पदनाम बदलने के बदले वेतन बढ़ाने की मांग छोड़ने की शर्त पर अड़ी सरकार, नर्सों ने किया इनकार, अब 8 नवंबर से हड़ताल
इस रिपोर्ट का आधार पांच साल पुराना प्रस्ताव है, जिसे जून 2021 में शासन खारिज कर चुका है। ऐसे में नर्सों को पदनाम बदलने की घोषणा के साथ वेतन का मामला छोड़ने का दबाव महसूस हो रहा है। एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. रीना राजपूत का कहना है कि मांगें नहीं मानी गईं, तो 8 नवंबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
घोषणा के साथ शर्त
विवाद की शुरुआत इंटरनेशनल नर्सिंग डे पर रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के बाद हुई। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने नर्सों के पदनाम बदलने की घोषणा की थी। इसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात भी कही गई। लेकिन इसी बीच नर्सिंग संवर्ग के सामने वेतनवृद्धि की मांग वापस लेने की शर्त रखे जाने का मामला सामने आया।
एसोसिएशन इस शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं हुआ। संगठन का कहना है कि पदनाम बदलना और वेतन विसंगति दूर करना अलग-अलग मुद्दे हैं। पदनाम बदलने की घोषणा के बदले वर्षों से चली आ रही वेतनवृद्धि की मांग छोड़ना मंजूर नहीं है। यहीं से मंत्री और नर्सिंग संवर्ग के बीच टकराव बढ़ गया।
पुरानी रिपोर्ट से नया विवाद
एसोसिएशन के शर्त नहीं मानने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग की रिपोर्ट ने विवाद को और बढ़ा दिया। 16 सितंबर 2026 को शासन को भेजे गए जवाब में विभाग ने कहा कि नर्सिंग स्टाफ को 2012 के भर्ती नियमों के अनुसार वेतन दिया जा रहा है। इसलिए वेतन विसंगति नहीं है।
लेकिन नर्सिंग संवर्ग इस दलील को स्वीकार नहीं कर रहा। संगठन का कहना है कि विभाग ने समस्या का समाधान तलाशने के बजाय पुरानी रिपोर्ट का सहारा लिया है। जिस प्रस्ताव को जून 2021 में खारिज किया जा चुका है, उसी को दोबारा सामने रखकर वेतन विसंगति नहीं होने की बात कही जा रही है।
कमेटी की सिफारिशें ठंडे बस्ते में
नर्सों के वेतन का मामला कई साल से अटका है। वर्ष 2018 में ए.पी. त्रिपाठी समिति ने एम्स और उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र तथा ओडिशा के वेतन ढांचे का अध्ययन किया था। समिति ने छत्तीसगढ़ में स्टाफ नर्सों का ग्रेड पे 2800 रूपए से बढ़ाकर 4400 रूपए करने की सिफारिश की थी। इसके अलावा 1200 रूपए ड्रेस अलाउंस और 4800 रूपए नर्सिंग भत्ता देने का सुझाव भी दिया गया था।
हालांकि, जून 2021 में शासन ने इन सिफारिशों को खारिज कर दिया। अब विभाग का कहना है कि वेतन में विसंगति ही नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नर्सें वेतन ढांचे में बदलाव की मांग कर रही हैं, तो उनकी मांगों पर नए सिरे से विचार करने के बजाय पुरानी रिपोर्ट को ही अंतिम जवाब क्यों बनाया जा रहा है?
ग्रेड पे पर आर-पार
नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीना राजपूत के नेतृत्व में संगठन अलग-अलग पदों के लिए अलग ग्रेड पे की मांग कर रहा है। इसमें स्टाफ नर्स के लिए 4800 रूपए, नर्सिंग सिस्टर के लिए 5400 रूपए, सहायक नर्सिंग अधीक्षक के लिए 6600 रूपए, उप नर्सिंग अधीक्षक के लिए 7600 रूपए और नर्सिंग अधीक्षक के लिए 8600 रूपए ग्रेड पे शामिल है।
विभागीय आकलन के मुताबिक, वर्तमान में कार्यरत 1332 नर्सिंग कर्मियों पर सालाना करीब 48.92 करोड़ रूपए खर्च होते हैं। संगठन की मांगें मानने पर इन पदों के लिए अतिरिक्त वार्षिक भार करीब 33.07 करोड़ रूपए बताया गया है। वहीं, सभी 3259 स्वीकृत पदों के हिसाब से यह अतिरिक्त भार 81.70 करोड़ रूपए होगा।
8 नवंबर से हड़ताल
नर्सिंग एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को आंदोलन की चेतावनी 50 दिन पहले ही दी जा चुकी है। इसके बावजूद वेतन संबंधी मांगों पर सहमति नहीं बन पाई है। मेडिकल कॉलेजों में चरणबद्ध सांकेतिक विरोध जारी है। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में भी नर्सिंग स्टाफ काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराने की तैयारी में है।
अब संगठन ने 8 नवंबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। यानी आंदोलन की तारीख अभी भविष्य में है और सरकार के पास बातचीत के लिए समय है। लेकिन यदि पदनाम बदलने की घोषणा के साथ वेतनवृद्धि की मांग छोड़ने का दबाव ही विवाद की वजह बना रहा, तो टकराव और बढ़ सकता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार नर्सों की वेतन संबंधी मांगों पर बातचीत करेगी या मामला पुरानी रिपोर्ट के हवाले ही रहेगा?