टेट विवाद पर छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित
समझें क्या है पूरा मामला
- TET विवाद पर सरकार का बड़ा आश्वासन
- 80 हजार शिक्षकों की नौकरी रहेगी सुरक्षित
- अब शिक्षक देंगे विभागीय स्तर की परीक्षा
- शिक्षक संघ की मांगों पर बनी सहमति
- पदोन्नति में TET पर फैसला बाद में होगा
Raipur। TET Controversy :छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर चल रहा विवाद अब खत्म होता नजर आ रहा है। शिक्षक संगठनों के आंदोलन के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने साफ किया है कि गैर-TET पास शिक्षकों की नौकरी नहीं जाएगी। हालांकि, शिक्षकों को विभागीय स्तर पर एक परीक्षा देनी होगी। इस परीक्षा की व्यवस्था मध्यप्रदेश के मॉडल की तर्ज पर की जा सकती है।
सरकार के इस आश्वासन के बाद शिक्षक संगठनों ने राहत की सांस ली है। संगठनों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मांग शिक्षकों की नौकरी बचाने की थी, जिस पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है।
80 हजार शिक्षकों पर मंडरा रहा था संकट
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देशभर में शिक्षकों के लिए TET पास करना जरूरी किया गया है। छत्तीसगढ़ में भी इसका असर पड़ा और करीब 80 हजार ऐसे शिक्षक इसकी जद में आ गए, जिन्होंने TET परीक्षा पास नहीं की थी।
इसको लेकर शिक्षक संगठनों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी। 25 अगस्त को प्रदेशभर में शिक्षकों ने प्रदर्शन कर TET की अनिवार्यता से राहत देने की मांग की थी।
मंत्री के साथ हुई आधे घंटे की बैठक
शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बुधवार को स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से मुलाकात की। बैठक में TET के मुद्दे सहित शिक्षकों की कई मांगों पर चर्चा हुई।
शिक्षक नेताओं के मुताबिक, मंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसी भी शिक्षक की नौकरी नहीं जाएगी। साथ ही विभागीय स्तर पर TET जैसी परीक्षा आयोजित करने पर सहमति बनी है।
यह परीक्षा सामान्य TET से अलग होगी और इसमें केवल वर्तमान शिक्षक ही शामिल होंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग जल्द प्रक्रिया तैयार करेगा।
2028 तक नौकरी सुरक्षित रखने का आश्वासन
शिक्षक संघ के नेताओं का कहना है कि बैठक में सरकार ने 2028 तक किसी भी शिक्षक को नौकरी से बाहर नहीं करने का भरोसा दिया है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने बताया कि विभागीय TET के लिए अधिकारियों को तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह शिक्षकों के लिए बड़ी राहत है।
शिक्षक संघ ने रखीं दूसरी मांगें
बैठक में शिक्षकों ने सिर्फ TET ही नहीं, बल्कि कई अन्य मुद्दे भी उठाए। इनमें पुरानी सेवा अवधि को जोड़कर पेंशन लाभ देना, वेतन विसंगति दूर करना और पदोन्नति नियमों में बदलाव जैसी मांगें शामिल हैं।
संयुक्त शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष केदार जैन ने कहा कि आंदोलन का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। सरकार ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने का भरोसा दिया है।
पदोन्नति में TET पर फैसला बाद में
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि पदोन्नति में TET की अनिवार्यता के मामले पर विधि विभाग से राय ली जाएगी। इसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की वित्तीय मांगों को लेकर जल्द वित्त मंत्री से चर्चा की जाएगी। सरकार शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए आगे भी बातचीत जारी रखेगी।
अब आगे क्या होगा?
शिक्षा विभाग विभागीय परीक्षा का प्रारूप तैयार करेगा।
परीक्षा में केवल कार्यरत शिक्षक शामिल होंगे।
नौकरी पर तत्काल कोई खतरा नहीं रहेगा।
पदोन्नति में TET की अनिवार्यता पर बाद में फैसला होगा।
अन्य मांगों पर सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच बातचीत जारी रहेगी।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में TET विवाद पर सरकार ने क्या फैसला लिया है?
सरकार ने कहा है कि गैर-TET पास शिक्षकों की नौकरी नहीं जाएगी। हालांकि, उन्हें विभागीय स्तर की परीक्षा देनी होगी। - विभागीय TET परीक्षा में कौन शामिल होंगे?
इस परीक्षा में केवल वर्तमान में कार्यरत शिक्षक ही शामिल होंगे। यह सामान्य TET परीक्षा से अलग होगी। - कितने शिक्षकों पर TET का असर पड़ रहा था?
छत्तीसगढ़ में करीब 80 हजार गैर-TET पास शिक्षक इस मामले से प्रभावित हो रहे थे।
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