मंत्री का अधूरा वादा : वेतनवृद्धि नहीं चाहिए, लिखकर देना होगा
Raipur। छत्तीसगढ़ की नर्सों के सामने शासन ने अजीब शर्त रख दी है। पदनाम बदलवाना है तो वेतन बढ़ोतरी की मांग छोड़नी होगी। स्टाफ नर्स को अब नर्सिंग ऑफिसर और सीनियर नर्सिंग सिस्टर को सीनियर नर्सिंग ऑफिसर बनाने की तैयारी है। लेकिन इसके लिए नर्सिंग संगठन से बाकायदा घोषणा-पत्र मांगा है कि पदनाम बदलने के आधार पर वेतनमान बढ़ाने की मांग नहीं की जाएगी। नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्रेड पे और वेतनवृद्धि तो सरकार को देना ही होगा।
नाम बदलेगा, पैसा नहीं
केंद्र की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी नर्सों का पदनाम बदलने की प्रक्रिया चल रही है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव सोनचंद साहू ने आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा को पत्र भेजकर जानकारी मांगी है। शासन की शर्त साफ है। पदनाम बदलने से वर्तमान वेतनमान, सेवा शर्त, काम और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं होगा। यानी नाम नया होगा, लेकिन वेतन पुराना ही रहेगा।
नर्सिंग संघ ने लिखी चिट्ठी
शासन की शर्त के बाद नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. रीना राजपूत की ओर से एक लेटर भेजा गया है। जिसमें कहा गया है कि पदनाम परिवर्तन से संवर्ग, वरिष्ठता, भर्ती, पदोन्नति और जिम्मेदारियों में बदलाव की मांग नहीं होगी। लेकिनं ग्रेड पे और वेतनवृद्धि की पुरानी मांगें जारी रहेंगी। न वेतन और भत्तों की पुरानी मांग अभी भी कायम है।
14 साल से लड़ाई
नर्सिंग कर्मचारियों की ग्रेड पे और वेतनवृद्धि की मांग पिछले 14 वर्षों से लंबित है। संघ के मुताबिक इस मामले में आयुक्त चिकित्सा शिक्षा नेे स्वास्थ्य सचिव को प्रस्ताव भेजा है। मामला अभी प्रक्रियाधीन है। यानी एक तरफ नर्सिंग ऑफिसर का नया पदनाम मिलने जा रहा है। दूसरी तरफ वेतन बढ़ाने का मामला अभी फाइलों में घूम रहा है।
विभाग खेल करने की तैयारी में
दरअसरल ग्रेड पे के आधार पर वेतनमान, नर्सिंग अलाउंस और वॉशिंग अलाउंस का मामला पुराना है। 2019 में शासन की ओर से गठित कमेटी की अनुशंसा के आधार पर प्रस्ताव तैयार हुआ था। लेकिन आज तक इसे लागू नहीं किया गया। जिसके बाद मामला कोर्ट पहुंच गया। माना जा रहा है कि कोर्ट मे इसे जीतने के लिए विभाग की तरफ से शर्त रखी गई है। नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। नर्सिंग ऑफिसर का नाम मंजूर है, लेकिन 14 साल पुराने वेतन के हक से समझौता मंजूर नहीं।
मंत्री की घोषणा पर सवाल
इंटरनेशनल नर्सिंग डे पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने पदनाम परिवर्तन की घोषणा की थी। उस समय मंत्री ने कहा था कि मुख्यमंत्री से भी मौखिक सहमति मिल चुकी है और जल्द आदेश जारी होगा। नर्सों को उम्मीद थी कि अब लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी। लेकिन अब प्रक्रिया में शर्त सामने आ गई है। इससे मंत्री की घोषणा और मौजूदा सरकारी प्रक्रिया के बीच अंतर दिखाई दे रहा है।
पहले भी अटकी थी फाइल
पदनाम बदलने का मामला नया नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद छत्तीसगढ़ में भी इसे लागू करने की पहल हुई थी। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर ने राज्य में इसे लागू करने की घोषणा की थी। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री की घोषणा का पालन करने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य था। लेकिन सरकार बदली और फाइल रुक गई।
सरकार बदली, फाइल ठंडे बस्ते में
पिछली कांग्रेस सरकार में भी पदनाम परिवर्तन को लेकर नई प्रक्रिया शुरू हुई। लेकिन सत्ता बदलने के साथ यह फाइल भी ठंडे बस्ते में चली गई।अब नई सरकार में मामला फिर खुला है। इस बार पदनाम के साथ वेतन को लेकर शर्त जुड़ गई है। यही शर्त अब नर्सिंग कर्मचारियों के बीच चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है।
सबसे बड़े सवाल
अगर पदनाम सिर्फ नाम बदलने की प्रक्रिया है तो वेतन बढ़ोतरी की मांग नहीं करने का घोषणा-पत्र क्यों? नर्सिंग ऑफिसर नाम देने से सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ना है तो वेतन का मुद्दा साथ क्यों जोड़ा गया? 14 साल से लंबित ग्रेड पे और वेतनवृद्धि का क्या होगा? और सबसे बड़ा सवाल—मंत्री ने जब बिना शर्त आदेश की बात कही थी, तो अब शर्त कहां से आ गई?
FAQ
- छत्तीसगढ़ में नर्सों का पदनाम क्या बदला जाएगा?
छत्तीसगढ़ में स्टाफ नर्स को नर्सिंग ऑफिसर और सीनियर नर्सिंग सिस्टर को सीनियर नर्सिंग ऑफिसर बनाने की तैयारी है। - सरकार ने पदनाम बदलने के लिए क्या शर्त रखी है?
सरकार ने नर्सिंग संगठनों से घोषणा-पत्र मांगा है कि पदनाम परिवर्तन के आधार पर वेतनवृद्धि या वेतनमान बढ़ाने की मांग नहीं की जाएगी। - नर्सिंग कर्मचारियों की मुख्य मांग क्या है?
नर्सिंग कर्मचारी पदनाम परिवर्तन के साथ ग्रेड पे, वेतनवृद्धि और भत्तों की 14 साल पुरानी मांग पूरी करने की मांग कर रहे हैं।
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