छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को हाईकोर्ट में चुनौती, मसीही समाज ने दायर की याचिका

Harrison Masih | Apr 17, 2026, 13:16 IST
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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को लेकर विवाद बढ़ गया है, मसीही समाज ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में अवैध धर्मांतरण पर आजीवन कारावास जैसे प्रावधानों को असंवैधानिक बताया गया है।

NEWS IN SHORT

  • धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर।
  • मसीही समाज ने विधेयक के प्रावधानों को चुनौती दी।
  • कानून अनुच्छेद 25 (Article 25) का उल्लंघन करता है।
  • कानून की परिभाषाओं को अस्पष्ट बताते हुए दुरुपयोग की आशंका जताई।

NEWS IN DETAILS

छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 (Freedom of Religion Bill) विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। मसीही समाज ने इस कानून के कई प्रावधानों को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। समाज का आरोप है कि यह कानून न सिर्फ कठोर है, बल्कि संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन भी करता है।



क्या है पूरा मामला?

मसीही समाज के प्रतिनिधि क्रिस्टोफर पॉल ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि, राज्य सरकार द्वारा लाया गया यह विधेयक कई स्तरों पर विवादित है। खासतौर पर इसमें अवैध धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है, जिसे याचिकाकर्ता ने असंवैधानिक बताया है।



कानून में क्या हैं कड़े प्रावधान?

राज्य सरकार के इस प्रस्तावित कानून में निम्न बातें शामिल हैं:

  • जबरन, प्रलोभन या धोखाधड़ी से धर्मांतरण को अपराध माना जाएगा
  • दोषी पाए जाने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा
  • संगठित या बड़े स्तर पर धर्मांतरण कराने पर और सख्त कार्रवाई
  • आर्थिक लालच, दबाव या छल से धर्म बदलवाने को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है

सरकार का कहना है कि यह कानून धर्म की स्वतंत्रता को सीमित नहीं करता, बल्कि गैर-कानूनी तरीकों से होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए लाया गया है।



याचिका में क्या उठाए गए सवाल?

फिलहाल, हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हो चुकी है, लेकिन सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है।



टारगेटेड कार्रवाई की आशंका

मसीही समाज ने यह भी आरोप लगाया है कि इस कानून (Anti-conversion law) का इस्तेमाल सरकार द्वारा टारगेटेड कार्रवाई के लिए किया जा सकता है। उनका कहना है कि कानून की भाषा स्पष्ट नहीं है। कठोर सजा के कारण निर्दोष लोगों को भी फंसाया जा सकता है। सामाजिक और धार्मिक संगठनों पर दबाव बनाया जा सकता है



छत्तीसगढ़ की धार्मिक स्थिति

जनसंख्या के आंकड़ों के अनुसार:

  • हिंदू: 2.38 करोड़
  • मुस्लिम: 5.14 लाख
  • ईसाई: 4.90 लाख
  • सिख: 68 हजार

राज्य की कुल आबादी अब लगभग 3.3 करोड़ के आसपास मानी जा रही है, जिसमें OBC वर्ग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।



चर्च और धार्मिक संरचना

छत्तीसगढ़ में करीब 727 चर्च आधिकारिक रूप से दर्ज हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर इनकी संख्या 900 से अधिक मानी जाती है



कुछ प्रमुख चर्च:



  • विश्रामपुर का “सिटी ऑफ रेस्ट” चर्च (1868 में स्थापित)
  • कुनकुरी (जशपुर) का कैथेड्रल, जो एशिया के बड़े चर्चों में गिना जाता है

आगे क्या?

अब इस मामले में सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या यह कानून संविधान के अनुरूप है या इसमें संशोधन/रद्द करने की जरूरत है। जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार से जवाब भी मांगा जा सकता है।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ का यह विधेयक एक बड़े संवैधानिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन चुका है। जहां सरकार इसे गैर-कानूनी धर्मांतरण रोकने का जरूरी कदम बता रही है, वहीं मसीही समाज इसे अधिकारों पर हमला मान रहा है। अब फैसला अदालत के हाथ में है-जो तय करेगा कि यह कानून राज्य के हित में है या नागरिक स्वतंत्रता के खिलाफ।



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