छत्तीसगढ़ में सौर सुजला योजना बंद; अब पीएम कुसुम से सिंचाई करेंगे किसान, 25 हजार पंपों का प्रस्ताव केंद्र को भेजा
NEWS IN SHORT
- सौर सुजला योजना बंद, पीएम कुसुम योजना से सोलर पंप मिलेंगे।
- केंद्र सरकार को 25 हजार सोलर पंप लगाने का प्रस्ताव भेजा गया।
- अब तक 1 लाख 6 हजार सोलर पंप लगाए गए, 50 हजार आवेदन पेंडिंग।
- सोलर पंप की लागत अब पहले से कम, 3 एचपी पंप 2 लाख 5 हजार में।
- योजना की मंजूरी मिलते ही पंप लगाने का कार्य शुरू होगा।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए कृषि सिंचाई की दिशा में एक बड़ा बदलाव आया है। राज्य में पिछले आठ वर्षों से संचालित सौर सुजला योजना को अब औपचारिक रूप से बंद कर दिया गया है। इसके स्थान पर अब केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना के तहत किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाए जाएंगे।
क्रेडा (छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) ने आगामी सत्र के लिए केंद्र सरकार को 25 हजार सोलर पंप लगाने का प्रस्ताव भेजा है, जिसकी मंजूरी मिलते ही जमीनी स्तर पर काम शुरू हो जाएगा।
सौर सुजला से पीएम कुसुम तक का सफर
छत्तीसगढ़ में सौर सुजला योजना की शुरुआत 1 नवंबर 2016 को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों तक सिंचाई सुविधा पहुँचाना था, जहाँ बिजली के खंभे या ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं थे।
सफलता का आंकड़ा: योजना की शुरुआत से अब तक प्रदेश में लगभग 1 लाख 60 हजार सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं।
सालाना लक्ष्य: शुरुआती वर्ष (2016-17) में 12 हजार पंप लगाए गए थे, जिसके बाद हर साल औसतन 20 हजार पंप लगाने का लक्ष्य रखा गया।
वर्तमान स्थिति: वर्ष 2025-26 के लिए भी 20 हजार का लक्ष्य था, लेकिन नीतिगत बदलाव के कारण राज्य की योजना में केवल 7 हजार पंप ही लग पाए और शेष कार्य अब नई योजना के तहत होगा।
50 हजार आवेदन लंबित
योजना के बदलाव के कारण वर्तमान में क्रेडा के पास लगभग 50 हजार आवेदन लंबित हैं। इन किसानों को अब केंद्र सरकार की मंजूरी और नई गाइडलाइंस का इंतजार करना होगा। क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी के अनुसार, 25 हजार पंपों का प्रस्ताव केंद्र को भेज दिया गया है। जैसे ही वहां से हरी झंडी मिलेगी, पेंडिंग आवेदनों का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
लागत और सब्सिडी का नया गणित
सौर सुजला योजना के तहत किसानों को बेहद कम खर्च (लगभग 10 से 20 हजार रुपये) में पंप मिल जाते थे। पीएम कुसुम योजना में सब्सिडी का ढांचा क्या होगा, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हालांकि, तकनीकी विकास के कारण सोलर पंपों की कुल लागत में कमी आई है:
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा देने के लिए अब केंद्र और राज्य मिलकर 'पीएम कुसुम' के माध्यम से आगे बढ़ेंगे। हालांकि सौर सुजला योजना का बंद होना एक युग का अंत है, लेकिन पीएम कुसुम के व्यापक दायरे से प्रदेश के उन हजारों किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से सिंचाई के आधुनिक साधनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब सबकी नजरें केंद्र सरकार की मंजूरी और नई सब्सिडी दरों पर टिकी हैं।
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