छत्तीसगढ़ की चिट्ठी: राज्यसभा की रणनीति से अफीम के खेत तक…

Rajesh Lahoti | Mar 07, 2026, 19:01 IST
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छत्तीसगढ़ की इस हफ्ते की डायरी में सियासत, प्रशासन और परंपरा तीनों की दिलचस्प झलक दिखी। एक और जहां राज्यसभा के लिए फूलोदेवी नेताम के चयन के पीछे का राजनीतिक गणित सामने आया, वहीं रायपुर में कमिश्नरी का नया ठिकाना, दुर्ग का अफीम कांड सुर्खियों में रहा।

फूलोदेवी ही क्यों? जवाब हाजिर है

पूरे देश में विधायक से लेकर सीएम तय करने तक के मामले में बीजेपी हमेशा चौंकाने वाले फैसले लेती रही है। इस बार भी राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा का नाम इसी स्टाइल में तय किया गया।



बीजेपी की इस कार्यशैली पर किसी ने कोई प्रश्न नहीं किया, वहीं कांग्रेस ने जब फिर फूलोदेवी नेताम का नाम घोषित किया तो कांग्रेसियों समेत सभी का प्रश्न था ये ही फिर क्यों? इस प्रश्न के पीछे के राजनीतिक गणित बताते हुए प्रदेश के दिग्गज कांग्रेस नेता का कहना है कि राज्यसभा में सोनिया गांधी की नज़दीकियों का फ़ायदा फूलोदेवी को मिला है।



दूसरी बड़ी बात अगला चुनाव आदिवासी को ध्यान में रखकर लड़ा जाता है तो कोई बड़ी बात नहीं होगी तब फूलोदेवी नेताम छत्तीसगढ़ में एक बड़े रोल में नजर आए। बतौर राज्यसभा सांसद उन्होंने छत्तीसगढ़ को लेकर क्या किया यह मायने नहीं रखता।



आदिवासी होने के साथ ही निर्विवाद होने का उन्हें बड़ा फायदा मिलेगा। कांग्रेसी दिग्गज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं-यह फैसला बताता है कि यहाँ की गुटबाजी से दूर दिल्ली में छत्तीसगढ़ कांग्रेस का अगला नेता तैयार किया जा रहा है।



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कमिश्नरी को मिला ठिकाना

राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी का ऑफिस आखिरकार कहां रहेगा यह तय करने के बाद शिफ्ट भी कर लिया गया है. लंबे समय से भटक रही कमिश्नरी अब डिप्टी सीएम विजय शर्मा के सिविल लाइन वाले सी-3 बंगले में शिफ्ट हो गई है।



डिप्टी सीएम विजय शर्मा खुद नया रायपुर चले गए, तो पुराना बंगला पुलिस को मिल गया। यानी अब अपराधियों को पकड़ने की रणनीति उसी बंगले में बनेगी, जहां कभी राजनीतिक रणनीतियां बनती थी। सरकारी सिस्टम में इसे “बेहतर समन्वय” कहा जा रहा है।



ट्रांसफर की हलचल

इधर राजधानी में अफसरों की कुर्सियां भी थोड़ी अस्थिर महसूस कर रही हैं। विधानसभा सत्र खत्म होते ही बड़े पैमाने पर आईएएस तबादलों की चर्चा है। मंत्रालय के गलियारों में फाइलों से ज्यादा फुसफुसाहटें घूम रही हैं।



कौन जाएगा, कौन आएगा, और किसे “नई ऊर्जा” के नाम पर नई कुर्सी मिलेगी। जल संसाधन से लेकर स्वास्थ्य और परिवहन तक कई विभागों के नाम चर्चा में हैं। अफसरों के लिए यह वही मौसम है, जब कैलेंडर से ज्यादा फोन कॉल्स मायने रखते हैं।



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पदोन्नति की राहत

उधर पुलिस विभाग में थोड़ी राहत की खबर आई। राज्य सरकार ने 9 आईपीएस अधिकारियों को पदोन्नति दे दी। सेवा नियमों के हिसाब से यह सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन सरकारी दुनिया में प्रमोशन हमेशा उत्सव जैसा ही लगता है।



