CGMSC Scam : 4 साल में बदले 5 एमडी, हिसाब गायब
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी सीजीएमएससी ( CGMSC – Chhattisgarh Medical Services Corporation Limited) सरकारी अस्पतालों के लिए दवाएं, उपकरण खरीदता है और निर्माण कार्य कराता है। 2021 से 2025 तक की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। निगम ने 3261 करोड़ रुपए खर्च दर्शाए लेकिन केवल 2125 करोड़ के उपयोगिता प्रमाण पत्र यानी यूसी (UC – Utilization Certificate) जारी हुए। 1136 करोड़ रुपए का हिसाब नदारद है। दवा से लेकर उपकरण और निर्माण कार्य तक हर मद में गड़बड़ी पकड़ी गई है।
1136 करोड़ का अंतर
ऑडिट में सबसे बड़ा सवाल यह है कि खर्च और उपयोगिता प्रमाण पत्र के बीच 1136 करोड़ रुपए का अंतर क्यों है। जब तक यूसी नहीं मिलता तब तक यह नहीं माना जा सकता कि पैसा सही जगह खर्च हुआ। उपकरण खरीदी में सबसे बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई। DHS (DHS – Directorate of Health Services) इक्विपमेंट मद में 280 करोड़ खर्च दर्शाए गए लेकिन केवल 31.96 करोड़ के यूसी जारी हुए। यानी 248 करोड़ का हिसाब गायब है।
मद-वार गड़बड़ी
DME (DME – Directorate of Medical Education) इक्विपमेंट में 254 करोड़ खर्च के मुकाबले केवल 24.98 करोड़ के यूसी जारी हुए। करीब 229 करोड़ का हिसाब नहीं मिला। DHS कंस्ट्रक्शन में 471 करोड़ खर्च के मुकाबले 414 करोड़ के यूसी जारी हुए — 57 करोड़ का अंतर। आयुष कंस्ट्रक्शन में 48 करोड़ खर्च के मुकाबले केवल 28 करोड़ के यूसी — 19 करोड़ का अंतर।
यूसी खर्च से अधिक
कुछ मदों में उल्टा भी हुआ। DHS दवा खरीदी में 1511 करोड़ खर्च के मुकाबले 1549 करोड़ के यूसी जारी हुए। यानी खर्च से 38 करोड़ अधिक के यूसी जारी कर दिए गए। DME दवा में भी 349 करोड़ खर्च के मुकाबले 353 करोड़ के यूसी जारी हुए। यह भी वित्तीय अनियमितता का बड़ा संकेत है।
13वें वित्त आयोग
ऑडिट में एक और गंभीर मामला सामने आया। 13वें वित्त आयोग की योजना समाप्त होने के बाद भी 48.68 लाख रुपए बैंक खाते में पड़े रहे। वित्त नियमों के अनुसार यह राशि तत्काल शासन को वापस होनी चाहिए थी। 31 मार्च 2025 तक न यह राशि लौटाई गई और न ही खाता बंद किया गया।
4 साल, 5 एमडी
इस पूरे कालखंड में पाँच प्रबंध संचालक यानी एमडी (MD – Managing Director) रहे। जनवरी 2021 से अप्रैल 2022 तक कार्तिकेय गोयल, अप्रैल 2022 से दिसंबर 2022 तक अभिजीत सिंह, दिसंबर 2022 से जनवरी 2024 तक चंद्रकांत वर्मा, जनवरी 2024 से अगस्त 2025 तक पद्मिनी भोई और अगस्त 2025 से अब तक रितेश अग्रवाल।
एमडी का जवाब : वर्तमान एमडी रितेश अग्रवाल ने कहा कि 2021 से 2025 तक का ऑडिट हो चुका है। रिपोर्ट पूरी तरह पढ़कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
FAQ
- CGMSC क्या है और इसका काम क्या है?
उ. CGMSC यानी Chhattisgarh Medical Services Corporation Limited — यह राज्य सरकार का निगम है जो सरकारी अस्पतालों के लिए दवाएं, चिकित्सा उपकरण खरीदता है और अस्पताल निर्माण कार्य कराता है। प्रदेश के लाखों मरीज इसी पर निर्भर हैं। - उपयोगिता प्रमाण पत्र क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?
उ. उपयोगिता प्रमाण पत्र यानी Utilization Certificate — यह दस्तावेज प्रमाणित करता है कि सरकारी राशि सही उद्देश्य पर खर्च हुई। बिना यूसी के यह नहीं माना जा सकता कि पैसा सही जगह गया। 1136 करोड़ का यूसी न मिलना गंभीर वित्तीय अनियमितता का संकेत है। - ऑडिट में सबसे बड़ी गड़बड़ी किस मद में मिली?
उ. सबसे बड़ी गड़बड़ी उपकरण खरीदी में मिली। DHS इक्विपमेंट में 280 करोड़ खर्च के मुकाबले केवल 31.96 करोड़ के यूसी जारी हुए — 248 करोड़ का हिसाब गायब। DME इक्विपमेंट में 254 करोड़ खर्च के मुकाबले केवल 24.98 करोड़ के यूसी — 229 करोड़ बेहिसाब।
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