साल भर में 33 कैदियों ने तोड़ा दम, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने DG को किया तलब
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ के जेलों में 33 कैदियों की मौत
- हाईकोर्ट ने जेल महानिदेशक से मांगी रिपोर्ट
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट की देरी पर नाराजगी
- बिलासपुर जेल में सबसे ज्यादा मौतें
- मानवाधिकार आयोग ने तलब किया जेल रिकॉर्ड
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की जेलों में पिछले एक साल में 33 कैदियों की मौत हो चुकी है। इस मामले में (Bilaspur High Court) छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने जेल महानिदेशक से व्यक्तिगत शपथ पत्र में एक-एक मौत का पूरा विवरण और इलाज की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि मौतों के कारण और इलाज की पूरी जानकारी दी जाए। अगले मामले की सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट की देरी पर अदालत ने जताई नाराजगी
जेलों में बढ़ती हुई मौतों के मामले पर स्वत संज्ञान लेते हुए, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की। कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने में हो रही अत्यधिक देरी पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट का कहना है कि 33 मामलों में से 22 में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक जेल विभाग को नहीं मिली है। दुर्ग जेल में फरवरी 2025 में हुई एक मौत का पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक नहीं पहुंचा है, जो सिस्टम की बड़ी लापरवाही का उदाहरण है।
जेलों में चिकित्सा सुविधाओं पर उठे सवाल
जेल विभाग का दावा है कि अधिकांश मौतें किडनी फेल होने, हार्ट अटैक या अंगों के काम न करने के कारण हुई हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर जेलों में अस्पताल और डॉक्टरों की तैनाती है, तो कैदियों की हालत इतनी गंभीर क्यों हो जाती है कि उन्हें रायपुर के अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) शिफ्ट किया जाता है? रिकॉर्ड बताते हैं कि ज्यादातर मौतें मेकाहारा रायपुर में इलाज के दौरान हुई हैं।
बिलासपुर जेल में सर्वाधिक मौतें, मानवाधिकार आयोग भी हुआ सख्त
आंकड़ों से पता चलता है कि बिलासपुर केंद्रीय जेल में सर्वाधिक 10 कैदियों की जान गई है। इसके बाद दुर्ग में 8 और अंबिकापुर में 5 मौतें दर्ज की गई हैं। कई अन्य जिलों जैसे जगदलपुर, गरियाबंद, धमतरी और रायगढ़ में भी कैदियों की मौतें सामने आई हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जेल विभाग से दो साल का रिकॉर्ड तलब किया है। आयोग ने जेलों में चिकित्सा सुविधाओं और डॉक्टरों की तैनाती पर सवाल उठाए हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
33 कैदियों की मौत: पिछले एक साल में छत्तीसगढ़ की जेलों में 33 कैदियों की मौत हो चुकी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट की देरी: 33 में से 22 मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।
दुर्ग जेल में मौत की रिपोर्ट लंबित: फरवरी 2025 में हुई एक मौत की रिपोर्ट अब तक नहीं मिली।
बिलासपुर जेल में सबसे अधिक मौतें: बिलासपुर केंद्रीय जेल में सबसे ज्यादा 10 कैदियों की मौत हुई।
मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई: आयोग ने जेलों के इलाज और चिकित्सा सुविधाओं पर सवाल उठाए हैं और दो साल का रिकॉर्ड तलब किया है।
मजिस्ट्रियल जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं आईं
यह भी सामने आया है कि न सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बल्कि कैदियों की मौत के बाद होने वाली 'मजिस्ट्रियल जांच' रिपोर्ट भी जेल विभाग को नहीं मिली है। कोर्ट ने सवाल किया है कि जेलों में इतनी बड़ी संख्या में मौतें क्यों हो रही हैं, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक क्यों लंबित हैं।
यह मामला छत्तीसगढ़ के जेलों में कैदियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की स्थितियों की गंभीरता को उजागर करता है, जो लगातार ध्यान और सुधार की मांग कर रहा है।
यह खबरें भी पढ़े...
केवल रिकॉर्ड में नाम होने से कोई मकान मालिक नहीं बनता, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज किया बेदखली आदेश
डीएसपी के साले की मौत: पोस्टमार्टम रिपोर्ट कह रही गंभीर चोटें, FIR में लिखा हल्का बल प्रयोग