देश संविधान से चलेगा, शरीयत से नहीं... छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने UCC का किया समर्थन
NEWS IN SHORT
- डॉ. सलीम राज ने विष्णुदेव साय द्वारा UCC फैसले का स्वागत किया।
- कहा- देश संविधान से चलेगा, व्यक्तिगत कानूनों से नहीं।
- UCC को समानता और एकता बढ़ाने वाला कदम बताया।
- वोट बैंक राजनीति पर निशाना साधा।
- उन्होंने कहा- UCC समाजिक भाईचारे को मजबूत करेगा।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इस फैसले को सामाजिक समानता और राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
डॉ. सलीम राज ने मुख्यमंत्री और राज्य मंत्रिमंडल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय प्रदेश को समान कानून व्यवस्था की ओर ले जाने में सहायक होगा।
देश संविधान से चलेगा, शरीयत से नहीं
डॉ. राज ने अपने बयान में कहा कि देश का संचालन संविधान के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था लागू हो। उन्होंने कहा की यह देश संविधान से चलेगा न कि शरीयत या व्यक्तिगत कानून से।
उन्होंने यह भी कहा कि समान नागरिक संहिता का समर्थन (Chhattisgarh Waqf Board) करना समाज में समानता स्थापित करने और विकास को गति देने के लिए आवश्यक है। उनके अनुसार, यह किसी धर्म के विरोध में नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता के पक्ष में है।
वोट बैंक राजनीति पर टिप्पणी
डॉ. सलीम राज ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि लंबे समय तक समुदायों के बीच भ्रम और भय का माहौल बनाकर वोट बैंक की राजनीति की गई। उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है।
सामाजिक एकता और योजनाओं का उदाहरण
उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में विभिन्न धर्मों के लोग सरकारी योजनाओं का लाभ एक साथ ले रहे हैं। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता का उदाहरण बताया और कहा कि समान नागरिक संहिता से यह एकता और मजबूत होगी।
राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज
UCC पर इस तरह के समर्थन के बाद राज्य में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस मुद्दे पर आगे और भी व्यापक बहस देखने को मिल सकती है, क्योंकि यह विषय कानून, समाज और धर्म तीनों से जुड़ा हुआ माना जाता है।
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