वेदांता प्लांट हादसा ; प्राइमरी एयर फैन में खराबी ने ली 21 जानें
14 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ के सक्ती स्थित वेदांता के थर्मल पावर प्लांट में हुआ विस्फोट पूरे देश को हिला कर रख दिया। यह हादसा दोपहर करीब 2:33 बजे हुआ, जब प्राइमरी एयर फैन (PA फैन) में खराबी आ गई। इसके कारण हवा-ईंधन संतुलन बिगड़ गया और बॉयलर में दबाव बढ़ने से एक पाइप फट गई, जिससे विस्फोट हुआ।
क्या हैं PA फैन
प्राइमरी एयर फैन एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जो बॉयलर में उच्च दबाव वाली हवा प्रवाहित करके स्थिर दहन बनाए रखने में मदद करता है। उद्योग के सूत्रों के अनुसार, इस तरह की खराबी आमतौर पर रखरखाव से जुड़ी समस्याओं का संकेत देती है, और इस प्रकार की घटनाओं से पहले चेतावनी के संकेत मिलते हैं।
कारण और जांच
वर्तमान में कई मंत्रालयों की टीम इस घटना की जांच कर रही है, लेकिन प्रारंभिक निष्कर्ष यह बताते हैं कि उपकरणों के रखरखाव और संचालन में खामियां थीं। वेदांता ने पुष्टि की है कि डोंगफैंग इलेक्ट्रिक कॉर्पोरेशन द्वारा आपूर्ति किया गया उपकरण सही तरीके से काम नहीं कर रहा था।
मजदूरों और मृतकों की संख्या
इस विस्फोट में अधिकांश मृतक मजदूर थे। इसके बाद छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले की पुलिस ने वेदांता समूह के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल और अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि वेदांता और उनके उप-ठेकेदार एनजीएसएल ने मशीनरी और उपकरणों के रखरखाव और संचालन से संबंधित मानकों का सही पालन नहीं किया था।
नियामक कार्रवाई और पिछली घटनाएं
यह घटना 2017 में उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित एनटीपीसी के उन्चाहार प्लांट में हुई थी। जहा घातक विस्फोट हुआ था। यह विस्फोट भी दबाव बढ़ने के कारण हुआ था। इसके बाद, राख के संचय को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।
हालंकि यह वेदांता प्लांट हादसा पहला बड़ा हादसा नहीं है। इससे पहले 23 सितंबर 2009 को कोरबा में बालको प्लांट की निर्माणाधीन चिमनी गिरने से 45 लोगों की मौत हुई थी। हाल ही में, घटना के गवाहों को प्रभावित करने की खबरें आई थीं।
राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने वेदांता के अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। कांग्रेस नेता चरण दास महंत ने घटना की जांच एसडीएम स्तर से नहीं, बल्कि न्यायिक जांच द्वारा कराने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि घायलों को मुंबई या कोयंबा जैसे शहरों के विशेष बर्न यूनिट्स में भेजा जाए।
औद्योगिक दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी
राज्य में औद्योगिक दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के मद्देनज़र, श्रमिकों की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता अब पहले से कहीं ज्यादा महसूस हो रही है। पिछले तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ में लगभग 300 श्रमिकों की जान चली गई है और सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं।