नियमितीकरण को तरसे कर्मचारी, अब ‘एक हस्ताक्षर’ से दिखाएंगे ताकत
Raipur : छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने 10 से 30 अप्रैल तक “एक हस्ताक्षर-मुख्यमंत्री के नाम” अभियान शुरू किया है। इसके तहत हर विभाग और कार्यालय के अनियमित कर्मचारी अपनी मांगों को लिखकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव सायके ईमेल पर भेजेंगे। फेडरेशन का दावा है कि यह अभियान सरकार तक कर्मचारियों की ताकत और नाराजगी दोनों पहुंचाएगा।
ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारियों ने साफ कहा है कि अब आधे-अधूरे समाधान नहीं चलेंगे। उनकी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण या स्थायीकरण, निकाले गए कर्मचारियों की बहाली, न्यूनतम वेतन की गारंटी, अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन करना और आउटसोर्सिंग-ठेका प्रथा पर रोक शामिल है। फेडरेशन ने सभी कर्मचारियों से इस अभियान में जुड़ने की अपील की है, ताकि सरकार को मजबूर किया जा सके।
आवेदन-निवेदन बेअसर
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे लगातार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्री और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बार-बार आवेदन देने के बावजूद समस्या जस की तस है। यही वजह है कि अब कर्मचारियों ने सीधा जनदबाव बनाने का फैसला किया है।
सरकार ने नहीं की ठोस घोषणा
कर्मचारियों का सब्र अब जवाब देने लगा है। सरकार के सवा दो साल के कार्यकाल में आउटसोर्सिंग, संविदा, दैनिक वेतनभोगी और मानदेय कर्मचारियों के लिए कोई ठोस घोषणा नहीं हुई। फेडरेशन का आरोप है कि जो कर्मचारी सालों से सरकारी कामकाज की रीढ़ बने हुए हैं, उन्हीं को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस बेरुखी ने कर्मचारियों को निराश और आहत कर दिया है।
विपक्ष में वादे, सत्ता में खामोशी
फेडरेशन ने सरकार को उसके पुराने वादों की याद दिलाई है। कहा गया कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तब नेताओं ने मंच साझा कर नियमितीकरण का भरोसा दिया था। “मोदी की गारंटी 2023” में भी कमेटी बनाकर समाधान की बात कही गई थी।
लेकिन हकीकत यह है कि बनी कमेटी में अनियमित कर्मचारियों को ही जगह नहीं मिली। इसे कर्मचारियों के साथ सीधा विश्वासघात बताया जा रहा है।
वादों के उलट हालात बिगड़े
फेडरेशन का आरोप है कि वादों के उलट हालात और बिगड़े हैं। कई विभागों में छटनी जारी है, महीनों से वेतन अटका है। संविदा कर्मचारियों को तय मानदेय तक नहीं मिल रहा।
न्यूनतम वेतन में 8 साल से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। ढाई साल में संविदा वेतन नहीं बढ़ा। श्रम सम्मान राशि भी कई जगह बंद पड़ी है। ऐसे में कर्मचारियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है।
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