एक्शन मोड में सीएम विष्णुदेव साय, कलेक्टरों को अल्टीमेटम, शिकायतें फाइलों में दबीं तो खैर नहीं
छत्तीसगढ़ राज्य में इस साल फिर से सुशासन तिहार मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना सुशासन तिहार का बिगुल फूंक दिया है। मुख्यमंत्री सचिवालय से जारी एक पत्र ने प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सीधे कलेक्टरों को संबोधित करते हुए दो टूक कह दिया है कि 30 अप्रैल तक पेंडिंग काम निपटाएं, वरना जवाबदेही तय होगी।
30 अप्रैल तक की डेडलाइन
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को लिखे पत्र की शुरुआत प्रिय कलेक्टर से तो की है, लेकिन इसके भीतर का लहजा बिल्कुल सख्त है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 30 अप्रैल 2026 तक जिलों में लंबित प्रकरणों पर स्ट्राइक की जाए।
जिन 7 प्रमुख बिंदुओं पर फोकस
1. जमीन के मामले जिसमें नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे मुद्दे, जो सालों से तहसील कार्यालयों में धूल खा रहे हैं, उन्हें तत्काल निपटाना होगा।
2. मजदूरी भुगतान के तहत बकाया भुगतान को लेकर गंभीरता दिखाने के लिए कहा है।
3. आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जारी करने में होने वाली देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
4. बिजली, ट्रांसफार्मर संबंधी काम
5. हैंडपंप सुधार जैसे जमीनी कार्यों को प्राथमिकता देनी है।
6. उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत योजना और पेंशन योजनाओं का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना अनिवार्य है।
7. पुराने बकाया भुगतान को तुरंत करने कहा है
1 मई से सजेगा विष्णु दरबार
पत्र के अनुसार 1 मई से 10 जून 2026 के बीच प्रदेश भर में जन समस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जाएगा। ये शिविर केवल औपचारिकता नहीं होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में हर 15-20 ग्राम पंचायतों के क्लस्टर पर एक शिविर लगेगा। शहरी क्षेत्रों में वार्डों के क्लस्टर के आधार पर कैंप लगेंगे। शिविर में मिलने वाली शिकायतों का निराकरण एक माह के भीतर करना होगा और आवेदक को इसकी लिखित सूचना भी देनी होगी।
सरप्राइज इंस्पेक्शन
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने केवल आदेश ही नहीं दिया है, बल्कि वे खुद मैदान में उतरने वाले हैं। पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि मुख्यमंत्री स्वयं विकास कार्यों का औचक निरीक्षण करेंगे। दोपहर के बाद कलेक्टर और जिला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक होगी और शाम को प्रेस वार्ता के जरिए जनता को हिसाब दिया जाएगा।
ब्यूरोक्रेसी के लिए संकेत
इस आदेश की प्रतिलिपि मुख्य सचिव से लेकर पुलिस महानिदेशक और सभी संभाग आयुक्तों को भेजी गई है। यह इस बात का सबूत है कि पूरी प्रशासनिक मशीनरी को एक साथ एक्टिव मोड में लाया जा रहा है।
इस पर सवाल
सीएम विष्णुदेव साय की इस सख्ती का असर जिलों के कलेक्टोरेट में कितनी तेजी से दिखता है। क्या वाकई पटवारी और तहसीलदार स्तर पर अटके हुए जमीन के मामले 30 अप्रैल तक सुलझ पाएंगे?
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