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मध्य प्रदेश के 20 जिलों में 77 करोड़ रुपए की 33 सरकारी संपत्तियां अब वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज हैं। यह खुलासा नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि कलेक्टरों की लापरवाही और अनदेखी के कारण ये संपत्तियां वक्फ बोर्ड के नाम हो गईं है। CAG की रिपोर्ट में वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है।
CAG की रिपोर्ट यह हुआ खुलासा
यह रिपोर्ट मध्यप्रदेश सरकार के 2018 से 2023 तक के कार्यकाल की है। इसे 20 फरवरी 2026 को विधानसभा में पेश किया गया। CAG ने 14 विभागों की कार्यप्रणाली और योजनाओं की गहन जांच की और कई अहम मुद्दों को सामने रखा है।
इनमें से एक प्रमुख खुलासा यह है कि 33 सरकारी संपत्तियां, जो कलेक्टरों के रिकार्ड में सरकारी संपत्तियां थीं, उन्हें वक्फ की संपत्ति के रूप में रजिस्टर्ड कर दिया गया था।
कैसे हुआ वक्फ बोर्ड के नाम पर कब्जा?
कैग के अनुसार, मध्य प्रदेश के 20 जिलों में स्थित सरकारी जमीनों को वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति के रूप में रजिस्टर करवा लिया था। रिपोर्ट के अनुसार, इन संपत्तियों की रजिस्ट्री कलेक्टरों की अनदेखी के कारण हुई है।
कलेक्टरों ने रजिस्ट्री प्रक्रिया को रोकने के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं जारी किए थे। इससे सरकारी संपत्तियों का वक्फ एक्ट के तहत दुरुपयोग हुआ और इन जमीनों पर कब्जा हो गया।
सरकार का जवाब
इस मामले में सरकार ने जवाब दिया कि यह सिर्फ एक तकनीकी गलती (Technical Mistake) है। सरकार का कहना था कि वक्फ एक्ट में जिला प्रशासन से एनओसी (No Objection Certificate) लेने का कोई प्रावधान नहीं है।
सरकार का यह भी कहना है कि जब राजस्व रिकॉर्ड का कंप्यूटरीकरण हुआ, तब इन संपत्तियों को सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया था।
कैग का जवाब
कैग ने सरकार के इस उत्तर को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन संपत्तियों की जांच की गई, उनमें से कुछ संपत्तियां हाल ही में रजिस्टर्ड हुई थीं।
इसके अलावा, दो संपत्तियों पर कलेक्टरों के जरिए आपत्ति दर्ज की गई थी। फिर भी वक्फ बोर्ड ने उन्हें वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया था।
कैग ने यह भी बताया कि जिन संपत्तियों पर वक्फ ने दावा किया था। वे सामुदायिक उपयोग के लिए रिजर्व की गई थीं। यानी ये सरकारी योजनाओं के लिए निर्धारित की गई थीं।
Sootr Knowledge
क्या है वक्फ बोर्ड?
वक्फ बोर्ड एक धार्मिक संस्था है जो मुस्लिम समुदाय से संबंधित संपत्तियों की देखरेख करती है। वक्फ संपत्तियों का उपयोग मुस्लिम समाज के कल्याण के लिए किया जाता है।
कैग क्या है?
कैग का पूरा नाम है - भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India)
इसे संवैधानिक दर्जा भी दिया गया है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 से 151 तक के तहत स्थापित किया गया है।
कैग की मुख्य जिम्मेदारियां
केंद्र और राज्य सरकारों के खर्च का लेखा परीक्षण करता है।
सरकारी योजनाओं की जांच और मूल्यांकन करता है।
वित्तीय गड़बड़ियां और घोटालों का खुलासा करना है।
कैग की रिपोर्ट क्यों अहम है?
सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं पर निगरानी रखना है।
करदाताओं के पैसों का सही तरीके से उपयोग सुनिश्चित करना है।
कैग की रिपोर्ट कहां पेश होती है?
केंद्र सरकार की रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत होती है।
राज्य सरकार की रिपोर्ट संबंधित विधानसभा में प्रस्तुत होती है।
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