यानी एक तरफ कुछ अफसरों की कुर्सियां हिल रही हैं, तो दूसरी तरफ कुछ की ऊंची हो रही हैं। सिस्टम में संतुलन भी इसी तरह बनता है।



डीए का हिसाब अब अदालत पूछेगी

अब जरा न्यायालय की ओर चलते हैं। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछ लिया है कि कर्मचारियों को महंगाई भत्ता समय पर क्यों नहीं मिलता। कर्मचारियों का कहना है कि 6 से 8 महीने की देरी के कारण जेब हल्की हो जाती है और 81 महीने का एरियर सरकार के हिसाब से अभी तक रास्ते में ही है। हाईकोर्ट से सरकार को चार हफ्ते का समय मिला है जवाब देने के लिए। कर्मचारी फिलहाल कैलेंडर देख रहे हैं और सरकार शायद फाइलें।



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सड़कों पर सख्त हुए मुख्यमंत्री

इसी बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी इस हफ्ते थोड़े सख्त मूड में नजर आए। सड़कों की हालत देखकर उन्होंने साफ कह दिया कि अब डीपीआर और टेंडर के लिए अलग-अलग यूनिट बनेगी और घटिया काम पर कार्रवाई होगी।



कारण भी था। कुछ सड़कें चार साल भी नहीं टिक पाईं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भूमिपूजन और शिलान्यास माननीयों के हाथों से होना चाहिए, ताकि जनता को पता चले कि इस तरह की सड़क किसकी कृपा से बनी है।



मक्के के खेत में अफीम

लेकिन इस हफ्ते की सबसे फिल्मी खबर दुर्ग से आई। यहां मक्के की फसल के बीच अफीम की खेती पकड़ी गई। मामला और दिलचस्प तब हुआ जब इसमें भाजपा किसान मोर्चा से जुड़ा विनायक ताम्रकार का नाम सामने आया। खेत करीब 5-6 एकड़ का और अफीम की फसल की कीमत करीब एक करोड़ की बताई जा रही है।



वैसे इन दिनों खेती में “मल्टी क्रॉपिंग” को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन नशे के सौदागर ने मल्टी क्रॉपिंग के फार्मूले का उद्देश्य ही बदल दिया है। बीजेपी ने ताम्रकार को निलंबन की सजा दी है, वहीं पुलिस जांच कर रही है। उधर बीजेपी नेता का नाम आने से पूरे छत्तीसगढ़ में इस मामले की चर्चा जोरों पर हैं।



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अधूरी प्रेम कहानी और होली की परंपरा

और अब जरा होली की बात…

राजधानी रायपुर का सदर बाजार इन दिनों एक अनोखी परंपरा के लिए फिर चर्चा में है। यहां होलिका दहन के साथ सेठ नाथूराम उर्फ इलोजी की बारात निकलती है। लोककथा कहती है कि इलोजी होलिका के प्रेमी थे, लेकिन शादी से पहले ही होलिका की मृत्यु हो गई।



तब से हर साल उनकी प्रतीकात्मक बारात निकलती है। दिलचस्प बात यह है कि यहां निसंतान दंपत्ति संतान की मन्नत भी मांगते हैं। यानी छत्तीसगढ़ में यह प्रेम कहानी एक परम्परा के स्वरूप में मौजूद हैं।



इस तरह इस हफ्ते की छत्तीसगढ़ डायरी में सब कुछ है। बंगले में शिफ्ट होती कमिश्नरी, कुर्सियों का इंतजार करते अफसर, प्रमोशन से खुश पुलिस अधिकारी, डीए का हिसाब मांगते कर्मचारी, सड़कों पर नाराज मुख्यमंत्री, खेत में छुपी अफीम और सदर बाजार की अधूरी प्रेम कहानी। अगले हफ्ते फिर देखेंगे… किसकी कुर्सी हिलती है, किसकी बारात निकलती है और किस खेत में क्या उग आता है।



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