छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट : खुद की गलती से एक्सीडेंट पर बीमा कंपनी क्लेम के लिए जिम्मेदार नहीं

Umeshwari Baghel | May 11, 2026, 15:14 IST
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सड़क हादसे में मृत युवक के परिवार को बीमा कंपनी से 50 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बीमा कंपनी को 6 प्रतिशत ब्याज के साथ यह राशि एक महीने के भीतर देने का निर्देश दिया।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा आदेश 50 हजार रुपये मुआवजा दे
  • मृतक की लापरवाही पर भी ब्याज सहित मुआवजा
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला, पर्सनल एक्सीडेंट कवर से मिलेगा मुआवजा
  • कोर्ट ने बीमा कंपनी को 6% ब्याज सहित 50 हजार रुपये देने का आदेश
  • मुआवजे की डेडलाइन: एक महीने में भुगतान का निर्देश

NEWS IN DETAIL

Bilaspur। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सड़क हादसे में मृत युवक के मामले में (बीमा क्लेम पर हाई कोर्ट का फैसला) बीमा कंपनी को महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी मृतक के परिवार को 50 हजार रुपए मुआवजा और साथ में 6 प्रतिशत ब्याज भी देगी। इस फैसले को लेकर कोर्ट ने एक महीने की डेडलाइन भी तय की है।



क्या था मामला?

यह मामला एक सड़क हादसे का था, जिसमें मृतक युवक खुद वाहन चला रहा था। हादसा उसकी लापरवाही और वाहन में तकनीकी खराबी के कारण हुआ था। इसलिए, मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 166 के तहत सामान्य क्लेम याचिका पूरी तरह से मान्य नहीं की गई।



अधिकरण का फैसला और कोर्ट में चुनौती

इस मामले में पहले प्रतापपुर के अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने मृतक के परिवार को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। मृतक के परिजन ने इस फैसले को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती दी और मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की थी।



सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

हाई कोर्ट में याचिका की सुनवाई जस्टिस संजय के. अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर वाहन चालक खुद हादसे का कारण है और दुर्घटना में अन्य वाहन की कोई भूमिका नहीं है, तो बीमा कंपनी सामान्य मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं होती।



पर्सनल एक्सीडेंट कवर के तहत मुआवजा

हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि बीमा पॉलिसी में पर्सनल एक्सीडेंट कवर के तहत एक लाख रूपए की बीमा सुरक्षा मौजूद थी। इस आधार पर मृतक के परिवार को एक लाख रूपए मुआवजे का अधिकार है।



नए आदेश के तहत

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पहले दिए गए 50 हजार रूपए के मुआवजे के साथ अब बीमा कंपनी को 6 प्रतिशत ब्याज के साथ अतिरिक्त 50 हजार रूपए का भुगतान करना होगा। इसके लिए बीमा कंपनी को एक महीने की डेडलाइन दी गई है।



महत्वपूर्ण फैसले से न्याय का रास्ता साफ

यह फैसला छत्तीसगढ़ के न्यायिक इतिहास में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि अगर दुर्घटना में मृतक की अपनी लापरवाही शामिल हो, तो बीमा कंपनी को सामान्य मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। हालांकि, पर्सनल एक्सीडेंट कवर के तहत बीमा कंपनी मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती है।



न्याय की उम्मीद बढ़ी

कोर्ट के इस फैसले ने मृतक के परिवार को न्याय की उम्मीद दी है। अब, उनके पास न केवल मुआवजे की राशि बढ़ेगी, बल्कि इसके साथ ही ब्याज भी मिलेगा। यह निर्णय उन परिवारों के लिए है जो सड़क दुर्घटनाओं में अपने प्रियजनों को खो देते हैं और बीमा कंपनी से उचित मुआवजे की उम्मीद रखते हैं।



यह फैसला अन्य मामलों में भी बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर एक दिशा दिखाएगा और मुआवजे के मामलों में पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई को बढ़ावा देगा।



FAQ

1. सड़क हादसे में मुआवजा कैसे मिलता है?


मुआवजा बीमा पॉलिसी और दुर्घटना के कारण पर निर्भर करता है। यदि चालक की लापरवाही हो, तो सामान्य मुआवजा नहीं मिलेगा, लेकिन पर्सनल एक्सीडेंट कवर से मुआवजा मिलेगा।



2. मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए?


अगर मुआवजा कम लगे, तो उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर राशि बढ़ाने की मांग की जा सकती है।



3. बीमा कंपनी को मुआवजा देने के लिए कितनी डेडलाइन है?


कोर्ट बीमा कंपनी को एक महीने के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दे सकती है, जैसा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने किया था।



4. पर्सनल एक्सीडेंट कवर में क्या मिलता है?


इसमें दुर्घटना में घायल या मृत व्यक्ति के परिवार को मुआवजा मिलता है, चाहे चालक की लापरवाही हो।



5. बीमा कंपनी मुआवजा देने से इनकार करे तो क्या करें?


अगर बीमा कंपनी मुआवजा देने से इनकार करती है, तो कोर्ट में दावा दायर कर सकते हैं।



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