छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स एसोसिएशन फिर सस्पेंड; 7 साल में दूसरी बार एएफआई की कार्रवाई
NEWS IN SHROT
- एएफआई ने छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स एसोसिएशन को सस्पेंड किया।
- सात साल में दूसरी बार संघ पर कार्रवाई की गई।
- वित्तीय गड़बड़ी के आरोप, जांच जारी।
- एड-हॉक कमेटी गठित करने का निर्णय।
- खिलाड़ियों और चयन प्रक्रिया पर असर पड़ने की संभावना।
NEWS IN DETAIL
भारतीय एथलेटिक्स में प्रशासनिक सख्ती एक बार फिर देखने को मिली है। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) ने छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स एसोसिएशन को नियमों के उल्लंघन के कारण सस्पेंड कर दिया है। खास बात यह है कि पिछले सात साल में यह दूसरी बार है जब राज्य संघ पर ऐसी कार्रवाई की गई है, जो प्रदेश के एथलेटिक्स ढांचे के लिए गंभीर संकेत है। इससे पहले 2019 में भी संघ को 6 महीने के लिए सस्पेंड किया गया था।
सस्पेंशन का कारण और एएफआई का निर्णय
एएफआई के फैसले के अनुसार, छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स एसोसिएशन द्वारा संविधान और नियमित गतिविधियों के पालन में खामियां पाई गईं, जिससे संघ पर यह सख्त कदम उठाया गया। इसके साथ ही, अरुणाचल प्रदेश एथलेटिक्स एसोसिएशन को भी निलंबित कर दिया गया है। इन सस्पेंड राज्यों में कामकाज संभालने और चुनाव कराने के लिए एड-हॉक कमेटी गठित की जाएगी। फेडरेशन ने यह संकेत दिया है कि जिन राज्यों में प्रशासनिक प्रक्रियाएं और गतिविधियां लंबे समय से ठप हैं, वहां सख्ती जारी रहेगी।
खिलाड़ियों और चयन प्रक्रियाओं पर असर
यह कार्रवाई राज्य के खिलाड़ियों और चयन प्रक्रियाओं पर प्रत्यक्ष असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार की प्रशासनिक कार्रवाई से राज्य की एथलेटिक्स टैलेंट पाइपलाइन और खिलाड़ियों की तैयारी में रुकावट आ सकती है। अब यह देखा जाएगा कि एड-हॉक कमेटी कितनी जल्दी व्यवस्था को पटरी पर लाती है और चुनाव कब तक कराए जाते हैं।
वित्तीय गड़बड़ी और विवाद
संघ पर इस कार्रवाई के बीच विवाद और भी गहरा गया है। छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स संघ के संयुक्त सचिव रवि राजा ने आरोप लगाया कि महासचिव अमरनाथ सिंह पर 28 लाख रुपये के गबन का आरोप है। इस मामले में जांच जारी है और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। इससे संघ के प्रशासनिक ढांचे पर और अधिक सवाल खड़े हो रहे हैं।
संघ में आंतरिक विवाद
हाल ही में छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स संघ में आंतरिक विवाद भी सामने आए हैं। जीएस बांबरा के अध्यक्ष रहने के बाद नवंबर 2024 में महेंद्र आहुजा को नया अध्यक्ष चुना गया, लेकिन पंजीयक सोसायटी के रिकॉर्ड में अब भी बांबरा का नाम दर्ज है, जिससे वैधानिक स्थिति पर सवाल उठे हैं। इसके अलावा महासचिव सहित पदाधिकारियों को हटाने और आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों के कारण पूरी कार्यकारिणी को भंग करना पड़ा। अंत में, महेंद्र आहुजा ने भी इस्तीफा दे दिया।
पुरानी कार्यकारिणी के सदस्य
पुरानी कार्यकारिणी में अध्यक्ष महेंद्र आहुजा, सचिव रविशंकर धनगर, सह सचिव विनोद नायर, रितिका यादव, अरुण पाल, सुनिल नायर, अनिरुद्ध, आदित्य ठाकुर, उपाध्यक्ष सुरेश क्रिस्टोफर, सौरभ लुनिया, रणविजय प्रताप सिंह, परमेश्वर राम भगत, पपिंदर सिंह, और कोषाध्यक्ष जगपाल सिंह धारीवाल शामिल थे। लेकिन वर्तमान विवाद और प्रशासनिक संकट के कारण कार्यकारिणी को भंग किया गया।
निष्कर्ष
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स एसोसिएशन के लिए एक बड़ी चेतावनी है, और प्रदेश के एथलेटिक्स ढांचे में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है। अब यह देखना होगा कि नए प्रशासनिक उपायों के तहत स्थिति कितनी जल्दी सुधरती है और राज्य के खिलाड़ियों को कब तक इसका फायदा मिलेगा।
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