छत्तीसगढ़ में 70 टन कोयला गायब होने का आरोप: GPS से खुला ट्रकों के घंटों रुकने का राज, शिकायत के बाद भी FIR नहीं

Umeshwari Baghel | Oct 22, 2026, 18:58 IST
छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन का खेल
Representational image of coal transportation in Chhattisgarh, where a company has alleged that nearly 70 tonnes of coal went missing in transit from Amera Mine to Tilda.
छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन के दौरान करीब 70 टन कोयला गायब होने का मामला सामने आया है। यह घटना अंबिकापुर की अमेरा खदान से तिल्दा स्थित एक स्टील कंपनी के लिए कोयला भेजने के दौरान हुई। कंपनी ने पुलिस से शिकायत की लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

ट्रकों के जीपीएस रिपोर्ट (छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला) में कोयले के गायब होने के साथ-साथ कई घंटों तक ट्रकों के रुकने का विवरण है। (Chhattisgarh Coal Transport) इस मामले में निगम की ओर से जांच की मांग की गई है।



17 अक्टूबर को थाने में शिकायत, कार्रवाई की मांग

स्वास्तिक एनर्जी एंड मिनरल्स बेनिफिकेशन प्राइवेट लिमिटेड ने 17 अक्टूबर को तिल्दा-नेवरा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। कंपनी ने आरोप लगाया है कि कोयला परिवहन में गड़बड़ी की जांच की जाए। उन्होंने कहा है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।




अमेरा खदान से भेजे गए कोयले में 70 टन की कमी

इस मामले की शुरुआत तब हुई जब स्टील कंपनी को अंबिकापुर की अमेरा खदान से कोयला भेजा गया था। शिकायत में बताया गया कि परिवहन के दौरान(70 Ton Coal Missing) लगभग 70 टन कोयला गायब हो गया। कंपनी ने ट्रकों की आवाजाही के रिकॉर्ड की जांच की, जिससे कई सवाल पैदा हुए हैं।



जीपीएस रिपोर्ट में खुलासा, घंटों तक रास्ते में खड़े रहे ट्रक

जीपीएस ट्रैकिंग रिपोर्ट में (Coal Transport GPS Report) साफ है कि कुछ ट्रकों ने घंटों तक रुकने का समय दर्ज किया। जैसे कि एक ट्रक पथरिया में लगभग 6 घंटे 48 मिनट तक खड़ा रहा। वहीं, दूसरा ट्रक उदयपुर में लगभग 8 घंटे 30 मिनट तक रुका। ऐसे लंबे रुकने के समय से कंपनी को स्टील कंपनी के कोयले के गायब होने की आशंका हुई है। हालांकि, ट्रकों के रुकने का असली कारण और कोयला गायब होने का सच जांच के बाद ही सामने आएगा।




सीसीटीवी, फास्टैग और धर्मकांटा रिकॉर्ड की जांच की मांग

कंपनी ने जीपीएस रिपोर्ट के अलावा कैमरा रिकॉर्ड और परिवहन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की भी जांच की मांग की है। उनका मानना है कि इन सब की मदद से असलियत का पता लगाया जा सकता है। टोल प्लाजा के रिकॉर्ड, फास्टैग ट्रांजेक्शन और धर्मकांटा की पर्चियों की जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इन सबसे यह स्पष्ट होगा कि ट्रक कौन-कौन से रास्तों से गुजरे और कितने समय रुके।



दस्तावेज देने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं, पुलिस पर सवाल

कंपनी ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। वे कहते हैं कि उन्होंने दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस ने ट्रकों की जांच की है या नहीं। जीपीएस और कैमरा रिकॉर्ड की जांच को लेकर स्थिति भी साफ नहीं है।




संदिग्ध भूमिका वाले लोगों की जांच की मांग

इस मामले में जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है, उनकी भी जांच करने की मांग की गई है। हालांकि अभी तक किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता प्रमाणित नहीं हुई है।



कोयला परिवहन और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

लगभग 70 टन कोयला गायब होने का यह मामला परिवहन व्यवस्था और उसकी निगरानी पर बड़े सवाल उठाता है। कंपनी अब पुलिस की जांच का इंतजार कर रही है। पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने और जांच की स्थिति की आधिकारिक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।



पुलिस जांच से ही सामने आएगी कोयला गायब होने की सच्चाई

(Tilda Nevra Police) इस मामले में आगे क्या होगा, यह पुलिस की जांच से ही स्पष्ट होगा। क्या यह मामला गंभीर है या इसे हल्का समझा जाए, यह सब जांच के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल तो कंपनी की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद की जा रही है।




उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में कुछ निश्चित जानकारी सामने आएगी। ट्रकों की सड़क पर गतिविधियों की जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। इस घटना ने एक बार फिर परिवहन में पार transparency और accountability के महत्व को उजागर किया है।



FAQ



  1. स्वास्तिक एनर्जी एंड मिनरल्स बेनिफिकेशन प्राइवेट लिमिटेड ने शिकायत कब और किस थाने में दर्ज कराई थी?
    स्वास्तिक एनर्जी एंड मिनरल्स बेनिफिकेशन प्राइवेट लिमिटेड ने 17 अक्टूबर को तिल्दा-नेवरा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
  2. कोयला गायब होने के मामले में क्या जांच की मांग की गई है?
    इस मामले में निगम की ओर से जांच की मांग की गई है, जिसमें जीपीएस रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच शामिल है।
  3. इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर किस प्रकार के सवाल उठाए गए हैं?
    कंपनी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं कि उन्होंने दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की है।
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