काम ना आया सरकार का फॉर्मूला, राजस्व के 93 हजार से ज्यादा मामले पेंडिंग, वाट्सएप पर देना था जमीन का नामांतरण

Arun Tiwari | Mar 18, 2026, 13:13 IST
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छत्तीसगढ़ में सरकार ने जमीन से जुड़े मामलों की पेंडेंसी खत्म करने के लिए एक फॉर्मूला तैयार किया था। इस फॉर्मूले के तहत किसानों को जमीनों का नामांकन और सीमांकन जैसे काम वाट्सएप पर ही मुहैया कराने थे। लेकिन सरकार का यह फॉर्मूला फुस्स हो गया।

NEWS IN SHORT

  • सरकार का फॉर्मूला काम न आया
  • राजस्व के 93 हजार से ज्यादा मामले पेंडिंग
  • सरकार ने बनाया था तकनीकी फॉर्मूला
  • वाट्सएप पर मिलनी थी नामांतरण की नकल

NEWS IN DETAIL

सरकार का फॉर्मूला फुस्स :

छत्तीसगढ़ में जमीन से जुड़े मामलों की पेंडेंसी खत्म करने के लिए सरकार ने जिस नए फॉर्मूले को लागू किया था। वह अब बेअसर साबित होता दिख रहा है। किसानों को राहत देने के लिए जमीन के नामांकन और सीमांकन जैसी राजस्व सेवाएं वाट्सएप के जरिए उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका खास असर नहीं दिखा। प्रदेश में वर्तमान में 93 हजार से अधिक राजस्व प्रकरण लंबित हैं। हालत यह है कि किसान अब भी अपनी जमीन से जुड़े कामों के लिए तहसील दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।



इतने हैं लंबित मामले :

  • राजस्व मामले लंबित - 93768
  • तहसील स्तर पर लंबित - 66292
  • नामांतरण - 24143
  • बंटवारा - 7534
  • सीमांकन - 7372

ये है नया फॉर्मूला :

. फर्जी रजिस्ट्री पर रोक - अब रजिस्ट्री के समय खरीदार, विक्रेता और गवाहों की पहचान आधार और बायोमेट्रिक से होगी, जिससे किसी दूसरे व्यक्ति को खड़ा कर फर्जी रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकेगी।



. ऑनलाइन रजिस्ट्री सर्च - खसरा नंबर डालते ही उस जमीन की पुरानी रजिस्ट्री और लेनदेन की पूरी जानकारी ऑनलाइन देखी और डाउनलोड की जा सकेगी।



. ऑनलाइन भारमुक्त प्रमाण पत्र - जमीन पर लोन, बंधक या किसी तरह का विवाद है या नहीं, इसकी जानकारी अब ऑनलाइन प्रमाण पत्र से मिल सकेगी।



. कैशलेस स्टांप और रजिस्ट्री फीस-अब स्टांप और पंजीयन शुल्क एक साथ ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे। भुगतान डेबिट क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या UPI से किया जा सकेगा।



. व्हाट्सएप से अपडेट - रजिस्ट्री के अपॉइंटमेंट से लेकर पूरी प्रक्रिया तक की जानकारी और अलर्ट व्हाट्सएप पर मिलेंगे। रजिस्ट्री की कॉपी भी व्हाट्सएप से डाउनलोड हो सकेगी।



. डिजिलॉकर में सुरक्षित दस्तावेज - रजिस्ट्री के सभी दस्तावेज डिजिलॉकर में सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी से मिल सकें।



. रजिस्ट्री दस्तावेज स्वतः तैयार - ऑनलाइन फॉर्म में जानकारी भरते ही रजिस्ट्री का दस्तावेज खुद-ब-खुद तैयार हो जाएगा और सीधे उप-पंजीयक को भेजा जा सकेगा।



. घर बैठे दस्तावेज तैयार- किरायानामा, शपथ पत्र और अनुबंध जैसे गैर-पंजीकृत दस्तावेज घर बैठे डिजिटल स्टांप के साथ ऑनलाइन बनाए जा सकेंगे।



. घर बैठे रजिस्ट्री - कुछ दस्तावेजों जैसे रेंट एग्रीमेंट और मॉर्गेज डीड की रजिस्ट्री अब पूरी तरह ऑनलाइन घर से ही की जा सकेगी।



. रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण- रजिस्ट्री पूरी होते ही खरीदार का नाम अपने आप राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगा। इसके लिए अलग से आवेदन नहीं करना पड़ेगा।



ऑनलाइन व्यवस्था जमीन पर हवा हवाई :

सरकार ने दावा किया था कि डिजिटल माध्यमों के जरिए नामांकन और सीमांकन की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जाएगा। इसके तहत किसानों को वाट्सएप पर आवेदन भेजकर ही अपने प्रकरण दर्ज कराने और जानकारी लेने की सुविधा देने की बात कही गई थी।



लेकिन कई जिलों में यह व्यवस्था या तो पूरी तरह लागू नहीं हो पाई या फिर तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से प्रभावी नहीं बन सकी। ग्रामीण इलाकों के किसानों का कहना है कि नामांतरण समेत जमीन से जुड़े अन्य कामों के लिए बार-बार तहसील कार्यालय जाना पड़ता है।



इन जिलों में इतने मामले लंबित :

  • दुर्ग - 9296
  • रायपुर - 5182
  • बिलासपुर - 4920
  • महासमुंद - 4291
  • बलौदाबाजार - 2823
  • गरियाबंद - 2410
  • बालौद - 2899
  • बेमेतरा - 3470
  • राजनांदगांव - 3960
  • खैरागढ़ - 3034
  • कांकेर -4457
  • कोरबा - 4326
  • रायगढ़ - 4884
  • सूरजपुर - 4281
  • जशपुर - 3231

निष्कर्ष :

राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य जमीन से जुड़े हजारों मामले लंबित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ डिजिटल व्यवस्था लागू कर देने से समस्या हल नहीं होगी, जब तक कि जमीनी स्तर पर अमले की कमी और प्रक्रियाओं की जटिलता को दूर नहीं किया जाता। फिलहाल सरकार की मंशा पेंडेंसी कम करने की जरूर थी, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह प्रयोग अभी उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं दे सका है।



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