लेजर लाइट और शोर को लेकर सरकार की लापरवाही जारी, हाईकोर्ट सख्त, गृह विभाग से फिर मांगा हलफनामा

VINAY VERMA | Feb 05, 2026, 09:20 IST
chhattisgarh high court strict action noise pollution laser lights
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शोर प्रदूषण और लेजर लाइट के खतरों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने गृह विभाग को फटकार लगाई और 12 मार्च तक इसका हल निकालने का अल्टीमेटम दिया है।

छत्तीसगढ़ में बढ़ते शोर प्रदूषण और लेजर लाइट्स से होने वाले संभावित खतरों को लेकर हाईकोर्ट ने प्रशासनिक स्तर पर सख्त रुख अपनाया है। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अहम निर्देश दिया है।



कोर्ट ने कहा कि शोर प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं और लेजर लाइट्स के उपयोग को लेकर ठोस कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि वे दोनों मुद्दों पर अगली सुनवाई से पहले विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करें।



महाराष्ट्र ने लिया गंभीरता से

मामले की सुनवाई की मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष हुई। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने अदालत को बताया कि लेजर लाइट्स से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है। महाराष्ट्र से आंखों की रोशनी जाने जैसी घटनाओं की रिपोर्ट सामने आने के बाद इस विषय को गंभीरता से लिया गया है।



सरकार ने मांगा समय

राज्य सरकार ने पूर्व आदेश के अनुपालन के लिए और समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है। शिकायतकर्ता के वकील ने दलील दी कि पहले भी समय मांगा गया था। वहीं, अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शोर प्रदूषण के कारण नागरिकों को हो रही परेशानी को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।



जनता को राहत नहीं

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि वर्ष 1985 के अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन का मसौदा लंबे समय से विभागों के बीच घूम रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है। हाईकोर्ट ने प्रशासन को चेताया कि फाइलों की देरी के कारण आम जनता को राहत नहीं मिल पा रही है। न्यायालय ने निर्देश दिया कि संशोधन प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।



कार्ययोजना की जानकारी देनी होगी

प्रशासनिक फैसले के तहत अब गृह विभाग को शोर प्रदूषण और लेजर लाइट्स दोनों मुद्दों पर स्पष्ट नीति और कार्ययोजना कोर्ट के समक्ष रखनी होगी। इस आदेश को राज्य में शोर प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक अहम प्रशासनिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।



12 मार्च को सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। यदि तब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य सरकार पर और कड़ी कार्रवाई की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट का यह रुख साफ संकेत देता है कि अब शोर प्रदूषण जैसे जनहित के मुद्दों पर प्रशासनिक ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



ये खबर भी पढ़िए...



छत्तीसगढ़ मोबाइल टावर योजना: अब हर गांव में दौड़ेगा नेटवर्क, द सूत्र की खबर का बड़ा असर



बच्चा नाजायज है फिर भी देना होगा गुजारा भत्ता, जानिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने क्यों सुनाया ये फैसला



छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण विरोधी कानून पर सुप्रीम अड़चन, बजट सत्र में विधेयक पेश करने में बड़ी उलझन



छत्तीसगढ़ को रेलवे विकास के लिए 7 हजार 470 करोड़, प्रदेश को मिला अब तक का सबसे बड़ा बजट



Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • गृह विभाग
  • राज्य सरकार
  • लेजर लाइट