सीएम या मंत्री ने 30 दिन काटी जेल तो जाएगा पद, जेपीसी की रिपोर्ट तैयार

Arun Tiwari | Jun 17, 2026, 18:33 IST
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केंद्र सरकार राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए नया कानून ला रही है जिसमें गंभीर आरोप में 30 दिन न्यायिक हिरासत पर मुख्यमंत्री और मंत्रियों का पद स्वतः समाप्त होगा।

RAIPUR : राजनीति में अपराधीकरण को रोकने के लिए केंद्र सरकार नया कानून लाने जा रही है। जेपीसी ने कानून में संशोधन विधेयक पर अपनी रिपोर्ट को अंतिम रुप दे दिया है। यह रिपोर्ट अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को सौंपी जाएगी। इस संशोधन के बाद यह कानून और सख्त हो जाएगा।



प्रस्तावित कानून के अनुसार यदि किसी मुख्यमंत्री या मंत्री को ऐसे अपराध में गिरफ्तार किया जाता है, जिसमें पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, और वह लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे पद छोड़ना होगा। यदि संबंधित व्यक्ति स्वेच्छा से पद नहीं छोड़ता है, तो 31वें दिन उसका पद स्वतः रिक्त माना जाएगा। जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में मुख्यमंत्री की सलाह पर उपराज्यपाल संबंधित मंत्री को पद से हटा सकेंगे, जबकि मुख्यमंत्री स्वयं हिरासत में होने की स्थिति में उन्हें इस्तीफा देना होगा।



जेपीसी की बैठक :

ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी की बैठक में इस विधेयक को अंतिम रुप दे दिया गया है। संविधान संशोधन विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण यह प्रावधान उन जनप्रतिनिधियों से जुड़ा है जो गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपित हैं। बैठक में कहा गया कि यह विधेयक दोषसिद्धि से पहले सजा देने का प्रयास नहीं है, बल्कि सार्वजनिक पदों की नैतिक गरिमा बनाए रखने का उपाय है। समिति के सदस्यों का मानना है कि जनता का विश्वास तभी कायम रह सकता है जब सरकार और शासन व्यवस्था से जुड़े लोग कानून और नैतिकता के मानकों का पालन करें।



बैठक के दौरान राजनीति के अपराधीकरण को रोकने और सार्वजनिक जीवन में नैतिक मानकों को मजबूत करने के उद्देश्य से लाए गए 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर विशेष रूप से चर्चा हुई। समिति का मानना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए उच्च नैतिक मानदंड आवश्यक हैं। इस समिति की अध्यक्ष अपराजिता पांडे हैं और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल इसके सदस्य हैं।



सदन में चर्चा के लिए जाएगा विधेयक :

इस विधेयक के संबंध में हुई बैठक में समिति ने विधेयकों पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देते हुए आगे की कार्रवाई के लिए लोकसभा अध्यक्ष के समाने प्रस्तुत करने का निर्णय लिया। समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने कहा कि 11 बैठकों में विभिन्न पक्षों, विशेषज्ञों और राज्यों के प्रतिनिधियों से सुझाव लेने के बाद रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसे अब सदन में चर्चा के लिए भेजा जाएगा। इस बैठक में बृजमोहन अग्रवाल ने भी अपने सुझाव रखे।



बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति उसकी नैतिक वैधता है। उनके अनुसार सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों का आचरण कानून के सर्वोच्च आदर्शों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सिविल सेवाओं में 48 घंटे से अधिक की हिरासत पर ‘डीम्ड सस्पेंशन’ लागू हो जाता है, उसी प्रकार गंभीर अपराधों में लंबे समय तक हिरासत में रहने वाले निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए भी स्पष्ट मानदंड होना चाहिए।



बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि विधेयक में 30 दिनों की हिरासत और पांच वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों की शर्त रखकर मनमानेपन की आशंकाओं को सीमित किया गया है। उनका मानना है कि राजनीति के अपराधीकरण को रोकने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।



लोकसभा में 46 फीसदी सांसदों पर अपराध :

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में 251 यानी 46 फीसदी सांसदों पर अपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 169 सांसदों पर सीरियस केस हैं। यानी 31 फीसदी सांसदों पर गंभीर मामले हैं। वहीं मध्यप्रदेश विधानसभा में 90 विधायकों यानी 39 फीसदी पर आपराधिक मामले हैं। इनमें से 34 यानी 15 फीसदी पर गंभीर मामले हैं। छत्तीसगढ़ में 17 विधायकों यानी 19 फीसदी पर आपराधिक मामले और 7 विधायक यानी 8 फीसदी पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। राजस्थान में 61 विधायक यानी 31 फीसदी और 44 विधायक यानी 22 फीसदी पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यदि यह संविधान संसोधन हो जाता है तो कई मौजूदा माननीयों को मुश्किल आ जाएगी।



FAQ

  1. यदि व्यक्ति स्वयं पद नहीं छोड़ता तो क्या होगा?
    उत्तर – ऐसी स्थिति में 31वें दिन उसका पद स्वतः रिक्त (खाली) माना जाएगा।
  2. जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में क्या प्रावधान है?
    उत्तर – मुख्यमंत्री की सलाह पर उपराज्यपाल संबंधित मंत्री को हटा सकेंगे, जबकि मुख्यमंत्री स्वयं हिरासत में होने की स्थिति में उन्हें इस्तीफा देना होगा।
  3. सिविल सेवाओं में हिरासत संबंधी कौन सा नियम है जिसका उल्लेख किया गया?
    उत्तर – सिविल सेवाओं में 48 घंटे से अधिक की हिरासत पर ‘डीम्ड सस्पेंशन’ लागू हो जाता है।

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