छत्तीसगढ़ सरकार कर रही अपनी पर्देदारी, आरटीआई के एक लाख आवेदन पर नहीं दी जानकारी

Arun Tiwari | Jul 21, 2026, 14:42 IST
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RTI के लंबित मामले - गवर्नेंस से जुड़ा मुद्दा
RTI के लंबित मामले - गवर्नेंस से जुड़ा मुद्दा

छत्तीसगढ़ में सूचना का अधिकार दम तोड़ रहा है। दो साल में एक लाख से अधिक आरटीआई आवेदन पेंडिंग हैं। सबसे खराब स्थिति पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की बनी हुई है।

RAIPUR : छत्तीसगढ़ में सूचना का अधिकार कानून दम तोड़ रहा है। दो साल में एक लाख से ज्यादा आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। इन दो सालों में करीब डेढ़ लाख आवेदनों के जरिए विभिन्न विभागों की जानकारियां मांगी गईं लेकिन इनमें से एक लाख पेंडिंग हैं। इनमें आधे से ज्यादा तो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी हुई जानकारियां मांगी गई हैं। अब सवाल ये है कि आखिर सरकार की किस बात की पर्देदारी की जा रही है। जब राज्य में सुशासन है तो फिर पर्दा क्यों है। सरकार के कामों की जानकारी मांगना लोगों का कानून अधिकार है तो फिर कानून का कबाड़ा क्यों किया जा रहा है।

सुशासन पर पर्दा :

प्रदेश में सभी विभागों में सूचना अधिकार कानून लागू है। इसके लिए हर कार्यालय में लोक सूचना अधिकारी की भी नियुक्ति की गई है। प्रदेश में सभी जिलों और सभी विभागों के कुल मिलकार 18 हजार से ज्यादा कार्यालय हैं जिनमें आरटीआई की जानकारी दी जाती है। राज्य स्तर पर 200 से ज्यादा और तहसील स्तर पर 150 से ज्यादा कार्यालयों की संख्या है। इसके बाद भी आरटीआई की जानकारी नहीं दी जा रही है। साल 2024-25 में 69 हजार से ज्यादा आवेदन आए जिसमें 49 हजार आवेदन लंबित हैं। वहीं साल 2025-26 में 84 हजार से ज्यादा आरटीआई आवेदन आए जिनमें से 51 हजार लंबित हैं। कुल लंबित आवेदनों की संख्या 1 लाख से ज्यादा है।

यह है आरटीआई की स्थिति :

साल 2024-25 :

  • कुल आवेदन - 69463
  • लंबित - 49054
साल 2025-26 :

  • कुल आवेदन - 84935
  • लंबित - 51625
कुल लंबित आवेदन - 100679

पंचायत एवं ग्रामीण विकास में सबसे ज्यादा :

दोनों सालों में सबसे ज्यादा लंबित आवेदन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के हैं। इनकी संख्या आधे से ज्यादा है। इसके अलावा नगरीय प्रशासन, स्कूल शिक्षा और गृह विभाग से जुड़े आवेदन भी बड़ी संख्या में पेंडिंग हैं। जानकारी देने में यह विभाग सबसे ज्यादा कंजूस हैं।

साल 2024-25 में लंबित आवेदन :

  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास -39614
  • स्कूल शिक्षा - 1403
  • नगरीय प्रशासन - 1042
  • वन - 726
  • राजस्व - 721
  • उच्च शिक्षा - 694
  • गृह - 412
  • कृषि - 386
  • सामान्य प्रशासन - 346
साल 2026-27 में लंबित आवेदन :

  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास - 27563
  • खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति - 3276
  • स्कूल शिक्षा - 3070
  • नगरीय प्रशासन - 1514
  • वन - 4192
  • राजस्व - 1498
  • सामान्य प्रशासन - 1151
  • गृह - 1074
  • कृषि - 907
  • उच्च शिक्षा - 630
  • निष्कर्ष :
सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लेना आम आदमी का कानूनन अधिकार है। आरटीआई की जानकारी देने के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी राज्य सूचना आयोग की है। इसमें मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त नियुक्त हैं। इसके बाद भी लोगों को आरटीआई के तहत जानकारी नहीं मिल पा रही है। लोगों को कानून के तहत जानकारी न देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्या है सूचना का अधिकार कानून :

देश में सूचना का अधिकार कानून 2005 में लागू किया गया। तत्कालीन मनमोहन सरकार में यह कानून बनाया गया। इससे आम आदमी को यह अधिकार दिया गया कि वो सरकार से जुड़ी कोई भी जानकारी मांग सकता है।

  • सरकारी दफ्तरों से जानकारी पाने का अधिकार - जैसे सड़क, पानी, बिजली, राशन, पेंशन, आवास योजना पर कितना पैसा खर्च हुआ।
  • फाइल की स्थिति जान सकते हैं - आपका आवेदन, शिकायत, पेंशन या नामांतरण किस अधिकारी के पास लंबित है।
  • भ्रष्टाचार उजागर करने में मदद - फर्जी भुगतान, अधूरे काम, घोटाले या नियमों के उल्लंघन की जानकारी मिल सकती है।
  • सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचा या नहीं इसकी जांच की जा सकती है।
  • अधिकारी जवाब देने के लिए बाध्य होते हैं - सामान्यतः 30 दिनों के भीतर सूचना देनी होती है, नहीं देने पर सूचना आयोग कार्रवाई कर सकता है।
  • गरीब और ग्रामीण लोगों के लिए उपयोगी - राशन कार्ड, मनरेगा मजदूरी, पेंशन, छात्रवृत्ति जैसी समस्याओं में लोग रिकॉर्ड मांगकर अपना हक साबित कर सकते हैं।

FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में आरटीआई के कितने आवेदन लंबित हैं?
    छत्तीसगढ़ में पिछले दो सालों के आंकड़ों के अनुसार 1 लाख से अधिक आरटीआई आवेदन विभिन्न विभागों में लंबित पड़े हुए हैं।
  2. किस विभाग में सबसे ज्यादा आरटीआई आवेदन अटके हैं?
    सबसे ज्यादा लंबित आवेदन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के हैं। कुल पेंडिंग मामलों में से आधे से अधिक इसी विभाग से संबंधित हैं।
  3. आरटीआई आवेदन का जवाब कितने दिनों में मिलना चाहिए?
    कानून के अनुसार लोक सूचना अधिकारी को आरटीआई आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर मांगी गई जानकारी देनी होती है।

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