छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; रेरा कोर्ट नहीं, सिर्फ एक नियामक संस्था है

Umeshwari Baghel | Apr 23, 2026, 15:33 IST
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रेरा को न्यायालय की श्रेणी में नहीं माना और कहा कि रेरा में शिकायत दर्ज करने के लिए समयसीमा की कोई पाबंदी नहीं है। कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि मामले की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर फिर से की जाए।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का अहम फैसला रेरा को न्यायालय नहीं माना
  • रेरा में शिकायतों के लिए समयसीमा की पाबंदी नहीं: हाई कोर्ट
  • खरीदारों के अधिकारों की रक्षा, समय सीमा के बिना शिकायत की मंजूरी
  • ट्रिब्यूनल का फैसला गलत, हाई कोर्ट ने फिर से सुनवाई का आदेश दिया
  • रेरा एक्ट की धारा 31 के तहत शिकायत करने की कोई समय सीमा नहीं

NEWS IN DETAIL

Bilaspur। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने एक महत्वपूर्ण फैसले में रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) के अधिकारों को लेकर स्पष्ट किया है।



कोर्ट ने कहा कि (छत्तीसगढ़ रेरा)रेरा न्यायालय की श्रेणी में नहीं आता है और इसे एक नियामक संस्था माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा



कि समय सीमा का हवाला देकर किसी केस को खारिज करना गलत है, क्योंकि ऐसी संस्थाओं में देरी से केस दायर करने पर कोई पाबंदी नहीं हो सकती।



रेरा में शिकायत करने की समयसीमा नहीं है

हाई कोर्ट ने कहा कि रेरा में शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं है। इसका मतलब यह है कि यदि किसी ने देरी से भी शिकायत की है, तो उसे खारिज नहीं किया जा सकता।



कोर्ट ने मकान खरीदारों के अधिकारों की रक्षा की बात करते हुए यह भी कहा कि समय सीमा की पाबंदी के आधार पर शिकायतें खारिज करना उचित नहीं है।



क्या था मामला?

यह मामला जगदलपुर निवासी निधि साव का था, जिन्होंने रायपुर के पास स्थित दुर्ग जिले के अमलेश्वर में ग्रीन अर्थ सिटी में एक फ्लैट बुक कराया था।



बिल्डर पर समय पर कब्जा न देने और घटिया निर्माण का आरोप लगाते हुए उन्होंने पहले स्थानीय प्रशासन से शिकायत की, लेकिन जब प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो उन्होंने रेरा में मामला दर्ज किया।



रेरा का आदेश और अपील

रेरा ने बिल्डर को दो महीने के अंदर फ्लैट का काम पूरा करने और कब्जा देने का आदेश दिया था, वहीं खरीदार को बकाया राशि जमा करने को कहा था।



इस आदेश के खिलाफ निधि साव ने रेरा अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील की, लेकिन ट्रिब्यूनल ने आवेदन खारिज कर दिया, क्योंकि उसे आवेदन में देरी का हवाला दिया गया था।



हाई कोर्ट का निर्णय

हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को खारिज करते हुए आदेश दिया कि मामले को फिर से गुण-दोष के आधार पर सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल में भेजा जाए।



कोर्ट ने कहा कि रेरा एक्ट की धारा 31 के तहत शिकायत करने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं है, इसलिए इसे तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।



इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया कि रेरा जैसे विशेष निकायों पर समय सीमा का लागू नहीं होना चाहिए, जब तक कि कानून में इसकी स्पष्ट उल्लेख न हो।



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