराज अग्रवाल को आईएएस बनने के बाद धर्मस्व एवं धार्मिक न्यास विभाग में उप सचिव के रूप में पदस्थ किया गया था। यह विभाग धार्मिक ट्रस्टों, मंदिरों और उनसे जुड़े आर्थिक मामलों की निगरानी करता है।



ऐसे संवेदनशील विभाग में उनकी नियुक्ति पहले से ही चर्चा का विषय बनी हुई थी। विभाग के भीतर भी कई अधिकारियों ने अनौपचारिक तौर पर इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे। लेकिन लंबे समय तक इन सवालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।



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IAS Tirthraj Agarwal


मंत्री से रिश्तेदारी ने बढ़ाए सवाल

मामले को और संवेदनशील इसलिए माना जा रहा है क्योंकि तीर्थराज अग्रवाल, विभाग के मंत्री राजेश अग्रवाल के दामाद बताए जाते हैं। इसी रिश्तेदारी को लेकर विपक्ष और प्रशासनिक हलकों में लगातार सवाल उठ रहे थे कि क्या पारिवारिक संबंधों के कारण उन्हें महत्वपूर्ण विभाग में जिम्मेदारी दी गई।



द सूत्र की पड़ताल में भी यह बात सामने आई कि नियुक्ति को लेकर अंदरखाने असंतोष था, लेकिन सत्ता के प्रभाव के कारण अधिकारी खुलकर बोलने से बच रहे थे।



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550 करोड़ के घोटाले की छाया

सूत्रों के मुताबिक जिस समय तीर्थराज अग्रवाल की प्रशासनिक यात्रा आगे बढ़ रही थी, उसी दौरान 550 करोड़ रुपए के एक बड़े वित्तीय घोटाले की फाइलें भी चर्चा में थीं। आरोप है कि इसी विवादित प्रकरण को खत्म कराने और फाइलों को ठंडे बस्ते में डालने के बाद उनका रास्ता साफ हुआ और वे आईएएस कैडर तक पहुंच गए।



हालांकि इस पूरे मामले की आधिकारिक जांच अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में इस घोटाले को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है।



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सरकार की छवि बचाने की कोशिश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि द सूत्र में खबर प्रकाशित होने के बाद सरकार के सामने छवि का संकट खड़ा हो गया था। धार्मिक न्यास विभाग पहले ही कई विवादों के कारण सुर्खियों में रहा है।



ऐसे में मंत्री के दामाद की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहे थे। यही कारण है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने तेजी से आदेश जारी कर उन्हें विभाग से हटा दिया।



अभी कई सवाल बाकी

हालांकि IAS तीर्थराज अग्रवाल को विभाग से हटाने की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन कई अहम सवाल अब भी बाकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि 550 करोड़ रुपए के कथित घोटाले की सच्चाई क्या है और उसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।



साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या किसी प्रभाव के चलते प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।



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2011 बैच के चंदन कुमार को नई जिम्मेदारी

सामान्य प्रशासन के एक अन्य आदेश के अनुसार SCRDA की कमान चंदन कुमार संभालेंगे। चंराज्य सरकार ने 2011 बैच के अधिकारी चंदन कुमार को नई जिम्मेदारी देते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ राजधानी विकास प्राधिकरण SCRDA का मुख्य कार्यपालन अधिकारी नियुक्त किया है। वे विकास परियोजनाओं की निगरानी करेंगे।



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नया रायपुर के साथ SCRDA का काम

सरकारी आदेश के मुताबिक चंदन कुमार अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों के साथ-साथ SCRDA का काम भी संभालेंगे। वे पहले से ही नया रायपुर विकास प्राधिकरण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा संचालक बजट की भी जिम्मेदारी है। वे संस्थाओं के विकास कार्यों को समन्वित तरीके से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उनके पास होगी।



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