छत्तीसगढ़ में राजस्व क्रांति; रजिस्ट्री से लेकर बैंक लिंकेज तक सब कुछ पेपरलेस

Umeshwari Baghel | May 06, 2026, 20:06 IST
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राज्य सरकार ने राजस्व विभाग को पारदर्शी और पेपरलेस बनाने के लिए डिजिटल पहल की शुरुआत की है। अब 20,000 से अधिक गांवों का भूमि डाटा ऑनलाइन उपलब्ध है। खसरा और बी-1 में किसी भी संशोधन पर रियल-टाइम एसएमएस अलर्ट मिलेगा।

NEWS IN SHORT

  • राजस्व विभाग का डिजिटल क्रांति 20,000 गांवों का डाटा ऑनलाइन
  • एसएमएस अलर्ट से जमीन संबंधी धोखाधड़ी पर लगेगी रोक
  • राज्य के 20,000 गांवों के खसरा और नक्शे हुए डिजिटल
  • ऑनलाइन नेटवर्क से सरकारी कामों की गति और सटीकता में वृद्धि
  • नागरिकों के लिए पारदर्शिता: अब घर बैठे मिलेगा खसरा और बी-1

NEWS IN DETAIL

Raipur। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने राजस्व विभाग की सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी और पेपरलेस बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के 20,000 से अधिक गांवों की भूमि का डाटा अब ऑनलाइन उपलब्ध है।



एसएमएस अलर्ट से धोखाधड़ी पर लगेगी रोक

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब किसी भी खसरा या बी-1 में संशोधन या छेड़छाड़ की कोशिश करते ही भू-स्वामी को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर रियल-टाइम एसएमएस अलर्ट प्राप्त होगा। इस नई व्यवस्था से जमीन संबंधी धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से लगाम लगेगी। इस कदम से आम नागरिकों को भी पारदर्शिता और सुरक्षा की गारंटी मिलेगी।



20,000 से अधिक गांवों का डाटा हुआ डिजिटल

सरकार ने राज्य के 20,286 गांवों के खसरा और 19,694 गांवों के नक्शों का कंप्यूटरीकरण सफलतापूर्वक पूरा किया है। प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग की गई है, जिससे ये नक्शे अत्याधुनिक और ज्यादा सटीक हो गए हैं।



ऑनलाइन नेटवर्क से कार्य में वृद्धि

राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों के साथ ऑनलाइन जोड़ने के लिए एक एकीकृत नेटवर्क तैयार किया है। इससे सरकारी कामों की गति और सटीकता में कई गुना वृद्धि हुई है, और अब सरकारी कामों को पहले से कहीं ज्यादा तेजी से निपटाया जा सकता है।



मुख्य डिजिटल सुविधाएं

स्वत: नामांतरण प्रक्रिया: उप पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण प्रक्रिया स्वतः प्रारंभ हो जाएगी। इससे जमीन के मालिक को नामांतरण के लिए कहीं भी जाने की जरूरत नहीं होगी।



बैंक लिंकेज: कृषि ऋण के लिए बैंक में गिरवी रखी गई भूमि की जानकारी अब पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी, जिससे भूमि खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बनी रहेगी।



मोबाइल एप: गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध ऐप के माध्यम से अब स्मार्टफोन पर ही जमीन के रिकॉर्ड देखे जा सकते हैं।



मॉडर्न रिकॉर्ड रूम: राज्य की 252 तहसीलों में से 172 में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 155 का काम पूरा हो चुका है, जिससे सरकारी रिकॉर्ड्स को आधुनिक रूप में रखा जा रहा है।



असर्वेक्षित गांवों का सर्वेक्षण

सरकार असर्वेक्षित ग्रामों के सर्वेक्षण पर भी ध्यान दे रही है। अब तक राज्य के 1,089 गांवों का सर्वेक्षण किया गया है, और 1,018 के नक्शे तैयार कर लिए गए हैं। 233 गांवों का डाटा अब भुईयां और भू-नक्शा सॉफ़्टवेयर पर अपलोड कर दिया गया है।



नागरिकों के लिए बड़ा लाभ

इस डिजिटल पहल से आम नागरिकों को न केवल बिचौलियों और अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिली है, बल्कि अब छत्तीसगढ़ राजस्व प्रशासन देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। अब नागरिकों को खसरा-बी-1 या नामांतरण जैसे कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वे घर बैठे डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त खसरा और बी-1 की प्रति निशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं।



राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा का बयान: डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के माध्यम से विभाग अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन कर रहा है। अब नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। इस कदम से न केवल राज्य के नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को डिजिटल राजस्व प्रशासन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल होगी।



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