CGMSC Scam: पांच आरोपियों के खिलाफ पूरक चालान पेश, 550 करोड़ का हुआ घोटाला
NEWS IN SHORT
- CGMSC घोटाले में 5 और आरोपियों के खिलाफ पूरक चालान पेश।
- सरकार को करीब 550 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ।
- अब तक कुल 10 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश।
- फर्जी दस्तावेजों के जरिए काम हासिल किया गया।
- उपकरण तीन गुना तक ज्यादा कीमत पर सप्लाई।
NEWS IN DETAIL
5 और आरोपियों के खिलाफ पूरक चालान
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) घोटाले में ACB-EOW की टीम ने 5 और आरोपियों के खिलाफ पूरक चालान कोर्ट में पेश किया है। जांच में सामने आया है कि सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल करके शासन को लगभग 550 करोड़ रूपए का नुकसान पहुंचाया गया। इस मामले में अब तक कुल 10 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है और जांच अभी भी जारी है।
हमर लैब योजना के टेंडर में गड़बड़ी
सरकार ने जिला अस्पताल, CHC, PHC और उप-स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त जांच सुविधा देने के लिए हमर लैब योजना शुरू की थी। जांच में पता चला कि मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स खरीदने के लिए निकाले गए टेंडर में कुछ कंपनियों ने मिलकर गलत तरीके अपनाए और फर्जी दस्तावेज लगाकर काम हासिल किया।
कंपनियों ने मिलकर बनाई कार्टल
जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ कंपनियों ने आपस में मिलकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया। तीनों कंपनियों ने समान प्रकार की जानकारी भरी, समान पैटर्न में उत्पादों का विवरण दिया, लगभग एक जैसे दर कोट किए। इससे साफ हुआ कि टेंडर में प्रतिस्पर्धा को जानबूझकर प्रभावित किया गया।
रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की कीमत तीन गुना तक बढ़ाई
जांच में यह भी सामने आया कि रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की तय MRP से कहीं ज्यादा कीमत CGMSC को भेजी गई। इसके बाद मोक्षित कॉर्पोरेशन ने इन्हीं सामानों को तीन गुना तक ज्यादा कीमत पर सप्लाई किया, जिससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
550 करोड़ रूपए की आर्थिक क्षति
जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ और शासन को करीब 550 करोड़ रूपए का नुकसान पहुंचा। इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।
Sootr Knowledge
- CGMSC राज्य सरकार की संस्था है जो अस्पतालों के लिए दवाइयां और उपकरण खरीदती है।
- हमर लैब योजना का उद्देश्य लोगों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच सुविधा देना है।
- टेंडर प्रक्रिया में कार्टल बनाना कानूनन अपराध माना जाता है।
- MRP से ज्यादा कीमत पर सामान सप्लाई करना आर्थिक अनियमितता की श्रेणी में आता है।
- ACB-EOW भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों की जांच करने वाली विशेष एजेंसी है।
IMP FACTS
घोटाले से नुकसान: 550 करोड़ रूपए
पूरक चालान: 5 आरोपियों के खिलाफ
कुल आरोपियों पर चालान: 10
योजना का नाम: हमर लैब योजना
आरोप: फर्जी दस्तावेज, कार्टल बनाकर टेंडर हासिल करना, महंगी सप्लाई
आगे क्या
अब कोर्ट में मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। जांच एजेंसी बाकी लोगों की भूमिका भी जांच रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे और आरोपियों पर कार्रवाई हो सकती है।
निष्कर्ष
CGMSC घोटाले में पूरक चालान पेश होने के बाद जांच और तेज हो गई है। 550 करोड़ रूपए के नुकसान से जुड़े इस मामले में टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और महंगी सप्लाई जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। आने वाले समय में और खुलासे होने की संभावना है।
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