IT डिपार्टमेंट के लेटर को दरकिनार कर CGMSC ने ब्लैक लिस्टेड कंपनी को दे दिए 12 करोड़ रुपए

CGMSC ने IT विभाग की चेतावनी के बावजूद 2024 में दवा कंपनी Ms ANG Life Science India Ltd को 12 करोड़ रुपए भुगतान किए, जिससे पूर्व IAS अधिकारी चंद्रकांत वर्मा समेत तीन अधिकारियों पर मामला दर्ज हुआ।

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VINAY VERMA
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NEWS IN SHORT

  • CGMSC ने IT विभाग की चेतावनी के बावजूद दवा कंपनी को 12 करोड़ रुपए दिए।
  • पूर्व IAS अधिकारी चंद्रकांत वर्मा सहित तीन अधिकारियों के खिलाफ EOW और ACB ने केस दर्ज किया।
  • मामला 2024 का है, जब कंपनी Ms ANG Life Science India Ltd को भुगतान किया गया।
  • शासन ने शिकायत पर केवल भरोसा दिलाया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
  • शिकायतकर्ता का कहना है कि सही जांच हुई तो तीनों अधिकारी जेल भी जा सकते हैं।

NEWS IN DETAIL

IT डिपार्टमेंट की चेतावनी के बाद भी दवा कंपनी को 12 करोड़ देना सीजीएमएससी के पूर्व अधिकारियों को भारी पड़ गया है। जिसमें से एक IAS अधिकारी चंद्रकांत वर्मा भी शामिल है। ईओडब्ल्यू और एंटी करप्श्न ब्यूरो ने इनके अलावा दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ केस रजिस्टर कर जांच शुरु की है। जांच के लिए जांच एजेंसियों ने शाासन के माध्यम से CGMSC से मामले की पूरी जानकारी मांगी है। 

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क्या है पूरा मामला

मामला साल 2024 का है। इस दौरान हिमांचल प्रदेश की कंपनी Ms ANG Life Science India Ltd छग शासन में दवा सप्लाई का काम करती थी। लेकिन साल 2024 में कंपनी के खिलाफ CGMSC को एक लेटर मिला। जिसमें बताया गया कि कंपनी के पास डिपार्टमेंट की करोड़ों की देनदारी है। इसलिए डिपार्टमेंट ने इनके खाते को सीज कर दिया है।

CGMSC को भी हिदायत है कि कॉरपोरेशन, दवा कंपनी के पुराने खाते नहीं बल्कि IT डिपार्टमेंट द्वारा दिए जा रहे खाते में भुगतान करे। खाता शासकीय है इसलिए पूरा पैसा डिपार्टमेंट को मिलेगा। लेकिन CGMSC ने दवा कंपनी के साथ सांठ-गांठ कर कंपनी को उसके दूसरे अकाउंट में 12 करोड़ रुपए दे दिए। 

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CGMSC Scam

पत्र में क्या कहा गया है

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने CGMSC के MDको एक लेटर जारी करते हुए औषधि खरीद और भुगतान से जुड़े एक प्रकरण में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विभाग द्वारा जारी पत्र म मामले से जुड़े सारे दस्तावेज उपलब्ध करवाने गया है। तत्कालीन MD श्रीकांत वर्मा, GM फाइनेंस मीनाक्षी गौतम और GM टेक्निकल हिरेन मनुभाई पटेल भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। 

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शासन की तरफ सेे केवल भरोसा मिला

मामले की शिकायत हुई तो शासन स्तर से जांच का भरोसा दिया गया लेकिन लीपापोती कर दी गई। जिसके बाद गड़बड़ी के खिलाफ EOW और ACB में इसकी शिकायत हुई। EOW और ACB ने शुरुआती दस्तावेज के आधार पर केस रजिस्टर कर जांच शुरु कर दिया है। और इसके संबंध में शासन के जरिए सीजीएमएससी से पूरी जानकारी मांगी है। 

तीनों अधिकारी जेल जाएंगे

शिकायतकर्ता वीके दास के मुताबिक उन्होने कई बार मामले की शिकायत शासन के पास की लेकिन वहां से केवल खानापूर्ती की जाती रही। इसलिए तीनों अधिकारियों के खिलाफ EOW और ACB में शिकायत की है। उनका कहना है कि अगर सही जांच हुई तो IAS समेत तीनों अधिकारी जेल जाएंगे।

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