बस्तर के जंगल में बचे सिर्फ 35 नक्सली, 3 हज़ार सरेंडर,500 का इनकाउंटर

Arun Tiwari | Mar 25, 2026, 15:55 IST
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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म होने के करीब है, और अब सिर्फ 35 नक्सली बचे हैं। पिछले दो सालों में 5,000 से ज्यादा नक्सलियों का सफाया किया गया है, जिसमें 3,000 नक्सलियों ने सरेंडर किया हैं।

Raipur : छत्तीसगढ़ के जंगलों में अब बस 35 नक्सली बचे हैं। सरकार को उम्मीद है कि जल्द ही वे सरेंडर कर देंगे। गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि 31 मार्च तक छत्तीसगढ़ सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा।



अब अस 35 नक्सली बाकी

सरकार का दावा है कि छत्तीसगढ़ में सिर्फ 35 नक्सली बचे हैं। यह उत्तर दक्षिण इलाके में हैं। गृह मंत्री विजय शर्मा ने दावा किया कि बचे हुए नक्सली भी सरेंडर कर देंगे। विजय शर्मा ने एलान कर दिया है कि बस्तर की 96 फीसदी ज़मीन नक्सल से मुक्त हो गई। 31 मार्च को लाल आतंक से छत्तीसगढ़ मुक्त हो जाएगा।



साढ़े 5 हज़ार का हिसाब किताब

पिछले दो साल में छत्तीसगढ़ में साढ़े 5 हज़ार नक्सलियों का हिसाब किताब कर दिया है। अब तक 3 हज़ार नक्सली सरेंडर कर चुके हैं जिनका पुनर्वास हो चुका है। 2 हज़ार नक्सलियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। और 500 नक्सली इनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। विजय शर्मा ने इसके पीछे जवानों का पराक्रम बताया। केन्दीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त 2024 को कहा था कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का सफाया हो जाएगा।



जवानों के कैम्प बनेंगे स्कूल

लाल आतंक से मुक़ाबले के लिए बस्तर में बड़े पैमाने पर जवानों के बेस कैंप बनाये गए। जवानों के लिए अन्य निर्माण भी किये गए। सरकार अब इनको स्कूल और अस्पताल बनाएगी। जब जवानों की वापसी हो जाएगी तब इनका इस्तेमाल स्कूल, अस्पताल, उपार्जन केंद्र जैसी सरकारी व्यवस्थाओं में किया जाएगा।



नक्सलवाद की उलटी गिनती

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खात्मे की ओर है। यह दावा गृहमंत्री विजय शर्मा ने किया है। विजय शर्मा का कहना है कि छत्तीसगढ़ में 31 मार्च तक सशस्त्र नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। यानी जो तारीख 31 मार्च तय की गई है उस पर नक्सलवाद से छत्तीसगढ़ मुक्त हो जाएगा। इस तारीख अब केवल एक सप्ताह ही बचा है। यानी नक्सली खात्मे की उलटी गिनती शुरु हो गई हैं। विजय शर्मा कहते हैं कि इसके बाद भी सावधानी बरतना बेहद जरुरी है। अभी हैप्पी न्यू ईयर न कहकर एहतियात रखना आवश्यक है।



सरकार के पुनर्वास ने किया काम

इस मामले में सरकार की पुनर्वास नीति ने बड़ा काम किया है। सुरक्षाबलों के शौर्य और पुनर्वास के कंधे ने नक्सलियों को सरेंडर करने के लिए मजबूर किया है। सैकड़ों की संख्या में नक्सली पुनर्वास कर बेहतर जीवन जी रहे हैं। वहीं हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली के इनकाउंटर से नक्सलियों के हौसले भी पस्त पड़ गए। सरेंडर नक्सलियों में बड़े इनाम वाले बड़े नक्सली नेता भी शामिल हैं।



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