25 किलोमीटर दूर शिफ्ट हुए स्वास्थ्य काउंसिल! काम के लिए अब लंबा सफर तय करेंगे लोग

VINAY VERMA | Apr 17, 2026, 18:59 IST
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छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने सभी मेडिकल काउंसिलों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय में शिफ्ट कर दिया है। इससे एक ओर जहां कार्यों में समन्वय बढ़ने की उम्मीद है।

Raipur। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब राज्य के सभी मेडिकल काउंसिल एक ही कैंपस में संचालित होंगे। इसके लिए सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष



(पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम रायपुर)विश्वविद्यालय में सभी काउंसिल के लिए ऑफिस अलॉट कर दिया है। इसके साथ एक नई परेशानी भी खड़ी हो गई है। अब लोगों को अपने काम के लिए करीब 25 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा।



कौन-कौन से काउंसिल हुए शिफ्ट?

स्वास्थ्य विभाग के आदेश के मुताबिक छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल, आयुर्वेद काउंसिल, नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल, स्टेट फार्मेसी काउंसिल, डेंटल काउंसिल और एलाइड हेल्थ काउंसिल



ये सभी काउंसिल प्रदेश के MBBS डॉक्टरों, डेंटल डॉक्टरों, आयुर्वेद डॉक्टरों, नर्सेस, फार्मासिस्ट से जुड़े होते हैं। अब ये सब यूनिवर्सिटी कैंपस से ही संचालित होंगे।



इन सभी को अलग-अलग कमरे और ऑफिस स्पेस भी अलॉट कर दिया गया है। विभाग का दावा है कि इससे कामकाज में समन्वय बेहतर होगा और प्रक्रियाएं तेज होंगी।



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सुविधा के नाम पर दूरी का झंझट

सरकार भले ही इसे वन-रूफ सिस्टम बता रही हो, लेकिन हकीकत में यह फैसला आम लोगों और प्रोफेशनल्स पर भारी पड़ सकता है। पहले ये काउंसिल शहर के भीतर या अपेक्षाकृत आसान पहुंच वाले इलाकों में थे



जिससे काम करवाना आसान था। अब यूनिवर्सिटी कैंपस तक पहुंचने के लिए लोगों को करीब 25 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा। खासतौर पर डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और स्टूडेंट्स को बार-बार चक्कर लगाने में दिक्कत होगी।



एक जगह, बेहतर मॉनिटरिंग का तर्क

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी काउंसिल को एक ही परिसर में लाने से प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत होगा। फाइलों की मूवमेंट तेज होगी और अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।



साथ ही ऑडिटोरियम, कॉन्फ्रेंस हॉल और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं भी साझा होंगी, जिससे संस्थागत कामकाज में सुधार आएगा।



ग्राउंड रियलिटी: सुविधा या सिरदर्द?

हालांकि जमीनी स्तर पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह फैसला वास्तव में लोगों के लिए सुविधाजनक है? यूनिवर्सिटी का लोकेशन शहर से दूर है और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं भी सीमित हैं। ऐसे में रोजमर्रा के काम के लिए इतनी दूरी तय करना समय और पैसे दोनों पर भारी पड़ेगा।



आदेश जारी, तुरंत प्रभाव से लागू

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सभी काउंसिल को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने आवंटित कमरों में जल्द से जल्द शिफ्ट हो जाएं। साथ ही यह भी कहा गया है कि आवंटित स्पेस का उपयोग केवल कार्यालयीन कार्यों के लिए ही किया जाएगा।



सुधार की कोशिश या नई परेशानी?

सरकार का मकसद भले ही सिस्टम को केंद्रीकृत करना हो, लेकिन बिना पहुंच और सुविधा को ध्यान में रखे लिया गया यह फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है।



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